सहरसा में श्रावणी मेला से पहले उठी बड़ी मांग, लाखों श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए सरकार से लगाई गुहार

Published by : Pratyush Prashant Updated At : 07 Jun 2026 9:57 AM

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- सहरसा - बाबा मटेश्वर धाम

Sarhasa News : सहरसा में हर साल लाखों कांवरिया 80 किलोमीटर की पदयात्रा कर बाबा मटेश्वर धाम पहुंचते हैं. लेकिन इस बार श्रावणी मेला शुरू होने से पहले श्रद्धालुओं ने सरकार से पूछा है—आस्था के इस बड़े केंद्र को आखिर कब मिलेगी पर्याप्त सुविधाएं?

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सहरसा के सिमरीबख्तियारपुर से आयुष कुमार की रिपोर्ट.

Sarhasa News : सावन का पवित्र महीना नजदीक आते ही प्रसिद्ध बाबा मटेश्वर धाम में श्रावणी मेला की तैयारियों को लेकर मांगें तेज होने लगी हैं. लाखों श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र इस प्राचीन शिवधाम में बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए डाक एवं कांवरिया संघ ने राज्य सरकार से विशेष पहल की मांग की है. श्रद्धालुओं का कहना है कि हर वर्ष भारी भीड़ उमड़ने के बावजूद मंदिर परिसर में आधारभूत सुविधाओं का विस्तार नहीं हो पाया है. ऐसे में आगामी श्रावणी मेला को लेकर सुरक्षा और व्यवस्थाओं को मजबूत करना जरूरी हो गया है.

आस्था का केंद्र, जहां उमड़ता है श्रद्धा का सैलाब

बलवाहाट स्थित बाबा मटेश्वर धाम बिहार के प्राचीन और प्रमुख शिवालयों में गिना जाता है. श्रावण और भादो माह में यहां लाखों डाकबम, कांवरिया और श्रद्धालु पहुंचते हैं. राजघाट छर्रापट्टी साहेबपुरकमाल से गंगाजल लेकर श्रद्धालु करीब 80 किलोमीटर की कठिन पदयात्रा पूरी कर बाबा के दरबार में जलाभिषेक करते हैं.

सावन की सोमवारी के दौरान यहां श्रद्धालुओं की संख्या इतनी बढ़ जाती है कि मंदिर परिसर के बाहर कई किलोमीटर लंबी कतारें लग जाती हैं.

पिछली भीड़ ने बढ़ाई प्रशासन की चिंता

डाक एवं कांवरिया संघ के अध्यक्ष मुन्ना भगत ने अनुमंडल पदाधिकारी आलोक राय के माध्यम से राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के मंत्री के नाम आवेदन सौंपा है. आवेदन में बताया गया है कि पिछले श्रावणी मेले के दौरान अत्यधिक भीड़ के कारण लगभग 200 मीटर लंबी बांस-बल्ला बैरिकेडिंग टूट गई थी.

उस समय प्रशासन की तत्परता से स्थिति संभाल ली गई थी, लेकिन श्रद्धालुओं का कहना है कि भविष्य में ऐसी स्थिति किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है. इसलिए समय रहते व्यवस्थाओं को और मजबूत किया जाना चाहिए.

2.25 करोड़ की सूची में नहीं मिला स्थान

श्रद्धालुओं की नाराजगी का एक बड़ा कारण यह भी है कि हाल ही में राज्य सरकार द्वारा विभिन्न शिवालयों में श्रावणी मेला व्यवस्था के लिए 2.25 करोड़ रुपये की राशि आवंटित की गई, लेकिन बाबा मटेश्वर धाम को इस सूची में शामिल नहीं किया गया.

स्थानीय लोगों का कहना है कि जब यहां लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं, तो इस धाम को भी विशेष प्राथमिकता मिलनी चाहिए.

सुविधाओं और सुरक्षा के लिए विशेष पहल की मांग

श्रद्धालुओं ने सरकार से मंदिर परिसर में बैरिकेडिंग, पेयजल, शौचालय, स्वास्थ्य शिविर, प्रकाश व्यवस्था और सुरक्षा के बेहतर इंतजाम के लिए राशि उपलब्ध कराने की मांग की है.

उनका कहना है कि बाबा मटेश्वर धाम केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि लाखों लोगों की आस्था का केंद्र है. ऐसे में श्रावणी मेला के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा सुनिश्चित करना प्रशासन और सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए.

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लेखक के बारे में

By Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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