डॉक्टरों ने ओपीडी सेवा का किया बहिष्कार

Updated at : 27 Feb 2018 5:47 AM (IST)
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डॉक्टरों ने ओपीडी सेवा का किया बहिष्कार

गोड्डा : जामताड़ा सिविल सर्जन के साथ मारपीट व दुर्व्यवहार करने का मामला तूल पकड़ने लगा है. झासा व आइएमए के संयुक्त आह्वान पर गोड्डा के चिकित्सकों ने सोमवार को कार्य का बहिष्कार कर दिया. इस कारण अस्पताल में ओपीडी सेवा पूरी तरह से प्रभावित रही. लेकिन वहीं जामताड़ा में डीसी आदित्य कुमार आनंद ने […]

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गोड्डा : जामताड़ा सिविल सर्जन के साथ मारपीट व दुर्व्यवहार करने का मामला तूल पकड़ने लगा है. झासा व आइएमए के संयुक्त आह्वान पर गोड्डा के चिकित्सकों ने सोमवार को कार्य का बहिष्कार कर दिया. इस कारण अस्पताल में ओपीडी सेवा पूरी तरह से प्रभावित रही. लेकिन वहीं जामताड़ा में डीसी आदित्य कुमार आनंद ने सोमवार को सीएस बीके साहा से बात की और दोषियों पर जल्द कार्रवाई का आश्वासन दिया. जिसके बाद जामताड़ा में हड़ताल समाप्त हो गया.

मगर गोड्डा में गोलबंद होकर चिकित्सकों ने ओपीडी कार्य नहीं करते हुए डीएस के चैंबर में बैठे रहे. मामले को लेकर आइएमए व झासा की ओर से सरकार को 24 फरवरी तक कार्रवाई करने का टाइम लाइन दिया गया था. टाइम लाइन खत्म होने के बाद चिकित्सकों ने कार्य का बहिष्कार करते हुए सरकार को जवाब देने का काम किया है.

इधर, चिकित्सकों द्वारा ओपीडी सेवा का बहिष्कार किये जाने के कारण करीब 200 मरीजों को गोड्डा सदर अस्पताल से लौटना पड़ा. इससे उन्हें परेशानी हुई. सदर अस्पताल में प्रतिदिन ओपीडी में 250 से 300 रोगी इलाज कराने के लिए आते हैं. सोमवार को ओपीडी कार्य बाधित रहने के कारण करीब 200 मरीजों को बिना इलाज कराये ही घर लौटना पड़ा है.

आपातकालीन व पोस्टमार्टम की दी सुविधा : मानवीय संवेदना के आधार पर गोड्डा में चिकित्सकों ने आपातकालीन व पोस्टमार्टम की सुविधा के तहत कार्य किया.
कार्य बहिष्कार में सभी चिकित्सक हुए शामिल : कार्य बहिष्कार में डॉ बनदेवी झा, डॉ डीके चौधरी, डॉ सीएल वैद्य, डॉ मंटू टेकरीवाल, डॉ टीएस झा, डॉ अंबिका प्रसाद आदि मौजूद थे.
सभी मरीज को पूरी संवेदनशील होकर चिकित्सक इलाज करते हैं. इसके बावजूद भी किसी मामले को लेकर चिकित्सकों के साथ दुर्व्यवहार व मारपीट की जाती है. अगर ऐसा ही रहा तो कोई भी चिकित्सक सरकारी अस्पतालों में कार्य करने से पहले दस बार सोचेंगे. हाल के दिनों में सरकार ने चिकित्सकों की बहाली की थी, बहुत कम चिकित्सकों ने योगदान दिया. कैंपस सेलेक्शन में चिकित्सक चले गये. जो भी डॉक्टर हैं उनसे इलाज कराने में जनता की सहयोग जरूरी है.
जामताड़ा सीएस के मामले में सरकार को कार्रवाई हेतु 24 फरवरी तक का समय दिया गया था, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई. इस कारण चिकित्सकों ने ओपीडी कार्य का बहिष्कार किया.
-डॉ प्रभा रानी प्रसाद, सचिव आइएमए गोड्डा.
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