मानव तस्करों के चंगुल में फंसी, पुलिस ने मुक्त कराया

Published at :06 Mar 2019 12:58 AM (IST)
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मानव तस्करों के चंगुल में फंसी, पुलिस ने मुक्त कराया

बीमार पिता किे इलाज के लिए 15 हजार कर्जा ली थी. इलाज में पिता की मौत हो गयी गुमला : एक बेटी ने कर्ज लेकर अपने बीमार पिता का इलाज कराया. 15 हजार कर्ज लिया था, लेकिन बीमार पिता की जान बच नहीं सकी. अब इलाज के लिए मदद करने वाले लोग अपना कर्ज वापस […]

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बीमार पिता किे इलाज के लिए 15 हजार कर्जा ली थी. इलाज में पिता की मौत हो गयी

गुमला : एक बेटी ने कर्ज लेकर अपने बीमार पिता का इलाज कराया. 15 हजार कर्ज लिया था, लेकिन बीमार पिता की जान बच नहीं सकी. अब इलाज के लिए मदद करने वाले लोग अपना कर्ज वापस मांग रहे हैं. बकायेदारों का कर्ज उतारने के लिए बेटी पढ़ाई छोड़ दिल्ली कमाने गयी, लेकिन दिल्ली में भी किस्मत साथ नहीं दिया और वह मानव तस्करों की चंगुल में फंस गयी. खैरियत रही कि पुलिस ने उसे मुक्त कराया. इसके बाद उसे रांची फिर गुमला सकुशल भेजा. मंगलवार को लड़की गुमला पहुंची.
यह कहानी चैनपुर प्रखंड की एक असुर जनजाति बेटी की है. उसका नाम बुद्धिया असुर (बदला नाम) है. तीन भाई-बहनों में वह दूसरे नंबर पर है. गरीबी के कारण 2018 के जनवरी माह में बुद्धिया के पिता की मौत हो गयी. पिता के इलाज के लिए बुद्धिया ने गांव के ही एक व्यक्ति से 15 हजार रुपये कर्ज लिया था, लेकिन पिता की मौत के बाद कर्ज वापस करने की चिंता थी. बुद्धिया ने प्रभात खबर को अपनी अापबीती सुनायी है. उसने कहा कि घर में मां, भाई व छोटी बहन है.
बड़े भाई ने शादी कर ली है, लेकिन वह अकेले घर का जीविका चला नहीं पाता है. गांव में भी वैसा कोई काम नहीं है, जिससे गांव में मजदूरी कर कर्ज चुका सके. इसलिए सोचा एक साल दिल्ली में काम करके पैसा जमा करूंगी.
उसके बाद गांव लौट कर कर्ज चुका दूंगी. इसके बाद मैट्रिक की परीक्षा लिखूंगी, लेकिन दिल्ली में एक तस्कर के चक्कर में फंस गयी. उसे प्रताड़ित किया गया, तो वह भाग गयी. बुद्धिया ने कहा कि सरकार की योजना हमारे गांव में महज दिखावा है. प्रशासन मदद करे, तो मैं 15 हजार रुपये कर्ज चुका सकती हूं, क्योंकि दिल्ली से एक पैसा भी कमा कर नहीं लौटी हूं. 2019 के जनवरी में दिल्ली गयी थी, लेकिन वहां प्रताड़ित होने के डर से भाग गयी. अब चिंता है कि कैसे कर्ज चुकाऊंगी.
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