वृक्ष पूजन के साथ मना सरहुल, पूजन कर समाज की महिलाओं ने किया नृत्य

Updated at : 01 Apr 2025 11:20 PM (IST)
विज्ञापन
वृक्ष पूजन के साथ मना सरहुल, पूजन कर समाज की महिलाओं ने किया नृत्य

इस पर्व से नये वर्ष का होता है आगाज

विज्ञापन

पथरगामा प्रखंड के पीपरा पंचायत के होपनाटोला गांव में सरहुल पर्व मनाया गया. इस दौरान सखुआ के वृक्ष की विधि-विधान पूर्वक पूजा-अर्चना की गयी. वहीं समुदाय के महिला-पुरुष मिल-जुलकर झूमर गीत में नृत्य करते देखे गये. टोटेमिक कुड़मी विकास मोर्चा के जिलाध्यक्ष दिनेश कुमार महतो ने बताया कि सरहुल पर्व आदिवासियों के प्रकृति प्रेम का प्रतीक है. बताया कि आपसी भाईचारे के साथ मनाये जाने वाला यह पर्व प्रकृति को समर्पित है. सरहुल दो शब्दों से मिलकर बना है सर और हुल. सर का अर्थ होता है सरई यानी सखुआ (साल का पेड़) के फूल/फल, वहीं ””हुल’ का अर्थ है ‘क्रांति’. दोनों शब्दों का जब मिलन होता है, तो बनता है सरहुल. इस तरह सखुआ के फूलों की क्रांति को ‘सरहुल’ कहा जाता है. बताया कि इस पर्व से नये वर्ष का आगाज भी होता है. बताया कि सरहुल पूजा में सखुआ के वृक्ष के साथ-साथ प्रकृति के अन्य तत्वों की पूजा की जाती है. सरहुल को फूलों का भी त्योहार कहा जाता है, जहां पतझड़ के बाद पेड़ों में नये-नये पत्ते एवं फूल खिलते हैं. सरहुल पर्व में समुदाय पारंपरिक वेश-भूषा के साथ ढोल नगाड़े व मांदर की थाप के साथ आखड़ा में झूमर गीत में नृत्य करते हुए अपनी एकता का परिचय देते हैं.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

विज्ञापन
SANJEET KUMAR

लेखक के बारे में

By SANJEET KUMAR

SANJEET KUMAR is a contributor at Prabhat Khabar.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola