गोड्डा : पोड़ैयाहाट में रोहिणी नक्षत्र में गूंजी हल-बैल की टंकार, खेतों को संवारने में जुटे किसान
Published by : Priya Gupta Updated At : 26 May 2026 8:54 AM
Godda News
Godda News: गोड्डा के पोड़ैयाहाट में रोहिणी नक्षत्र शुरू होते ही किसान हल-बैल लेकर खेतों में उतरे, खरीफ तैयारी तेज हुई. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.
पोड़ैयाहाट से रवि ठाकुर की रिपोर्ट
Godda News: झारखंड के गोड्डा जिले में रोहिणी नक्षत्र शुरू होते ही पोड़ैयाहाट प्रखंड के गांवों में हल-बैल की घंटियां बजने लगी हैं. ट्रैक्टर के दौर में भी किसान अपनी पुरानी परंपरा नहीं भूले हैं. सकरी फुलवार, द्रुपद और अमवार पंचायत के किसान खरीफ की तैयारी में हल-बैल लेकर खेतों में उतर पड़े हैं.
सकरी फुलवार में दिखा उत्साह
सकरी फुलवार गांव के किसान नरेश ठाकुर सुबह 5 बजे ही बैलों की जोड़ी लेकर खेत पहुंच गए. बोले, “रोहिणी में हल चलाने की परंपरा बाबा-परदादा के समय से है. ट्रैक्टर बाद में, पहले हल से ही जुताई करते हैं. इससे धरती माता खुश होती हैं और फसल अच्छी होती है.” नरेश ठाकुर ने बताया कि उन्होंने 2 एकड़ खेत की पहली जुताई हल-बैल से ही की .
गांव की महिला किसान मीना देवी भी पति के साथ मेड़बंदी कर रही थीं. उन्होंने कहा, “मेड़ मजबूत होगी तभी पानी रुकेगा. रोहिणी में मेड़ बनाना शुभ माना जाता है.”
द्रुपद के किसान भी पीछे नहीं
द्रुपद गांव में भी रोहिणी नक्षत्र को लेकर किसानों में उत्साह दिखा. भवेश दास ने कहा कि हल से जुताई करने पर मिट्टी भुरभुरी होती है और केंचुए भी नहीं मरते. खेत में नमी बनी रहती है. इसलिए पहली जुताई हल से ही करते हैं. अमवार पंचायत के किसान बबलू किस्कू ने बताया कि उनके पास ट्रैक्टर है, फिर भी रोहिणी की पहली जुताई हल-बैल से ही करते हैं, ये हमारी संस्कृति है. पिताजी कहते थे- रोहिणी के हल चले, तो खेत सोना उगले. इसलिए दो दिन ट्रैक्टर खड़ा रखते हैं.
कृषि विभाग क्या कहता है ?
पोड़ैयाहाट के प्रखंड कृषि पदाधिकारी कुमोद मेहरा ने बताया कि प्रखंड में अब भी 35% किसान रोहिणी में हल-बैल का प्रयोग करते हैं. हल से जुताई में मिट्टी की ऊपरी उपजाऊ परत सुरक्षित रहती है. छोटे किसानों के लिए यह किफायती भी है. विभाग किसानों को बीज उपचार और कम अवधि वाली धान प्रजाति लगाने की सलाह दे रहा है.
मानसून पर टिकी निगाहें
मौसम विभाग के अनुसार 15 जून के आसपास गोड्डा में मानसून दस्तक दे सकता है, तब तक पोड़ैयाहाट प्रखंड के किसान हल-बैल और ट्रैक्टर दोनों से खेत तैयार करने में जुटे हैं. रोहिणी नक्षत्र में खेत तैयार हो जाएं तो धान की रोपनी समय पर हो जाती है. सकरी फुलवार से लेकर द्रुपद और अमवार तक खेतों में गूंजती हल-बैल की टंकार बता रही है कि तकनीक के साथ-साथ परंपराएं भी जिंदा हैं. अब अन्नदाताओं को बस इंद्र देवता से अच्छी बारिश की आस है.
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By Priya Gupta
प्रिया गुप्ता प्रभात खबर डिजिटल में जूनियर कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. उन्हें कंटेंट राइटिंग के क्षेत्र में एक वर्ष से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वह झारखंड बीट पर काम कर रही हैं, जहां वह खबरों को आसान भाषा में लिखती हैं. इससे पहले वह लाइफस्टाइल बीट पर काम कर चुकी हैं, जहां उन्होंने हेल्थ, रेसिपी, मेहंदी डिजाइन और फैशन से जुड़ी खबरों पर काम किया. इसके अलावा, उन्होंने नेशनल प्रिंटर और लोकल चैनलों में भी काम किया है. उन्होंने ग्रेजुएशन की पढ़ाई डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय से और मास्टर की पढ़ाई एमिटी यूनिवर्सिटी झारखंड से पूरी की है.
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