समाज कल्याण विभाग की योजनाओं के प्रचार-प्रसार के नाम पर लाखों का गबन !

Updated at : 15 Jun 2024 11:43 PM (IST)
विज्ञापन
समाज कल्याण विभाग की योजनाओं के प्रचार-प्रसार के नाम पर लाखों का गबन !

आरटीआइ से मांगी गयी सूचना के बाद हुआ खुलासा, जांच की उठी मांग

विज्ञापन

गोड्डा. जिले के समाज कल्याण विभाग में समाज कल्याण की योजनाओं के प्रचार-प्रसार के नाम पर लाखों की राशि का गबन कर लिया गया है. अधिकारियों की मिलीभगत से फर्जी बिल बनाकर तकरीबन 40 से 50 लाख निकासी कर ली गयी. यदि पूरे मामले की जांच हुई तो और भी कई परतदार परत मामले उजागर होंगे. गड़बड़ी विभिन्न स्तरों पर की गयी है. विशेषकर समाज कल्याण की योजनाओं का प्रचार-प्रसार में राशि की बंदरबांट की गयी है. इसमें पहले के करीब तीन जिला समाज कल्याण पदाधिकारी की भूमिका संदेह के दाये में है. कई वाउचर में जीएसटी का उल्लेख नहीं है. इसका खुलासा आरटीआइ के माध्यम से मांगी गयी सूचना के आधार पर किया गया है. किन-किन कार्यों में की गयी है गड़बड़ी विभाग के द्वारा प्रचार-प्रसार के मध्य में हैंड बिल पंपलेट, वॉल राइटिंग समेत प्रचार-प्रसार वाहन का इस्तेमाल किया गया है. इसमें भी गड़बड़ी की गयी है. कई वाउचर व बिल को मनवाने तरीके से भर दिया गया है. राशि के निकासी कर ली गयी है, जबकि टेंडर में कुछ और दर निर्धारित किया गया था. मसलन जिस साइन बोर्ड की दर 65 रुपये प्रति वर्ग फीट निर्धारित किया गया था. साइन बोर्ड को 110 रुपये प्रति वर्ग फीट की दर से राशि का भुगतान प्रेस संचालक व संबंधित एजेंसी को कर दिया गया. इसमें बगैर विभाग के सहभागिता पर सवाल खड़ा हो रहा है. वॉल पेंटिंग के नाम पर भी मोटी रकम की उगाही की गयी है. मालूम हो कि प्रचार-प्रसार के लिए जिले के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों में व प्रखंड कार्यालय में वॉल पेंटिंग का काम कराया जाना था. निर्धारित दर 11 रुपये प्रति वर्ग फीट था, जबकि भुगतान 35 रुपये प्रति स्क्वायर फीट की दर से कर दिया है. इसमें जीएसटी की राशि भी जोड़ दी गयी है. कुल मिलाकर वॉल पेंटिंग में 11 रुपये की जगह 42 रुपये का खर्च दिखाया गया है, जबकि जांच करायी जाये तो कुछ स्थानों को छोड़कर अधिकांश जगहों में वॉल पेंटिंग नहीं करायी गयी है. इसमें मोटी राशि की बंदरबांंट की आशंका जतायी जा रही है. इस मद में विभाग के द्वारा मोटी राशि खर्च की गयी है. प्रचार-प्रसार के बैनर आदि की छपायी मां योगिनी, साक्षी इंटरप्राईजेज, संदीप देव आर्ट, सहित अन्य प्रेस में की गयी है. जिनका वाउचर विभाग में जमा कराया गया है. दूसरी गड़बड़ी का उजागर पंपलेट ,हैंडबिल आदि में हुआ है. जिस पंपलेट कों 800 रूपया प्रति हजार के दर से छपवाने का निर्देश एजेंसी को दिया गया था उसी पंपलेट और हैंड बिल को हीं पर 1900 रूपया तो कहीं पर 3400 रूपया प्रति हजार के दर से फर्जी बिल वाउचर जमा कराकर सरकारी राशि की निकासी कर ली गयी है. इस मामले में तकरीबन 8 से 10 लाख रुपये का खर्च दिखाया गया है. हालांकि इसमें विभाग का तर्क है कि अलग-अलग साइज के हैंडबिल व पोस्टर की छपाई प्रचार-प्रसार के लिए की गयी थी. आंगनबाडी केंद्र के स्तर से बांटा भी गया है. खैर इसमें भी जांच की आवश्यकता है. फ्लैक्स व बैनर की छपाई का दर 6.50 रुपये निर्धारित किया गया था. इसमें मनमानी तरीके से कहीं पर 14 रुपये तो कहीं पर 19 रुपए प्रति वर्गफीट के दर से निकासी की गयी है. इस मद में तकरीबन 10 से 12 लाख रुपए की निकासी की गई है जो जांच का विषय है . बोले पदाधिकारी मुझे इस मामले में अभी फिलहाल कोई जानकारी नहीं हैं. मेरे द्वारा इन बातों की जानकारी नहीं ली गयी है. पिछले दो माह से विभाग के प्रभार में हूं. मैं मूलत: जिला पंचायती राज पदाधिकारी हूं. प्रभार ग्रहण करते ही चुनाव आदि कार्यों में लग गया था. शिकायत है तो इसकी जांच बारीकी से की जायेगी, जो दोषी होंगे. कार्रवाई की जायेगी. – आलोक वरन केसरी, प्रभारी जिला समाज कल्याण पदाधिकारी, गोड्डा

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

विज्ञापन
Prabhat Khabar News Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar News Desk

यह प्रभात खबर का न्यूज डेस्क है। इसमें बिहार-झारखंड-ओडिशा-दिल्‍ली समेत प्रभात खबर के विशाल ग्राउंड नेटवर्क के रिपोर्ट्स के जरिए भेजी खबरों का प्रकाशन होता है।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola