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आदिवासियों ने जाहेरथान के पास एनएच का निर्माण रोका, 28 को दिसोम बैसी की बैठक

Updated at : 23 Sep 2025 10:33 PM (IST)
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Tribals Protest in Godda

वार्ता के लिए पहुंचे पुलिस पदाधिकारी और सखुआ पेड़ के पास जमे आदिवासी समाज के लोग. फोटो : प्रभात खबर

Tribals Protest in Godda: गोड्डा में राष्ट्रीय राजमार्ग के निर्माण का विरोध कर रहे आदिवासियों ने कहा कि सबसे पहले सड़क निर्माण कंपनी और प्रशासन को 16 आना रैयतों को नोटिस देना था, मगर नहीं दिया गया. इतना ही नहीं, डीबीएल कंपनी की ओर से फर्जी ग्राम सभा की गयी. ग्रामीण आदिवासियों का कहना था कि जाहेर थान के पास 10 फीट छोड़कर सड़क निर्माण कराया जाना चाहिए था. इससे जाहेर थान सुरक्षित रह जाता.

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Tribals Protest in Godda: गोड्डा जिले के पोड़ैयाहाट में निर्माणाधीन हंसडीहा-महागामा फोरलेन एनएच पर पोड़ैयाहाट के हरियारी के समीप सड़क के बीचोंबीच जाहेर थान आने से विवाद हो गया है. मंगलवार को एनएचएआइ के लिए सड़क निर्माण कंपनी डीबीएल के कर्मी जेसीबी लेकर सड़क के बीच बने जाहेर थान के पेड़ को हटाने पहुंचे, तो सैकड़ों आदिवासियों ने इसका विरोध शुरू कर दिया. हंगामे के बीच काम को रोक दिया गया.

अधिकारियों ने आदिवासियों को समझाने का किया प्रयास

इसकी जानकारी मिलने पर एसडीओ बैद्यनाथ उरांव, एसडीपीओ अशोक रविदास, बीडीओ फुलेश्वर मुर्मू, अंचल अधिकारी अमित किस्कू, थाना प्रभारी विनय कुमार आदि मौके पर पहुंचे व विरोध कर रहे आदिवासियों को समझाने का प्रयास किया. बड़ी संख्या में जुटे आदिवासी महिला व पुरूष को देखते हुए पुलिस बल काफी संख्या में बुलायी गयी थी. चार थाने की पुलिस कैंप कर रही थी. आइआरबी के जवान भी मौजूद थे.

  • आदिवासियों का आरोप- रैयतों को नोटिस दिये बिना दूसरी जगह बना दिया जाहेर थान
  • एसडीओ, डीएसपी सहित 4 थाने की पुलिस 5 घंटे तक प्रशासन रहा मुस्तैद
  • दिसोम बैसी को लेकर देर शाम हाट बाजार में करायी गयी माइकिंग

5 घंटे तक चले मान-मनौव्वल के बाद भी नहीं माने लोग

विरोध कर रहे आदिवासी समाज के लोगों को प्रशासनिक अधिकारियों ने करीब 5 घंटे तक समझाने का प्रयास किया. काफी मान-मनौव्वल की. बावजूद वे लोग किसी की बात को मानने को तैयार नहीं थे. इन लोगों का एक सुर में कहना था कि जाहेर थान आदिवासियों का सबसे बड़ा आस्था का केंद्र है. बगैर ग्रामीणों को विश्वास में लिये दूसरी जगह जाहेर थान का निर्माण कर देना पूरी तरह से गलत है.

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Tribals Protest in Godda: प्रशासन ने नहीं दिया नोटिस

उन्होंने कहा कि सबसे पहले सड़क निर्माण कंपनी और प्रशासन को 16 आना रैयतों को नोटिस देना था, मगर नहीं दिया गया. इतना ही नहीं, डीबीएल कंपनी की ओर से फर्जी ग्राम सभा की गयी. ग्रामीण आदिवासियों का कहना था कि जाहेर थान के पास 10 फीट छोड़कर सड़क निर्माण कराया जाना चाहिए था. इससे जाहेर थान सुरक्षित रह जाता.

सुरक्षा में पुलिस और आईआरबी के जवानों को किया गया था तैनात. फोटो : प्रभात खबर

प्रशासन के साथ मिलकर डरा रही कंपनी – राजेश हांसदा

युवा नेता राजेश हांसदा ने कहा कि उनका विरोध सर्वे के समय से ही था. मगर एनएचएआइ मनमाने तरीके से काम करा रहा है. सड़क निर्माण कंपनी प्रशासन के साथ मिलकर आदिवासियों को डरा रही है. इस दौरान प्रशासन और ग्रामीणों की वार्ता विफल रही. मालूम हो कि एक सप्ताह पहले भी ग्रामीणों ने जोरदार विरोध किया था.

28 को होगा आदिवासियों का महाजुटान

पहले आदिवासियों ने मामले को सुलझाने के लिए एक सप्ताह का समय मांगा था, लेकिन मंगलवार की शाम अचानक स्थानीय हाट बाजार में संताल आदिवासियों की ओर से माइकिंग की गयी. माइकिंग कर बताया गया कि संताल परगना स्तर पर दिसोम बैसी की बैठक हरियारी में बुलायी गयी है. बैठक में हजारों आदिवासी समाज के लोग जुटेंगे.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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