राजमहल परियोजना के माेटे कार्लो कंपनी में 48 घंटे बाद शुरू हुई कोयले की ढुलाई

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कंपनी से सेक्युरिटी गार्ड मांग रहे थे नियुक्ति से जुड़ी पूरी प्रक्रिया के कागजात

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राजमहल कोल परियोजना के कोयला खनन करने वाली हुर्रासी परियोजना की आउट सोर्सिंग कंपनी माेंटो कार्लो में कार्यरत कर्मचारियों ने वार्ता के 48 घंटे के बाद कार्य आरंभ कर दिया है. पिछले दिनों से आंदोलन कर रहे राजमहल कोल परियोजना के हुर्रासी कोयला खनन के सिक्योरिटी गार्ड कोयले की ढुलाई बाधित कर रखा था. खनन कार्य बंद होने की सूचना पर परियोजना के पदाधिकारी प्रणव कुमार व पदाधिकारी के के सिंह, मुखिया प्रतिनिधि सोनालाल टुडू दिन के करीब 12 बजे सिक्योरिटी गार्ड से वार्ता के लिए खादान क्षेत्र पहुंचे. इस दौरान गार्ड ने उनकी बातों की अनदेखी कर दिया तथा मांगों के समर्थन में आंदोलन करते रहे. महागामा एसडीओ राजीव कुमार एवं एसडीपीओ चंद्रशेखर आजाद ने सभी सिक्योरिटी गार्ड को दूरभाष पर आश्वासन दिया. उनकी समस्या के समाधान के लिए 11 जून को त्रिपक्षीय वार्ता रखी जा रही है. वार्ता के बाद ही समस्या का समाधान किया जायेगा. एसडीओ के आश्वासन पर सिक्योरिटी गार्ड ने अपने आंदोलन को वापस ले लिया एवं कोयला ढुलाई का कार्य शुरू कर दिया.

क्या थी आंदोलन की वजह :

क्षेत्र में प्राइवेट कंपनी मोंटे कार्लो कार्यरत सुरक्षा गार्ड के पद पर दर्जनों महिला व पुरुष को नियुक्त किया गया है. ऐसे सुरक्षा कर्मियों की ओर से कहा गया कि कंपनी प्रबंधन नियुक्ति के समय सारी प्रक्रिया पूरा कराया था. इसमें गार्ड का मेडिकल फिटनेस आदि भी किया गया था. सभी कर्मियों को परिचय पत्र भी दिया गया था. साथ ही कंपनी की ओर से लिखित तौर पर आश्वासन दिया गया था कि उन सभी गार्ड को कंपनी की ओर से पूर्व में घोषित हाई पावर कमेटी की दर से मजदूरी का भुगतान किया जाएगा. मगर कंपनी प्रबंधन अपने लिखित समझौता से मुकर रही है. सिक्योरिटी गार्ड ने बताया कि कोल इंडिया समझौता पत्र के द्वारा कंपनी को निर्देश दिया है कि कंपनी कोयला खनन क्षेत्र के प्रभावित गांवों के सभी ग्रामीण मूलभूत सारी सुविधा देगी. इस क्रम में मजदूर को रहने के लिए आवास के साथ कॉलोनी की व्यवस्था करना व क्षेत्र के ग्रामीणों के स्वास्थ्य के लिए अस्पताल व बच्चों की पढ़ाई के लिए स्कूल, पेयजल की सुविधा, बिजली, पोस्ट ऑफिस, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स आदि की भी सुविधा दिया जाना है. मगर कंपनी क्षेत्र के ग्रामीणों की ऐसी सुविधा व व्यवस्था के नाम पर केवल शोषण कर रही है. इतना ही नहीं, मोंटे कार्लो कंपनी प्रशासन का भय दिखाकर लगातार क्षेत्र में कोयला खनन का काम करा रही है. ग्रामीण कोयला के धूल से परेशान है. वहीं प्रबंधन मुनाफा कमाने में लगी है.

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