वैज्ञानिकों ने मूंग की खेती पर दिया जोर

Published at :19 Apr 2015 9:00 AM (IST)
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वैज्ञानिकों ने मूंग की खेती पर दिया जोर

गोड्डा : गोड्डा प्रभात खबर कार्यालय में शनिवार को परिचर्चा का आयोजन किया गया. किसानों की ज्वलंत समस्या गोड्डा में बारिश, तूफान व ओला वृष्टि से फसल की बरबादी व वैकल्पिक व्यवस्था विषय पर आयोजित परिचर्चा में जिला कृषि पदाधिकारी सुरेश तिर्की, केवीके के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ रविशंकर तथा आत्मा के उप परियोजना निदेशक राकेश […]

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गोड्डा : गोड्डा प्रभात खबर कार्यालय में शनिवार को परिचर्चा का आयोजन किया गया. किसानों की ज्वलंत समस्या गोड्डा में बारिश, तूफान व ओला वृष्टि से फसल की बरबादी व वैकल्पिक व्यवस्था विषय पर आयोजित परिचर्चा में जिला कृषि पदाधिकारी सुरेश तिर्की, केवीके के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ रविशंकर तथा आत्मा के उप परियोजना निदेशक राकेश कुमार सिंह, सहायक वीरेंद्र कुमार मुख्य रूप से उपस्थित थे.
परिचर्चा में दर्जनों किसान उपस्थित थे. बड़ी संख्या में किसानों ने दूरभाष पर अपनी समस्याएं रखी. वंदनवार गांव के किसान सुधीर मिश्र ने सवाल पूछा कि क्या पानी से बरबाद गेहूं का प्रयोग खाने के रूप में किया जा सकता है.
इस पर डॉ रविशंकर ने बताया कि गेहूं का उपयोग खाने में किया जा सकता है. जबकि इसकी मार्केट वैल्यू नहीं है और ना ही इसे सीड के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है. वहीं ठाकुरगंगटी के महुआवारा गांव के किसान सुभाष मंडल ने वैकल्पिक खेती संबंधित सवाल पूछा.
जवाब देते हुए कृषि वैज्ञानिक, जिला कृषि पदाधिकारी सुरेश तिर्की ने कहा कि पहले खेत को साफ कर लें. संभव हो तो खर-पतवार जलाएं. जमीन में अभी काफी नमी है है. उन्होंने वैकल्पिक खेती के लिए मूंग की खेती करने पर जोर दिया.
वहीं पोड़ैयाहाट के बक्सरा गांव के रामजीवन मंडल ने वर्तमान समय में फसल के चयन की जानकारी ली. कृषि विशेषज्ञों ने खरीफ फसल से पहले खेत को खाली करने व फसल की भरपाई के लिए मूंग की खेती करने पर जोर दिया. साथ ही कहा कि वैकल्पिक खेती के रूप में किसान ओल की खेती भी कर सकते हैं. वहीं विभिन्न प्रकार की सब्जी की खेती करने का भी सुझाव दिया.
कहा कि इस मौसम में भिंडी, करेला, बैंगन की खेती कर किसान लाभ उठा सकते हैं. वहीं किसान निखिल झा ने आम व अमरूद की खेती की जानकारी मांगी. कृषि वैज्ञानिक ने बताया कि आम के टिकोले के किसी कारणवस फफूंदी लग जाये तो ब्लू कॉपर नाम दवा व विवेस्टीन का छिड़काव लाभदायक होगा.
इससे आम के टिकोले झड़ना बंद हो जायेगा. अमरूद के लिएप्लानोक्सि तथा मेराकुलेन नामक दवा के इस्तेमाल की बात बतायी.
वहीं वैज्ञानिक डॉ रविशंकर ने बताया कि अभी सब्जी के साथ फसल लगाने का समय है. मगर मिट्टी की जांच अवश्य करा लें. सवाल पूछने वालों में किसान विष्णु सिंह, पिंटु झा, अवधेश मंडल व किसान तथा मुखिया परमानंद साह ने भी सवाल पूछे.
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