झारखंड : बीमार बच्चे को लेकर गरीब मां दस किमी पैदल चली, कहा - मेरा बेटा मेरी गोद में ही मर गया

Published at :18 Aug 2017 5:29 PM (IST)
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झारखंड : बीमार बच्चे को लेकर गरीब मां दस किमी पैदल चली, कहा - मेरा बेटा मेरी गोद में ही मर गया

!!दुर्जय पासवान!! गुमला : गुमला में फिर एक बीमार मासूम बच्चे की मौत हो गयी. मां सरिता उराईन अपने बीमार बच्चे बिफैया उरांव (एक साल) को गोद में लेकर पैदल घर जा रही थी. साथ में छह वर्षीय बेटा परदेशिया भी पैदल चल रहा था. दस किमी पैदल चलकर टोटो पहुंचने पर रास्ते में बिफैया […]

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!!दुर्जय पासवान!!

गुमला : गुमला में फिर एक बीमार मासूम बच्चे की मौत हो गयी. मां सरिता उराईन अपने बीमार बच्चे बिफैया उरांव (एक साल) को गोद में लेकर पैदल घर जा रही थी. साथ में छह वर्षीय बेटा परदेशिया भी पैदल चल रहा था. दस किमी पैदल चलकर टोटो पहुंचने पर रास्ते में बिफैया की मौत हो गयी. बच्चे की मौत ने फिर सिस्टम पर सवाल खड़ा कर दिया है. सरिता उराईन ने कहा कि अस्पताल से व्यवस्था नही मिलने के कारण बच्चे को लेकर पैदल घर जा रही थी. रास्ते में बच्चे ने दम तोड़ दिया. जबकि अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि बच्चे के इलाज की पूरी व्यवस्था की गयी थी. पांच दिन से बच्चे का इलाज चल रहा था. शुक्रवार को उसकी मां बीमार बच्चे को चुपचाप लेकर अस्पताल से चली गयी.

मेरा बेटा मेरी गोद में मर गया : मां
सरिता उराईन विधवा है. पति का नाम स्वर्गीय मंगल उरांव है. घर घाघरा प्रखंड के बरांग गांव है. गुमला से बरांग की दूरी 50 किमी है. सरिता ने व्यवस्था पर सवाल खड़ा करते हुए कहा कि मेरा बेटा मेरी गोद में मर गया. 13 अगस्त से उसके बेटे का इलाज गुमला सदर अस्पताल में चल रहा था. शुक्रवार को डॉक्टर ने कहा कि स्थिति नाजुक है. रांची ले जाना होगा और बच्चे को रांची रेफर कर दिया गया. इसपर सरिता ने कहा कि मेरे पास पैसा नहीं है. मैं कैसे अपने बच्चे को रांची ले जाऊंगी. उसने बच्चे को रांची ले जाने की व्यवस्था करने की मांग की. लेकिन व्यवस्था नहीं हुआ तो वह बीमार बच्चे को गोद में लेकर अपने घर जाने लगी. तभी गोद में बच्चे की मौत हो गयी. उसने कहा कि अस्पताल से बुखार की कुछ दवा व दो बोतल स्लाइन चढ़ाया गया था.
पैसा चंदा कर सहयोग किया
बच्चे की मौत के बाद मां सरिता व भाई परदेशिया टोटो के समीप बीच सड़क पर रोने लगे. तभी बीस सूत्री सदस्य सिकंदर मांझी व अन्य लोग पहुंचे. बच्चे की मौत का कारण पूछा. इसके बाद गरीबी को देखते हुए चंदा कर पैसा दिया. घर जाने के लिए टेंपो की भी व्यवस्था कर दी. सरिता अपने बीमार बच्चे को गोद में लेकर घर जा रही थी. टोटो के समीप गोद में ही बच्चे ने दम तोड़ दिया. यह गुमला अस्पताल की लापरवाही है. इसकी जांच हो और दोषी पर कार्रवाई की जाये.अस्पताल प्रशासन ने कहा : बिना डिस्चार्ज के बच्चे को लेकर उसकी मां भाग गयी.
मां सरिता ने कहा : रेफर कर दिया, पैसे नहीं थे, इसलिए बच्चे को लेकर घर जा रही थी.
13 अगस्त को बच्चे को गुमला अस्पताल में भरती किया गया था. उसे बुखार था. पेट में जख्म था. संभावत: बच्चे को टीवी रोग भी था. इसकी जांच चल रही थी. रेफर नहीं किया गया. लेकिन उसकी मां बच्चे को लेकर अस्पताल से चली गयी.
डॉ आरएन यादव, उपाधीक्षक, गुमला अस्पताल
सरिता अपने बीमार बच्चे को गोद में लेकर घर जा रही थी. टोटो के समीप गोद में ही बच्चे ने दम तोड़ दिया. यह गुमला अस्पताल की लापरवाही है. इसकी जांच हो और दोषी पर कार्रवाई की जाये.
सिकंदर मांझी, सदस्य, जिला बीस सूत्री, गुमला
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