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गुमला : रिम्स से नहीं मिली एंबुलेंस, नवजात के शव को लेकर भटकती रही मां

Updated at : 01 Aug 2019 5:46 AM (IST)
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गुमला : रिम्स से नहीं मिली एंबुलेंस, नवजात के शव को लेकर भटकती रही मां

दुर्जय पासवान रातभर रांची के एक घर में रही गुमला : गुमला की बिन ब्याही नाबालिग मां अपनी नवजात पुत्री के शव को गोद में लेकर रांची में भटकती रही, लेकिन शव को गुमला लाने के लिए एंबुलेंस नहीं मिला. बुधवार को बस से शव को लेकर नाबालिग मां गुमला थाना पहुंची. यहां भी डेढ़ […]

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दुर्जय पासवान
रातभर रांची के एक घर में रही
गुमला : गुमला की बिन ब्याही नाबालिग मां अपनी नवजात पुत्री के शव को गोद में लेकर रांची में भटकती रही, लेकिन शव को गुमला लाने के लिए एंबुलेंस नहीं मिला. बुधवार को बस से शव को लेकर नाबालिग मां गुमला थाना पहुंची.
यहां भी डेढ़ घंटे के इंतजार के बाद सनहा दर्ज किया गया. सनहा दर्ज करने के बाद गुमला पुलिस से शव को गांव पहुंचाने के लिए वाहन की मांग की गयी, लेकिन सदर थाने में वाहन नहीं था. अंत में मीडिया की पहल पर गुमला सदर अस्पताल से एंबुलेंस की व्यवस्था करा कर शव को गांव तक पहुंचाया गया.
गुमला एसएनसीयू में आग लगने के बाद रांची रेफर किया गया : नाबालिग (16 वर्षीया) ने बताया कि उसने गुमला सदर अस्पताल में एक बेटी को जन्म दिया था. उसका वजन एक किलो 10 ग्राम था और वह बीमार भी थी.
इसलिए नवजात को एसएनसीयू (स्पेशल न्यूबोर्न केयर यूनिट) में भर्ती कर इलाज किया जा रहा था. इसी बीच 26 जुलाई को शॉर्ट सर्किट से एसएनसीयू में आग लग गयी. बच्ची को इमरजेंसी डोर से एसएनसीयू से निकाल कर जान बचायी गयी थी. चूंकि बच्ची कुपोषित थी.
उसका एसएनसीयू में ही इलाज किया जा सकता था, इसलिए डॉक्टर ने उसे रांची स्थित रिम्स रेफर कर दिया था. सीडब्ल्यूसी की पहल पर 27 जुलाई को दत्तक ग्रहण केंद्र लोहरदगा के सदस्य के साथ बच्ची को रिम्स भेजा गया. साथ में बच्ची की मां व नानी भी थी, लेकिन 30 जुलाई को अपराह्न करीब 3:30 बजे बच्ची की इलाज के क्रम में मौत हो गयी.
डेढ़ घंटे तक बैठे रहे, थाना ने कुछ नहीं किया : नाबालिग
बेटी की मौत के बाद उसकी मां व नानी ने रिम्स के कुछ लोगों से बात की. शव को गुमला ले जाने की व्यवस्था के बारे में पूछा. लेकिन अस्पताल में किसी ने सही जानकारी नहीं दी. नाबालिग ने बताया कि जब एंबुलेंस नहीं मिली, तो दत्तक केंद्र लोहरदगा के पदाधिकारी के साथ बरियातू थाना गये, जहां बच्ची की मौत पर सनहा दर्ज कराना था.
डेढ़ घंटे तक बैठे रहे, लेकिन थाना ने कुछ नहीं किया. काफी इंतजार के बाद थाना के एक अधिकारी ने कहा कि यह मामला गुमला का है, इसलिए गुमला ले जायें. तबतक रात हो चुकी थी. एंबुलेंस भी नहीं मिली. तब दत्तक केंद्र लोहरदगा के एक पदाधिकारी, जिनका घर रांची में है, वो नाबालिग व उसकी मां को बच्ची के शव को अपने घर ले गयी. नाबालिग अपनी बेटी के शव को रात भर गोद में लिये रही. बुधवार की सुबह बस से दिन के 10 बजे गुमला पहुंची.
बेटी की मौत पर तो रो पड़ी मां : करौंदा गांव की नाबालिग लड़की ने सदर अस्पताल गुमला में 25 जुलाई की रात को एक बेटी को जन्म दिया. बेटी के जन्म के बाद मां व उसके परिवार के लोगों ने नवजात को अपनाने से इंकार कर दिया था. सीडब्ल्यूसी के कहने पर बीमार नवजात बेटी के इलाज कराने तक उसकी मां साथ में थी, लेकिन जब मंगलवार को बेटी की मौत हुई, तो नाबालिग मां रो पड़ी.
बीमार होने के कारण नवजात बच्ची को रांची रिम्स भेजा गया था, जहां नवजात की मौत हो गयी. बुधवार को शव को गुमला लाया गया. थाना में सनहा दर्ज हो गया है.
शंभु सिंह, चेयरमैन, सीडब्ल्यूसी, गुमला
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