गुमला : स्वच्छता मिशन में 1.16 करोड़ की हेराफेरी, शौचालय की राशि को रिश्तेदारों के खाता में किया ट्रांसफर

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 07 Sep 2019 10:11 PM

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दुर्जय पासवान, गुमला जिला जल एवं स्वच्छता समिति गुमला में शौचालय निर्माण की राशि की हेराफेरी हुई है. यहां अनुबंध पर कार्यरत कर्मचारियों ने अपने भाई, पिता, रिश्तेदार व दोस्तों के खाता में लाखों रुपये ट्रांसफर कर लिया है और उन पैसों से महंगी गाड़ी व कई कीमती सामान की खरीद की है. प्राप्त रिपोर्ट […]

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दुर्जय पासवान, गुमला

जिला जल एवं स्वच्छता समिति गुमला में शौचालय निर्माण की राशि की हेराफेरी हुई है. यहां अनुबंध पर कार्यरत कर्मचारियों ने अपने भाई, पिता, रिश्तेदार व दोस्तों के खाता में लाखों रुपये ट्रांसफर कर लिया है और उन पैसों से महंगी गाड़ी व कई कीमती सामान की खरीद की है. प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार एक करोड़ 16 लाख रुपये से अधिक की राशि की हेराफेरी की गयी है. इसका खुलासा सीसीटीवी फुटेज की जांच से भी हो गयी है. फर्जी हस्ताक्षर करने वाले कर्मचारी का भी पता चल गया है. इसकी जांच शुरू हो गयी है.

हेराफेरी करने वाले कर्मचारियों ने विभाग के कार्यपालक अभियंता चंदन कुमार झा का फर्जी हस्ताक्षर कर लाखों रुपये दूसरे खातों में ट्रांसफर कराया है. विभाग की प्राथमिक रिपोर्ट के अनुसार दूसरे खातों में भेजी गयी रकम एक करोड़ 16 लाख रुपये है. लेकिन यह राशि बढ़ भी सकती है.

इस संबंध में इइ श्री झा ने शनिवार को गुमला थाना को प्राथमिकी दर्ज करने के लिए आवेदन सौंपा है. आवेदन दो बार सौंपा गया. पहली बार जो आवेदन दिया गया. उसमें कुछ त्रुटि थी. थानेदार शंकर ठाकुर के कहने पर दोबारा आवेदन लिखा गया. लेकिन उस आवेदन में भी कुछ त्रुटि है. लेकिन मामला गंभीर होने के कारण थाना प्रभारी ने आवेदन को रख लिया है. थाना प्रभारी शंकर ठाकुर ने कहा है कि मामले की जांच शुरू कर दी गयी है. प्राथमिकी दर्ज कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जायेगी.

इस केस में दो लोग फंसेंगे

स्वच्छता मिशन के तहत शौचालय निर्माण के कार्य में कंप्यूटर ऑपरेटर, प्रखंड समन्वयक, अनुश्रवण अधिकारी, लेखाकार, कॉर्डिनेटर हैं. 1.16 करोड़ रुपये से अधिक की राशि की हेराफेरी के बाद सभी लोगों की संलिप्तता बतायी जा रही है. लेकिन सीसीटीवी फुटेज की जांच व कुछ लोगों से लिये गये बयान के बाद स्वच्छता मिशन के जिला कॉर्डिनेटर व एमएनई के फंसने की उम्मीद ज्यादा है.

क्योंकि बैंक ऑफ इंडिया के सीसीटीवी फुटेज में कुछ कर्मचारियों को फर्जी हस्ताक्षर करते हुए देखा गया है. हालांकि इस मामले में बैंक अधिकारियों के भी फंसने की बात कही जा रही है. लेकिन विभाग की माने तो जिस दिन राशि को सरकारी खाते से निजी खाते में ट्रांसफर कराया गया था. उस दिन बैंक के एक अधिकारी छुटटी पर थे. हालांकि पुलिस हर पहलुओं पर जांच कर सकती है.

कार्यालय में प्रवेश पर रोक लगायी

राशि हेराफेरी के बाद स्वच्छता मिशन के कुछ कर्मचारियों को कार्यालय में घुसने पर वर्जित कर दिया गया है. साथ ही सख्त हिदायत दी गयी है. जबतक मामले की पूरी जांच नहीं हो जाती. अभी तक आरोप लगे कर्मचारी कार्यालय में प्रवेश नहीं कर सकते हैं. यहां तक कि किसी दस्तावेज के साथ छेड़छाड़ करने व कंप्यूटर के उपयोग पर भी रोक लगा दी गयी है.

तीन लाख घूस लेने का आरोप

इधर, स्वच्छता मिशन में लाखों रुपये के हेराफेरी की जानकारी के बाद दो सप्लाईर राजेश कुमार व विक्रम कुमार कार्यालय पहुंचे. इन लोगों ने प्रभात खबर को बताया कि गुमला जिले में 56 हजार शौचालय में पेन व पाइप लगाने की जिम्मेवारी मेसर्स खुशी कंस्ट्रक्शन को दिया गया था. इसके एवज में कॉर्डिनेटर धीरज कुमार ने काम देने के एवज में पांच लाख रुपये की मांग किया था. जिसमें तीन लाख रुपये दिया गया था.

घूस देने के बाद पेन व पाइप सप्लाई की जिम्मेवारी मिली. कंस्ट्रक्शन ने गुजरात से 3100 पीस पेन व पाइप मंगाया. जिसमें अबतक 1600 शौचालय के लिए पेन व पाइप सप्लाई की गयी. अभी भी गोदाम में 1500 पेन व पाइप बचा हुआ है. जिसका सप्लाई करना है. अब शौचालय की राशि के हेराफेरी की सूचना मिली है तो इसमें हमारा पैसा डूबने का डर है. उन लोगों ने कहा है कि हमलोगों ने जो घूस दिया है. उसे वापस लेकर रहेंगे.

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