काम के एवज में मिली प्रताड़ना

दिल्ली व इलाहाबाद जैसे बड़े शहरों में प्रताड़ित हुईं गुमला : दिल्ली व इलाहाबाद जैसे बड़े शहरों में छह वर्ष तक काम करने के एवज में प्रताड़ना मिलने के बाद सुनीता कुमारी (काल्पनिक नाम) वापस घर लौट आयी है. भारतीय किसान संघ ने सुनीता को घर तक पहुंचने में मदद की है. शुक्रवार को सीडल्ब्यूसी […]
दिल्ली व इलाहाबाद जैसे बड़े शहरों में प्रताड़ित हुईं
गुमला : दिल्ली व इलाहाबाद जैसे बड़े शहरों में छह वर्ष तक काम करने के एवज में प्रताड़ना मिलने के बाद सुनीता कुमारी (काल्पनिक नाम) वापस घर लौट आयी है. भारतीय किसान संघ ने सुनीता को घर तक पहुंचने में मदद की है. शुक्रवार को सीडल्ब्यूसी गुमला के माध्यम से सुनीता को घाघरा प्रखंड के सेरेंगदाग में रहने वाले परिजनों को सौंप दिया. सुनीता वर्ष 2008 में अपने पिता के नशेपन से परेशान होकर अपनी एक अन्य सहेली के साथ दिल्ली चली गयी थी.
दिल्ली में काम करने के बाद इलाहाबाद में भी काम किया, लेकिन जहां काम की, वहां उसे प्रताड़ित किया गया. सुनीता अपनी आपबीती सुनाते हुए बताती है कि पिता सिमसई उरांव नशेड़ी हैं. पिता की इसी आदत से परेशान होकर अपनी सहेली के साथ दिल्ली चली गयी. दिल्ली में पंजाबी बाग में झाड़-पोछा काम करने लगी, लेकिन घर के मालिकों ने उसे प्रताड़ित करना शुरू कर दिया. एक वर्ष तक काम करने के बाद सुनीता को पैसे मिले, तो वहां से भाग निकली. इसके बाद सुनीता ने कीर्ति नगर में काम किया, लेकिन यहां सुनीता को काम के बाद मार मिली, तो वहां से भी भाग निकली. इसके बाद वह इलाहाबाद चली गयी. यहां भी जिसके घर में काम करने गयी, वहां उससे मारपीट की गयी. छह माह या एक-एक साल गुजरने के बाद पैसे मिलते थे.
वह भी काफी कम. जिससे परेशान होकर सुनीता फिर दिल्ली जाने लगी. दिल्ली स्टेशन पहुंचने पर स्थानीय पुलिस ने उसे पकड़ लिया और निर्मल छाया को सौंप दिया. निर्मल छाया ने उसे कुछ दिनों तक अपने पास रखने के बाद भारतीय किसान संघ को सौंपा दिया. संघ ने उसे गुमला पहुंचा दिया. किशोर न्याय बोर्ड के सदस्य शंभु सिंह व सीडब्ल्यूसी के चेयरमैन तागरेन पन्ना ने बताया कि सुनीता का भविष्य उज्ज्वल बनाने के लिए उसे सिक्यूरिटी गार्ड का प्रशिक्षण दिलाया जायेगा.
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