कार्यक्रम. नहीं आये मुख्य सचिव, उप सचिव के साथ तीन सदस्यीय सचिवों की टीम पहुंची
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :21 Mar 2016 6:15 AM (IST)
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जमीन दर तय करने रैयतों से की वार्ता मुख्य सचिव की अनुपस्थति उप सचिव ने सुंदर पहाड़ी प्रखंड परिसर स्थित उद्योग सह प्रशिक्षण केंद्र में जीतपुर कोल ब्लॉक और जनप्रतिनिधि व पंचायत प्रतिनिधयों से जमीन दर निर्धारण के संबंध में रैयतों व पंचायत प्रतिनिधयों से सुझाव मांगा. डीआरडीए सभागार में भी अधिकारियों के साथ बैठक […]
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जमीन दर तय करने रैयतों से की वार्ता
मुख्य सचिव की अनुपस्थति उप सचिव ने सुंदर पहाड़ी प्रखंड परिसर स्थित उद्योग सह प्रशिक्षण केंद्र में जीतपुर कोल ब्लॉक और जनप्रतिनिधि व पंचायत प्रतिनिधयों से जमीन दर निर्धारण के संबंध में रैयतों व पंचायत प्रतिनिधयों से सुझाव मांगा. डीआरडीए सभागार में भी अधिकारियों के साथ बैठक कर मंतव्य लिया.
गोड्डा/सुंदरपहाड़ी : मुख्य सचिव की अनुपस्थिति में उप मुख्य सचिव यूके सिंह, सचिव केके सोन, निदेशक के रविकुमार व राजीव रंजन के साथ आयुक्त संताल परगना एनके मिश्रा की संयुक्त टीम ने सुंदर पहाड़ी के 50-55 रैयतों व पंचायत प्रतिनिधियों से वार्ता कर सुझाव मांगा. इस दौरान टीम के सदस्यों को रैयतों का विरोध का आरडीए में लोगों के विरोध का सामना करना पड़ा.
सुंदरपहाड़ी के 50-60 की संख्या में रैयतों के साथ जनप्रतिनिधियों ने अपनी बातों को रखी.
इस दौरान जिप उपाध्यक्ष लक्ष्मी चक्रवर्ती, जमीन के प्रथम क्लास में मुआवजा की राशि पचीस लाख रुपये तथा चतुर्थ क्लास वाले जमीन में कम से कम पंद्रह लाख रुपये पुनर्मूल्यांकन कर जमीन का मुआवजा दिये जाने की बात कही. करीब आधे से एक घंटे तक चले लोगों से वार्ता हुई. डीआरडीए में मंतव्य के लिए 25 मिनट मिलट की बैठक में विधायक अशोक भगत ने गोड्डा से सटे बिहार के सीमावर्ती क्षेत्र के उपजाऊ जमीन की दर के साथ आकलन कर गोड्डा जमीन का वेलवेशन हो.
या फिर राजमहल परियोजना की तरह कोल बेरिंग एक्ट के तहत एक निश्चित अवधि के बाद जमीन के मालिक को उसका जमीन वापस देने की व्यवस्था की जाये. पूर्व विधायक प्रशांत कुमार ने एसपीटी एक्ट में संशोधन कर सदन में चर्चा के बाद जमीन के बदले नौकरी तथा अन्य मुआवजे की सलाह दी. जेवीएम जिलाध्यक्ष धनंजय यादव ने प्रति एकड़ एनटीपीसी के रेट के तहत एक करोड़ 75 लाख की जगह कंपनी के लिए प्रति एकड़ एक करोड़ 25 लाख की राशि तय हो.
अधिवक्ता दिप्तेश सिन्हा ने देवघर के हवाई अड्डे प्रकरण में स्थानीय रैयतों के जमीन का ब्योरा मांगा. कहा कि गोड्डा रजिस्ट्री ऑफिस में प्रति डिसमिल जमीन की कीमत 3250 रुपये है और मुआवजे के तौर पर एकड़ में 71 हजार रुपये का निर्धारण किया गया है. जो हर तरफ से ठीक नहीं है. निपनिया गांव के नित्यानंद महतो ने कहा कि जिस वक्त लोगों के पास जमीन थी, एकड़ में नौकरी थी. अब जमीन घट गयी है.
इस कारण प्रभावितों को डिसमिल के आधार पर नौकरी व मुआवजा दर तय की जाये. उन्होंने सरकार के निदेशक राजीव कुमार से दो वर्ष पूर्व अखबार में छपे विभिन्न जिले के जमीन संबंधी दर का हवाला देते हुए पूछा कि क्या इस तरह की खबरें उनकी ओर से दी गयी है. इस पर राजीव कुमार ने बताया कि बगैर आवश्यक जानकारी के वो नहीं बता पायेंगे. निपनियां गांव के रामकृष्ण महतो ने जिंदल तथा अडाणी के द्वारा रैयतों के दर निर्धारण पर सवाल उठाया और कहा कि विक्रयशील तथा अविक्रयशील दोनों ही जमीन किसानों के लिए उतना ही महत्वपूर्ण है. दर में समानता हो.
साथ ही आरआर पॉलिसी के तहत रैयतों को मुआवजा के साथ कंपनी के लाभ का भी शेयर मिले और भूमि संशोधन अधिनियम 2013 के मुताबिक मुआवजे का चार गुणा राशि उनके साथ लागू हो. निपनियां गांव के सुनील कुमार गुप्ता ने कहा कि जिंदल ने जमीन का अधिग्रहण कर उनके जमीन को बेकार छोड़ रखा है. न तो कंपनी लग रही है और न ही रैयत उस जमीन का उपयोग कर पा रहे हैं. मौके पर स्थानीय कानाडीह निवासी जयप्रकाश यादव ने सरकार से रेलवे की जमीन के प्रति एकड़ कम वैल्यू लगायी गयी है. वहीं खुले तौर में प्रति कट्ठा आठ लाख की दर से बिक रही है. इसे संशोधित किया जाये. बैठक में डीसी हर्ष मंगला, एसपी संजीव कुमार सहित सीओ, बीडीओ , भाजपा नेता राजेश झा, मुखिया दिनेश यादव, मुखिया हेमवंती सोरेन आदि थे.
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