आपके स्मार्टवॉच की बैटरी चुपचाप खत्म कर रहा है यह फीचर, जरूरत पड़ने पर ही करें ऑन

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स्मार्टवॉच (Photo: Gelius)

Smartwatch GPS: अगर आपके स्मार्टवॉच की बैटरी उम्मीद से ज्यादा जल्दी खत्म हो रही है, तो वजह अक्सर GPS होता है. यह फीचर शानदार ट्रैकिंग देता है, लेकिन पावर भी खूब खींचता है. इसलिए इसे हर समय ऑन रखने की जरूरत नहीं है. आइए जानते हैं कि कैसे ये फीचर बैटरी पर असर डालता है.

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Smartwatch GPS: कुछ स्मार्टवॉच ऐसी होती हैं जो सिर्फ एक दिन में ही चार्ज मांग लेती हैं. लेकिन कई मॉडल ऐसे भी हैं जो एक बार चार्ज करने पर कई दिनों या फिर हफ्तों तक आराम से चल जाते हैं. कुछ तो ऐसे भी होते हैं जो सोलर पावर से चलते हैं. यानी धूप मिलती रहे तो बैटरी खत्म ही नहीं होगी. लेकिन चाहे आपकी स्मार्टवॉच कितनी भी दमदार बैटरी वाली क्यों न हो, एक फीचर ऐसा है जो बैटरी को सबसे तेजी से खत्म करता है. हम बात कर रहे हैं GPS की.

जैसे ही आप GPS ऑन करते हैं, चाहे आप दौड़ लगा रहे हों, साइकिल चला रहे हों, हाइक पर हों या सिर्फ रास्ता ढूंढ रहे हों, बैटरी की खपत काफी तेजी से बढ़ जाती है. यही वजह है कि जितना ज्यादा आप इसका इस्तेमाल करेंगे, उतनी जल्दी चार्जिंग की जरूरत पड़ेगी. आइए स्मार्टवॉच में दिए गए Built-in GPS के बारे में डिटेल में जानते हैं.

स्मार्टवॉच में GPS कैसे काम करता है?

स्मार्टवॉच में GPS दो तरीके से काम करता है. या तो फोन के जरिए (connected/assisted GPS) या फिर खुद घड़ी के अंदर मौजूद Built-in GPS से.अगर आपकी स्मार्टवॉच connected GPS इस्तेमाल कर रही है, तो उसे लोकेशन ट्रैक करने के लिए आपके फोन की जरूरत पड़ेगी. मतलब, फोन साथ रखना जरूरी हो जाता है. इसका एक नुकसान ये भी है कि इससे फोन और घड़ी दोनों की बैटरी जल्दी खत्म हो सकती है.

वहीं, Built-in GPS में घड़ी के अंदर ही छोटा सा GPS रिसीवर होता है, जो सीधे पृथ्वी के चारों तरफ घूम रहे सैटेलाइट्स से सिग्नल पकड़कर आपकी लोकेशन ट्रैक करता है. जितने ज्यादा सैटेलाइट बैंड सपोर्ट होते हैं, लोकेशन उतनी ही ज्यादा सटीक मिलती है. लेकिन एक बात ध्यान रखने वाली है कि Built-in GPS लगातार सैटेलाइट से कनेक्ट रहता है, इसलिए इसकी बैटरी भी तेजी से खर्च होती है. यहां तक कि यह हार्ट रेट जैसे फीचर्स से भी ज्यादा बैटरी ले सकता है, क्योंकि GPS तब तक लगातार चलता रहता है जब तक आप ट्रैकिंग ऑन रखते हैं.

GPS बैटरी लाइफ पर कैसे असर डालता है?

अगर आप स्मार्टवॉच यूज करते हैं, तो एक बात हमेशा याद रखें कि GPS बैटरी का सबसे बड़ा दुश्मन है. नॉर्मल यूज में जो वॉच आपको तीन दिन तक आराम से चलती दिखती है, वही GPS ऑन करते ही महज 12 घंटे में जवाब दे सकती है.

