''लोकतंत्र खातिर तेलंगा शहीद होलक, अब ई नेता मन उकर वंशज के चादर-धोती देवेना, इकर से का पेट भरी''

।। दुर्जय पासवान ।। गुमला : ‘वीर स्वतंत्रता सेनानी शहीद तेलंगा खड़िया लोकतंत्र कर खातिर जान देलक. अब नेता मन उकर वंशज के चादर-धोती देवैंना. इकर से का पेट भरी. नेता मन अपन जेब भरत हैं. मुदा, देश खातिर जान देवेक वाला शहीद कर वंशज उपरे नेता मन कर ध्यान नखे’.यह कहना है तेलंगा खड़िया […]
।। दुर्जय पासवान ।।
गुमला : ‘वीर स्वतंत्रता सेनानी शहीद तेलंगा खड़िया लोकतंत्र कर खातिर जान देलक. अब नेता मन उकर वंशज के चादर-धोती देवैंना. इकर से का पेट भरी. नेता मन अपन जेब भरत हैं. मुदा, देश खातिर जान देवेक वाला शहीद कर वंशज उपरे नेता मन कर ध्यान नखे’.यह कहना है तेलंगा खड़िया के वंशज सोमरा पहान का. मंगलवार को सोमरा पोढ़ा व घाघरा गांव जाने वाले रास्ते पर पशुओं को चराने के लिए ले जाते मिले. ठीक वहां पास शहीद तेलंगा खड़िया की प्रतिमा लगी हुई है.
प्रतिमा क्षतिग्रस्त थी. प्रतिमा को दिखाते हुए सोमरा ने कहा, हमारे वंशज तेलंगा जिंदा रहते देश के लिए खूब लड़ाई लड़े और जान भी दी. आज उनकी प्रतिमा लगी हुई है. उसको भी असामाजित तत्व लोग क्षतिग्रस्त कर दिया.सोमरा ने कहा कि तेलंगा खड़िया का जन्म मुरगू गांव में ठुइयां खड़िया व पेतो खड़िया के घर में हुआ था. खड़िया समुदाय के लोग मुरगू गांव में रहते थे. परंतु जब तेलंगा ने अंग्रेजों के जुल्मों और सितम व जमींदारी प्रथा के खिलाफ आवाज बुलंद किया तो मुरगू क्षेत्र में रहने वाले जमींदारों ने खड़िया समुदाय को गांव से निकाल दिया.
तेलंगा सहित खड़िया जाति की जितनी जमीन मुरगू गांव में थी. उसपर मुरगू क्षेत्र के जमींदारों ने कब्जा कर लिया. तेलंगा जब अंग्रेज व जमींदारों के खिलाफ बगावत पर उतरे तो उन्हें जंगलों में शरण लेनी पड़ी. हमारे जितने वंशज थे. वे लोग जमींदारों से डरकर मुरगू से भागकर घाघरा गांव में पहाड़ के किनारे आकर बस गये. तब से तेलंगा के नौ परिवार घाघरा गांव में रह रहे हैं.
सोमरा ने यह भी कहा कि हर चुनाव में हमलोग वोट देते हैं. लेकिन आज तक किसी नेता ने हमारी दुर्दशा पर ध्यान नहीं दिया. सोमरा को वृद्धावस्था पेंशन भी नहीं मिलती. शहीदों के वंशजों का पक्का घर अधूरा है. गांव में पीने के पानी की व्यवस्था नहीं है. शौचालय बना है. राशन कार्ड है. परंतु गैस चूल्हा नहीं मिला है.
सोमरा ने कहा कि हमारे गांव जाने वाली सड़क भी खराब है. रात को पैदल चलने पर रास्ते में गिर जाते हैं. अब चुनाव के बाद ही हमारे गांव व शहीद के वंशजों की विकास होने की उम्मीद है.
* शहीद के वंशजों ने कहा
शहीद के परपोता जोगिया की पत्नी पुनी खड़ियाईन ने कहा कि शहीद का पोता होने के कारण जोगिया खड़िया को एक शहीद आवास मिला है, वह भी अधूरा है. अभी मिट्टी के घर में रह रहे हैं. जोगिया का बेटा बिशुनपुर स्कूल में पढ़ता है. सरकार व प्रशासन से जो सुविधा मिलनी चाहिए. वह सुविधा नहीं मिली है.शहीद का परपोता संतोष खड़िया ने कहा कि शहीद तेलंगा खड़िया के 16 वंशज घाघरा गांव में रहते हैं. वंशावली में भी सभी का नाम है, लेकिन सरकार द्वारा अभी तक पांच शहीद व दो पीएम आवास दिया गया है. गांव में रोजगार नहीं रहने के कारण कुछ लोग पलायन कर गये हैं.
* टूटी सड़कों पर फंसेंगे नेता के वोट
नागफेनी से लेकर घाघरा तक सड़क खराब है. जगह-जगह गडढे हैं. हालांकि कुछ स्थानों पर बोल्डर पत्थर डालकर छोड़ दिया गया है. अभी तक इसे समतल नहीं किया गया है. जिससे लोगों को आवागमन में परेशानी हो रही है. गांव के लोगों ने कहा कि इस चुनावी मौसम में नेताजी ध्यान नहीं दे रहे हैं. इसलिए टूटी सड़कों पर नेताओं के वोट फंसेंगे. यह रोड किसी प्रत्याशी के तीन से चार हजार वोट प्रभावित कर सकता है.
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