Gumla : कस्तूरबा स्कूल में बैठने की जगह नहीं, आदिम जनजाति की 80 छात्राओं को निकाला

Updated at : 17 Sep 2018 3:31 PM (IST)
विज्ञापन
Gumla : कस्तूरबा स्कूल में बैठने की जगह नहीं, आदिम जनजाति की 80 छात्राओं को निकाला

दुर्जय पासवान गुमला : सरकार का नारा है: बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ. यह नारा जिले के परमवीर चक्र विजेता शहीद अलबर्ट एक्का के जारी ब्लॉक में जुमला बनता नजर आ रहा है. जारी ब्लॉक के कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय स्कूल से 80 छात्रों को निकाल दिया गया है. इनमें 12 विलुप्तप्राय आदिम जनजाति की छात्राएं […]

विज्ञापन

दुर्जय पासवान

गुमला : सरकार का नारा है: बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ. यह नारा जिले के परमवीर चक्र विजेता शहीद अलबर्ट एक्का के जारी ब्लॉक में जुमला बनता नजर आ रहा है. जारी ब्लॉक के कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय स्कूल से 80 छात्रों को निकाल दिया गया है. इनमें 12 विलुप्तप्राय आदिम जनजाति की छात्राएं हैं. शेष छात्राएं आदिवासी हैं.

इन छात्राओं को स्कूल से इसलिए निकाला गया कि क्लास रूम में छात्राओंके बैठने की व्यवस्था नहीं है. छात्रावास में सोने के लिए भी जगह नहीं है. इन सभी छात्राओं का हाल ही में नामांकन हुआ है. स्कूल से निकाले जाने के बाद सभी अपने भविष्य को लेकर आशंकित हैं.

इधर, माता-पिता भी बच्चों को स्कूल से निकाले जाने से परेशान हैं, क्योंकि माता-पिता ने इस उम्मीद से बच्चों को स्कूल भेजाथा कि वे पढ़ेंगे-लिखेंगे. लेकिन, शिक्षा से पहले छात्रों को स्कूल से निकाल दिया गया.

आदिम जनजाति की ये छात्राएं प्रखंड के उरईकोना, बंधकोना, डूमर पानी, और गुड़दाकोना गांव की हैं. ये गांव छत्तीसगढ़ राज्य से सटे जंगलों व पहाड़ों के बीच है.

जानकारी के अनुसार, जारी प्रखंड में कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय के भवन निर्माण का कार्य चल रहा है. इसके कारण जारी का स्कूल डुमरी प्रखंड के आवासीय विद्यालय में संचालित होता है.

कक्षा 6 और 7 के विद्यार्थियों का केवल नामांकन हुआ है.इन्हें एक दिन भी विद्यालयमें शिक्षा नहीं मिली है. आदिम जनजाति के प्रखंड सचिव राजेंद्र कोरवा ने कहा किवह इस मामले को लेकर वार्डेन के पासगये थे. उन्होंने कहा कि उनके यहां कमरे कम हैं. इसलिए बच्चे को पढ़ा नहीं सकते.

राजेंद्र का कहना है कि आदिम जनजाति के बच्चों के भविष्यसे खिलवाड़ हो रहा है. जल्द समस्या का निदान नहीं हुआ, तो इस मामले में उपायुक्त से हस्तक्षेप की अपील करेंगे.

मजबूरी में दिल्ली पलायन करना होगा

आदिम जनजाति की छात्रा मुनिता कोरवाईन ने कहा, ‘मैं गरीब परिवार से हूं. मेरे परिवार के लोग गरीबी के कारण मुझे पढ़ाने में अक्षम हैं. इसलिए मुझे अच्छी शिक्षा दिलाने के लिए आवासीय विद्यालय में मेरा नामांकन कराया गया था. लेकिन, हमें कहा गया कि यहां कमरे कम हैं और हमें घर भेज दिया गया. हमलोग तीन माह से घर पर बैठे हैं. अगर हमारी पढ़ाई शुरू नहीं हुई, तो हमें मजबूरन दिल्ली जाना होगा. पैसे कमाने के लिए.

स्कूल में जगह नहीं, इसलिए छात्राओं को वापस भेजा : वार्डन

वार्डन कमला कुमारी ने कहा कि आवासीय विद्यालय डुमरी और जारी की क्लास डुमरी में ही लगती है. दोनों स्कूलों के बच्चे रहते भी यहीं हैं. लेकिन, हमारे यहां जगह नहीं है. इसलिए बच्चों को घरलौटानापड़ा. विभाग उन सभी विद्यर्थियोंके भविष्य के बारे में सोचे और जल्द से जल्द इनकीशिक्षाकी व्यवस्था करे, ताकि बच्चों का भविष्य बर्बाद न हो.

बीईईओ बलदेव ने कहा

बीईईओ बलदेव प्रसाद ने फोन पर बताया कि मामला उनके संज्ञान में है. अतिरिक्त सरकारी भवन की तलाश की जा रही है. उन्होंने कहा कि अगर जिला प्रशासन इस दिशा में पहल करे और बच्चों को नजदीकी किसी प्रखंड में समायोजित कर पढ़ाई की व्यवस्था का आदेश दे, तो वैकल्पिक उपाय किये जा सकते हैं.

विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola