रियासत को जीते जी नहीं मिला आवास

Updated at :22 Aug 2013 2:46 AM
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रियासत को जीते जी नहीं मिला आवास

बसंतराय : बीपीएलधारी रियासत करीब तीन वर्षो से प्रखंड का चक्कर काट रहा था. बीपीएलधारी होने के बावजूद आवास का लाभ नहीं मिल पाया. रियासत की पत्नी जैनव खातून ने विलाप करते हुए कहा कि अगर पक्का घर होता तो आज उसके पति की जान नहीं जाती. कैसे पालेगी तीन बच्चों को गरीब परिवार का […]

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बसंतराय : बीपीएलधारी रियासत करीब तीन वर्षो से प्रखंड का चक्कर काट रहा था. बीपीएलधारी होने के बावजूद आवास का लाभ नहीं मिल पाया. रियासत की पत्नी जैनव खातून ने विलाप करते हुए कहा कि अगर पक्का घर होता तो आज उसके पति की जान नहीं जाती.

कैसे पालेगी तीन बच्चों को

गरीब परिवार का एक मुखिया रियासत जो दिन भर मजदूरी कर पत्नी सहित तीन बच्चों को पाल रहा था. मौत के बाद पत्नी पर दुख का पहाड़ टूट गया है. तीन बच्चों में 11 वर्षीय गुलजार, 5 वर्षीय गुलफान तथा 8 वर्षीय बेटी रूबी को पालना उसके वश से बाहर है.

चंदा कर किया शव का दफन

पैसे के आभाव में जी रहे परिवार के समक्ष घर के मुखिया की अंतिम क्रिया को लेकर दूसरों से चंदा लेना पड़ा. हालांकि समाज के लोगों ने दुख की इस घड़ी में अपनी ओर से मदद करते हुए बुधवार को रियासत हुसैन का शवदफन किया.

मिलेगा मुआवजा : सीओ

अंचलाधिकारी शंकर प्रसाद सिंह ने कहा कि आपदा राहत से 20 हजार मुआवजा का प्रावधान है. रिपोर्ट के बाद परिवार को राशि मिलेगी.

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