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Giridih News :जी मैं हुई महेंद्र सिंह कहिये क्या बात है...अंतिम वाक्य बन गया

Updated at : 15 Jan 2025 10:45 PM (IST)
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Giridih News :जी मैं हुई महेंद्र सिंह कहिये क्या बात है...अंतिम वाक्य बन गया

Giridih News :कौन है महेंद्र सिंह? सरिया थाना क्षेत्र के दुर्गी धवैइया में 16 जनवरी 2005 को चुनावी सभा में बाइक से आये तीन अपराधियों ने सवाल पूछा था. भाड़ से निकलकर अपना परिचय देते हुए कहा जी मैं हूं महेंद्र सिंह कहिये क्या बात है?

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एक विधायक की सादगी क्या होती है, यह महेंद्र सिंह की जीवनी बताती है

कौन है महेंद्र सिंह? सरिया थाना क्षेत्र के दुर्गी धवैइया में 16 जनवरी 2005 को चुनावी सभा में बाइक से आये तीन अपराधियों ने सवाल पूछा था. भीड़ से बाहर निकलकर अपना परिचय देते हुए हथियार बंद अपराधियों को कहां जी मैं हूं महेंद्र सिंह कहिये क्या बात है? यह बगोदर के पूर्व विधायक स्व महेंद्र सिंह की अंतिम शब्द थे. जो बिना डरे, सहमे, बिना सोचे, समझे अपने को परिचय दिया. बस इसी जवाब को सुनकर अपराधियों ने ताबड़तोड़ गोली चलाकर, से महेंद्र सिंह का सीना छलनी कर दिया. गोली लगने से उनका शरीर जमीन पर गिरा और तत्काल उनकी मौत हो गयी. महेंद्र सिंह ने मरते- मरते एक बात लोगों के जेहन में छोड़ गये कि कभी भी किसी से डरना नहीं, और अपने अधिकार के लिए लड़ना ही जीवन है. इसी अंदाज का हर कोई कायल था और आज भी है. एक आजाद विचारधारा शख्सियत का दूसरा नाम महेंद्र सिंह है. वह बिहार-झारखंड में पहचान की मोहताज नहीं थे. मालूम हो कि महेंद्र सिंह किसानों, मजदूर, शोषितों के रहनुमा थे. उनका जन्म 22 फरवरी 1954 को खंभरा में एक किसान परिवार में हुआ था. उसने अपने गांव के स्कूल में प्रारंभिक शिक्षा ग्रहण की. उन्होंने आठवीं तक ही शिक्षा की, लेकिन किताबों के शौकीन थे. तार्किक बहस से उनके सामने अच्छे-अच्छे चुप हो जाते थे.

गजल कविता, सिनेमा व अखबारों के शौकीन थे

राजनीति जीवन में व्यस्तता के बावजूद गजल कविता, सिनेमा, अखबारों से उनका गहरा शौक रहा. उनका जीवन सादगी से भरा था. उन्होंने अपने विधायक के दौर में यह लोगों को बताया कि एक विधायक की सादगी क्या होती हैं? महज शर्ट-पैंट और एक जोड़ी चप्पल से अपने गांव से विधायक की सफरनामा को एक आइना की तरह साफ रखा. ना तो हवेली बनाने और ना ही अपनी पीढ़ियों को भविष्य संवारने की कभी चिंता रही. वह 15 वर्ष की आयु में राजनीति में आये थे. एक मामले में जेल गये, तो थाली पीटो आंदोलन चलाकर बंदियों को जागरूक किया.

(कुमार गौरव, बगोदर)B

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