उदाहरण के लिए,  Apple Watch Ultra 3 अब तक की सबसे लंबी बैटरी लाइफ देने वाली Apple Watch मानी जाती है. यह नॉर्मल यूज में 42 घंटे और Low Power Mode में 72 घंटे तक चल सकती है. लेकिन GPS और हार्ट रेट ट्रैकिंग चालू होते ही बैटरी लगभग 14 घंटे में खत्म हो सकती है. हालांकि, अगर आप GPS और हार्ट रेट की फ्रीक्वेंसी कम कर दें, तो बैटरी करीब 35 घंटे तक चल सकती है.

तो अगर आप चाहते हैं कि आपकी स्मार्टवॉच जल्दी डिस्चार्ज न हो, तो GPS का इस्तेमाल तभी करें जब असल में जरूरत हो. अगर आप किसी जाने-पहचाने रास्ते पर वॉक कर रहे हैं, तो GPS बंद रखें. साथ ही, Power Saving Mode को यूज करने से GPS ट्रैकिंग थोड़ी कम सटीक जरूर होगी, लेकिन बैटरी काफी ज्यादा बचेगी.

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अंकित आनंद

लेखक के बारे में

By अंकित आनंद

शॉर्ट बायो

अंकित आनंद टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल जर्नलिस्ट हैं. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. वे स्मार्टफोन, टेलीकॉम, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), कंज्यूमर टेक और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों को कवर करते हैं.

काम के बारे में

अंकित आनंद एक टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल जर्नलिस्ट हैं, जो डिजिटल मीडिया में टेक और ऑटो सेक्टर से जुड़े विषयों पर लगातार लिखते हैं. वर्तमान में वे प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. टेक्नोलॉजी सेक्टर में उनकी रुचि स्मार्टफोन लॉन्च, मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम, टेलीकॉम अपडेट्स, इंटरनेट सेवाओं, AI टूल्स, ऐप्स, गैजेट्स, टिप्स एंड ट्रिक्स और कंज्यूमर टेक्नोलॉजी से जुड़े विषयों में है. वहीं ऑटोमोबाइल सेक्टर में वे नई कारों और बाइक्स की लॉन्चिंग, फीचर्स, कीमत, सेफ्टी, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV), फ्लेक्स-फ्यूल टेक्नोलॉजी और ऑटो इंडस्ट्री के बदलते ट्रेंड्स पर रेगुलर लिखते हैं.

उनकी कोशिश रहती है कि हर खबर में सिर्फ फीचर्स, कीमत या लॉन्च की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी बताया जाए कि वह टेक्नोलॉजी आम लोगों के कितने काम की है, उसे इस्तेमाल करने का एक्सपीरियंस कैसा होगा और उसे खरीदना सही रहेगा या नहीं.

पढ़ाई और करियर

बिहार में जन्मे अंकित आनंद की शुरुआती शिक्षा सीबीएसई बोर्ड से हुई है. इसके बाद उन्होंने साल 2024 में गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी (GGSIPU) के कस्तूरी राम कॉलेज ऑफ हायर एजुकेशन से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन डिग्री हासिल की. पढ़ाई के दौरान ही अंकित की रुचि डिजिटल मीडिया और न्यूज लिखने में बढ़ने लगी. इसी दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों पर काम करना शुरू किया और आगे चलकर उन्होंने इन्हीं विषयों को अपने काम का हिस्सा बना लिया.

प्रभात खबर डिजिटल से पहले अंकित ने Zee News में करीब एक साल तक काम किया. यहां उन्होंने टीवी न्यूज प्रोडक्शन, आउटपुट डेस्क, कंटेंट रिसर्च, फैक्ट वेरिफिकेशन और न्यूज राइटिंग के अलग-अलग पहलुओं पर काम किया.

विजन

अंकित का मानना है कि टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरें केवल नए प्रोडक्ट्स की जानकारी नहीं होतीं, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी, खरीदारी के फैसलों और डिजिटल एक्सपीरियंस पर भी असर डालती हैं.

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