राजमहल कोल परियोजना के उर्जा नगर स्थित राजमहल हाउस परियोजना के अतिथि घर के नाम से भी जाना जाता है. पूर्व में इसे एक्सपर्ट हॉस्टल कहा जाता था. प्रबंधन द्वारा नाम बदलकर राजमहल हाउस रखा गया. इस भवन में अतिथि के ठहरने के कई कमरे हैं और इसके रखरखाव एवं मरम्मत के नाम पर प्रत्येक वर्ष करोड़ों रूपये खर्च भी होता है. राजमहल हाउस को सफलतापूर्वक संचालन के लिए संवेदक अखिलेश कुमार को टेंडर की प्रक्रिया के माध्यम से दिया गया है. संवेदक को हाउस के संचालन के लिए सभी सुविधा उपलब्ध कराना है. शुक्रवार से संवेदक द्वारा राजमहल हाउस संचालन के लिए किचन की सामग्री नहीं दी गयी और ठेका मजदूर को किचन का काम बंद करने का निर्देश भी दिया. संवेदक का कहना है कि परियोजना के पास कई महीने की राशि बकाया है, जिसका भुगतान नहीं हो पाया है. इससे हाउस की संचालन में कठिनाई हो रही है. मालूम हो कि राजमहल हाउस में ठहरने वाले व्यक्ति को भोजन के साथ अन्य सुविधाएं भी दी जाती है. इस हाउस में 27 ठेका मजदूर कार्य करते हैं. मजदूर के समक्ष भुखमरी की स्थिति उत्पन्न हो गयी है. वहीं, इस संबंध में एटक यूनियन के सचिव राम जी साह ने कहा कि परियोजना के स्थापना के समय से ही हाउस का संचालन होता है और परियोजना के लिए महत्वपूर्ण हाउस है. इसे अचानक बंद करने से कई लोग प्रभावित हो रहे हैं. उन्होंने मजदूरों को आश्वासन दिया कि किसी भी हाल में यूनियन हाउस में कार्यरत ठेका मजदूर को परेशान होने नहीं देगी. यूनियन हमेशा मजदूर के साथ खड़ी है. उन्होंने कहा कि प्रबंधन को इस पर सकारात्मक पहल कर कार्य करनी चहिए. मौके पर द्वारिका रावत, गिरीश पासवान, मंटू पासवान, चिंकू पासवान, प्रफुल्ल कुमार, इंद्रदेव पासवान, सज्जन भगत शंकर आदि उपस्थित थे.
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