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सड़क दुर्घटना पर रोक के लिए समय-समय पर अभिभावक व आमजनों के साथ समय-समय पर बैठक करे प्रशासन

‘क्षेत्र में लगातार हो रही सड़क दुर्घटना एवं बचाव’ विषय पर ग्रामीणों ने रखी बात

पोड़ैयाहाट पंचायत भवन में रविवार को प्रभात संवाद का आयोजन किया गया. इस दौरान ‘लगातार हो रही सड़क दुर्घटना एवं बचाव’ विषय पर संवाद का आयोजन किया गया, जिसकी अध्यक्षता समाजसेवी श्यामानंद वत्स ने किया. लोगों ने क्षेत्र में सड़क दुर्घटना का सबसे बड़ा कारण नशा पान बताया. कहा कि नये युवक लगातार नशे का सेवन कर लापरवाही से बाइक चलाते हैं. इस वजह से लगातार सड़क दुर्घटनाएं हो रही है. लोगों का कहना था कि ऐसे मामलों में जिला प्रशासन व समाज के लोग साथ मिलकर काम नहीं करेंगे, तो सड़क हादसे में कमी नहीं आ सकेगी. कहा कि प्रशासन को समय-समय पर अभिभावक व आमजनों के साथ बैठक करने की जरूरत है. संचालन प्रतिनिधि रवि ठाकुर ने किया.

क्या कहते हैं समाज के लोग

क्षेत्र में सड़क दुर्घटना में बढ़ोतरी हुई है. प्रशासन की गलती से अधिक आमलोगों के साथ समाज के लोगों की है. सामाजिक लोगों की भी जिम्मेदारी बनती है कि इस पर विशेष जागरूकता अभियान चला कर मनचले युवकों को जागरूक करें.

-श्यामानंद वत्स, समाजसेवी

‘लोगों को बाइक चलाते समय हेलमेट का प्रयोग करना चाहिए. सुरक्षित तौर पर गाड़ी चलाने की बात के साथ-साथ मुख्य बाजार, स्कूल व भीड़भाड़ वाले इलाकों में स्पीड काफी कम कर बाइक या वाहन चलाने से ऐसे मामलों में कमी आयेगी.

– अजय शर्मा, स्थानीय

प्रशासन से अपील है कि विद्यालय खुलने और बंद करने के समय पुलिस की गश्ती दल रहे, ताकि बच्चे सुरक्षित अपने घर जा सकें. 18 वर्ष से कम आयु के बच्चे भी बेधड़क गाड़ी चला रहे हैं. लेकिन दुर्घटना का सबसे बड़ा कारण नशापान है.

-गजाधर सिंह, पूर्व प्रधानाध्यापक

रात को लाेग बैठक में शराब सेवन के बाद नशे में धुत्त होकर बाइक चलाते हैं. अंधेरे में नशे में गाड़ी चलाने वालों पर प्रशासन की ओर से नकेल लगाने की जरूरत है. ऐसे मामले में अभिभावकों को भी पूरी तरह से ध्यान रखने की जरूरत है.

-बिमंत साह, सामाजिक कार्यकर्ता

‘स्थानीय दुकानदार मुख्य बाजार में ही दुकान लगा देते हैं. सड़क का अतिक्रमण कर लिए जाने की वजह से भी सड़क दुर्घटना हो रही है. 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चे भी बाइक चलाते हैं. लापरवाही से वाहन चलाने वाले युवक पर कार्रवाई होनी चाहिए.

-राजीव भगत

‘युवा धैर्य के साथ वाहन नहीं चलाते हैं. एक रिपोर्ट के मुताबिक प्रत्येक साल दो लाख सालाना सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो रही है. प्रशासनिक नियम और सामाजिक नियम भी एक-दूसरे के पूरक हैं. इसलिए हर प्रबुद्ध जनों को सचेत रहने की जरूरत है.

– डब्लू भगत, बुद्धिजीवी

‘सड़क दुर्घटना की जिम्मेदारी स्वयं लें. नाबालिग बच्चे वाहन चला रहे हैं. अभिभावक खुद को प्राउड फील करते हैं, जबकि उन्हें डांटना चाहिए. इसलिए जब तक सामाजिक जिम्मेदारी नहीं बढ़ेगी, तब तक दुर्घटना में कमी नहीं आ सकती है.

– अनुपम प्रकाश

नाबालिक को वाहन चलाने पर रोक लगनी चाहिए. आजकल देखा जाता है कि नाबालिग भी बाइक में सवार होकर रफ्तार से कॉलेज जाते हैं. इस तरह की स्थिति में संतुलन खो जाने पर बाइक चलाने वाले स्वयं व सामने वालों को शिकार बना देते हैं.

-रविन्द्र यादव

आजकल बहुत कम लोग हेलमेट लगाते हैं. हालांकि पुलिस की कार्रवाई के बाद थोड़ा बहुत लोग जागरूक हुए हैं. लेकिन इसको कड़ाई से पालन कराने की जरूरत है. जान है तो जहान है. हर हाल में लोगों को अपनी जान को बचाने की है.

-प्रदीप साह, ग्रामीण

हाट से लेकर मेला व बाजार हर जगह भारी मात्रा में शराब व जुआ खेला जाता है. एक बाइक में तीन युवक सवार होकर पूरी रफ्तार के साथ गाड़ी चलाते हैं. इसलिए फुटबॉल मैच के दौरान शराब की बिक्री पर रोक के साथ आवश्यक कार्रवाई हो.

-लड्डू भगत, मुखिया

‘सबसे ज्यादा युवा दुर्घटना के शिकार हो रहे हैं. आज के युवाओं को इस मामले पर आवश्यक रूप से पहल के साथ लोगों को संज्ञान में बात लेकर अपने-अपने घर में युवाओं को सतर्क होकर बाइक चलाने की सलाह दे सकते हैं. यह बढ़िया उपाय है.

-दीपक भगत, युवा समाजसेवीB

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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