संताल परगना के 150 सूक्ष्म उद्यमियों को किया गया सम्मानित

Updated at : 20 Feb 2025 11:43 PM (IST)
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संताल परगना के 150 सूक्ष्म उद्यमियों को किया गया सम्मानित

दो दिवसीय पीएमएफएमइ मेले का समापन, राज्य अल्पसंख्यक आयोग सदस्य ने रहे मौजूद

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स्थानीय गोड्डा कॉलेज मैदान परिसर में आयोजित दो दिवसीय प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना महोत्सव के समापन कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राज्य अल्पसंख्यक आयोग के सदस्य हाजी इकरारूल हसन आलम शामिल हुए. श्री आलम ने महोत्सव के दौरान बनाये गये सभी स्टॉल का मुआयना किया और महिला उद्यमियों की ओर से तैयार किये गये विभिन्न प्रकार के फूड प्रोडेक्ट को देखा. कार्यक्रम के दौरान संताल परगना के सभी जिले से आये करीब 150 प्रतिनिधि जो पीएमएफएमइ से जुड़े हैं, उन्हें प्रशस्ति पत्र देकर सम्मनित किया गया. संबोधन में श्री आलम ने केंद्र व राज्य सरकार की भागीदारी से गांव के गरीबों के बीच किये जा रहे बेहतर प्रयास की जमकर तारीफ की. श्री आलम ने कहा कि जिस तरह से राज्य सरकार हर तबके को साथ लेकर उनके आर्थिक विकास का काम कर रही है, यह राज्य के लोगों के लिए गौरव की बात है. इस दौरान गोड्डा उद्योग केंद्र के महाप्रबंधक आरके चतुर्वेदी ने भी विभाग और सरकार की मंशा को रखते हुए कार्यक्रम में शामिल सभी प्रतिनिधियों के प्रति आभार व्यक्त किया. दुमका के जीएम दास कुमार एक्का ने भी अपनी बातों को रखा. झारक्राफ्ट के प्रबंधक मो अब्दुल कादिर ने भी कार्यक्रम की रूपरेखा व दो दिवसीय महोत्सव से होने वाले फायदे से लोगों को अवगत कराया. कार्यक्रम में जीएम श्री चतुर्वेदी के साथ संताल परगना के अन्य जिले के जीएम, गोड्डा के इओ डीवी मनीष कुमार, मुख्यमंत्री लघु विकास बोर्ड के जिला समन्वयक देवव्रत कुमार, बलॉक कोऑर्डिनेटर टेकलाल कुमार दास को सम्मानित किया गया.

अचार स्टॉल लगाने वाली मेघा बोली-एक साल में ही दिख रहा लाभ

कॉलेज मैदान में दर्जनों स्टॉल लगाये गये हैं. इनमें गोड्डा से करीब आठ ऐसी महिला उद्यमियों ने हिस्सा लिया, जो महज कुछ ही माह पहले अपना उद्योग शुरू किया है. पोड़ैयाहाट के बसंतपुर गांव की मेधा कुमारी, सुनीता कुमारी, हेमा कुमारी व पिंकी कुमारी बताती हैं कि वो अचार उद्योग को लेकर काम कर रही हैं. करीब एक वर्ष से अपने घर पर मशरूम, ओल, मिर्ची व आम का अचार बनाकर बेच रही है. अभी उनकी सखी मंडल को उन्नयन के लिए प्रति महिला 27 हजार की राशि दी गयी है. प्लास्टिक के जार में सौ से ढाई सौ ग्राम व किलो भर अचार को साठ, नब्बे से लेकर 180 रुपये व दो से ढाई सौ के दर पर बेचने का काम कर रही है. बताया कि फिलहाल मुनाफा ज्यादा नहीं हो रहा है. मगर यह भी सत्य है कि अपने पांव पर खड़ी होकर आर्थिक रूप से सबल हो रही हैं. बताया कि उन्हें ग्रुप संचालन के दौरान श्यामाकांत झा से काफी मदद मिलती है, जो बसंतपुर गांव के ही हैं.

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