कोल परियोजना में उत्पादन ठप एनटीपीसी में कोयले का संकट
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :03 Jan 2017 7:08 AM (IST)
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खदान हादसा. पांचवें दिन भी मलबा हटाने का काम जारी, नहीं निकला एक भी शव गोड्डा /बोआरीजोर : इसीएल के राजमहल परियोजना ललमटिया के भोड़ाय साइट धंसने के पांचवें दिन सोमवार को भी मलबा हटाने का कार्य जारी रहा. आज एक भी शव बाहर नहीं निकला. एनडीआरएफ के साथ महालक्ष्मी कंपनी के सहकर्मी को केवल […]
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खदान हादसा. पांचवें दिन भी मलबा हटाने का काम जारी, नहीं निकला एक भी शव
गोड्डा /बोआरीजोर : इसीएल के राजमहल परियोजना ललमटिया के भोड़ाय साइट धंसने के पांचवें दिन सोमवार को भी मलबा हटाने का कार्य जारी रहा. आज एक भी शव बाहर नहीं निकला. एनडीआरएफ के साथ महालक्ष्मी कंपनी के सहकर्मी को केवल मलबा हटाने के क्रम में दबे मजदूर के जैकेट, मफलर व टोपी, क्षतिग्रस्त मशीन व वाहन का पार्ट पुरजे ही मिले.
डिस्पैच नहीं होने से कहलगांव व फरक्का एनटीपीसी में कोयले का अभाव : खदान हादसा के बाद से ही कोयला खनन पूरी तरह से ठप है. वहीं परियोजना के पास कोयला का स्टाॅक भी नहीं है. कोयला का डिस्पैच नहीं होने से फरक्का तथा एनटीपीसी कहलगांव में बिजली उत्पादन प्रभावित हो सकता है. दोनों संयंत्रों के पास काेयले का स्टॉक कम बताया जाता है.
कोल परियोजना में उत्पादन…
फरक्का एनटीपीसी के जीएम बीके झा के मुताबिक, दोनों थॉर्मल प्लांट के पास मात्र चार दिनों का कोयला ही शेष बचा है. ललमटिया से प्रतिदिन 40 हजार टन कोयले की आपूर्ति की जाती थी. इसमें कहलगांव तथा फरक्का को बिजली उत्पादन पर 28 से 30 हजार टन कोयला की खपत प्रतिदिन होती है.
कोयला के अभाव में तत्काल बंद हो सकता एक यूनिट : कोयला की आपूर्ति नहीं होने से स्थिति में एनटीपीसी में चार दिन बाद एक यूनिट बंद होने की संभावना है. वर्तमान में दोनों एनटीपीसी मिलाकर 21 हजार मेगावाट बिजली का उत्पादन किया जा रहा है. एक यूनिट के बंद हो जाने से पांच हजार मेगावाट का उत्पादन कम होगा. एनटीपीसी कहलगांव तथा फरक्का से बिहार, झारखंड, बंंगाल के अलावा ओड़िशा तक को बिजली दी जाती है. गोड्डा को मिलने वाली बिजली में भी कटौती होगी. बिजली का फूल उत्पादन होने के बावजूद जिले में बिजली संकट बरकार है. एक यूनिट के बंद होने के बाद इसका व्यापक असर दिखेखा. राजमहल कोल परियोजना ललमटिया एनटीपीसी को 60 प्रतिशत कोयला आपूर्ति करता है. जबकि 40 प्रतिशत कोयला बंगाल को आपूर्ति की जाती है.
कामगार यूनियन व राजनीतिक दलों का आंदोलन तेज : हादसे के बाद से आउटसोर्सिंग के खिलाफ कई कामगार यूनियन व राजनीतिक दलों का आंदोलन जारी है. कांग्रेस, झामुमो व झाविमो के स्थानीय नेता आंदोलनरत हैं. वहीं साइट में हो रही परेशानी की वजह से भी कोयला उत्पादन का काम प्रारंभ करना सहज नहीं दिख रहा है. कोयला खनन के लिये ओबी निकालने का काम भी बंद है. मामले की जांच करने आयी डीजीएमएस तथा विभिन्न कोल परियोजना के निदेशक भी पहुंचकर अपनी ओर से आवश्यक जानकारी ले रहे हैं.
उत्पादन शुरू करने में कई पेंच
परियोजना को कोयला निकासी के लिये कई पापड़ बेलने होंगे. अधिकारिक तौर पर काम प्रारंभ करने से पहले डीजीएमएस व डाॅयरेक्टर स्तर पर अनुमति लेनी होगी. काम प्रारंभ होने के साथ आसपास के ग्रामीण व कर्मियों के साथ नेेताओं के आंदोलन के कोप का शिकार होना होगा.
सभी बाहरी, आसपास के एक भी लोग नहीं है दबे !
मलबा के अंदर स्थानीय किसी भी गांव के लोगों ने अब तक इस बात का दावा नहीं किया है कि कोई स्थानीय दबा हैं. लोगों में इस बात को लेकर आक्रोश है कि महालक्ष्मी कंपनी ने किस तरह से बाहरी लोगों को रखकर उत्पादन का काम करा रही है. कंपनी करीब छह वर्षों से कोयला उत्खनन का काम कर रही है . ग्रामीणों के इस दावा को भी पूरी तरह से आधार मिल गया है. वास्तव में सभी मजदूर बाहर के नियोजित थे.
कोयले का स्टाॅक चार दिनों का है. एनटीपीसी के पास कोयले का अभाव हो जायेगा. उत्पादन पांच मेगावाट कम होगी. बिजली संकट हो सकती है.
– बीके झा , जीएम फरक्का एनटीपीसी
घटना के बाद से लगातार कोयले का उत्पादन ठप है. 40 हजार टन कोयला प्रतिदिन उत्पादन होता था मगर आज एक छंटाक भी नहीं हो पा रही है. परियोजना कोयले उत्पादन की तैयारी कर रही है. मलबा हटाने का काम भी तेज किया जा रहा है.
– एसके राव यादव , जीएम उत्पादन इसीएल
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