जर्जर सड़क पर चलने को विवश हैं ग्रामीण

Edited by SANJEET KUMAR
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नुकीले पत्थर उभरे हैं और गड्ढों की भरमार

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पोड़ैयाहाट प्रखंड अंतर्गत कस्तूरी पंचायत के आदिवासी बाहुल्य गांव महेशधाशा के ग्रामीण वर्षों से जर्जर सड़क का दंश झेल रहे हैं. सड़क की जर्जरता के कारण बरसात में यह गांव टापू बन जाता है. इससे गांव से निकलना मुश्किल हो जाता है. यहां के ग्रामीण सड़क मरम्मत की मांग विगत कई साल से कर रहे हैं. परंतु इस दिशा में कोई पहल नहीं हुई है. पश्चिम में राष्ट्रीय एनएच और पूरब में ग्रामीण कार्य विभाग की सड़क है. महेशधासा गांव में 90 परिवार निवास करते हैं. यह सड़क इतनी जर्जर हो गयी है कि इस पर पैदल चलना भी मुश्किल है. सड़क पर नुकीले पत्थर उभरे हैं और गड्ढों की भरमार है. बरसात में यह सड़क तालाब में तब्दील हो जाती है और ग्रामीणों को आवागमन करने में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है. मरीज को अस्पताल लाने और विद्यार्थियों को विद्यालय जाने में परेशानी होती है. ग्रामीण पाकू हांसदा, जगदीश हेंब्रम, राजू ने अपना दर्द बयां करते हुए बताया कि आज भी ग्रामीण नरक की जिंदगी जी रहे हैं. गांव तक आने वाली सड़क का निर्माण वर्ष 2010 में मनरेगा योजना के तहत ग्रेड वन, ग्रेड 2 के तहत की गई थी. अब यह सड़क जर्जर हो चुकी है और परेशानियों का कारण बनी है. इस सड़क की मरम्मत अति आवश्यक है. परंतु जनप्रतिनिधि इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं.

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