हाजीपुर में सरकारी दवा फेंकने का मामला गरमाया, प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में उठाया गया सामान
Published by : YUVRAJ RATAN Updated At : 28 May 2026 4:20 PM
फेंकी गई दवाइयों को उठवाते अधिकारी
Hajipur News : रोगियों को बाहर से खरीदना पड़ता है सामान, इधर गड्ढे में मिलीं नई दवाइयां
Hajipur News (नीरज कुमार) : राजापाकर प्रखंड क्षेत्र के लगुराव बिलंदपुर पंचायत के लगूराव चौर में फेंकी गई सरकारी दवाओं को दवा वितरण करने वाली स्वास्थ्य विभाग की गाड़ी में भरकर अनुमंडल मंडल अस्पताल महुआ ले जाया गया. जहां जांच कर आगे की कार्रवाई की जाएगी. ज्ञात हो कि मंगलवार को प्रखंड क्षेत्र के लगुराव चौड़ स्थित एक गड्ढे में सुबह भारी मात्रा में सरकारी अस्पतालों में वितरित की जाने वाली दवाइयां एवं सर्जरी के सामान को ग्रामीणों द्वारा रुकवाए जाने के बाद आज गुरुवार को अनुमंडल पदाधिकारी महुआ, बीडियो सौरव बरनवाल महुआ ,सीओ मणि वर्मा अंचलाधिकारी महुआ एवं बीडियो राजापाकर सूर्य प्रताप सिंह, सीओ गौरव कुमार के उपस्थिति में स्वास्थ्य विभाग के तीन गाड़ियों में सभी दवा एवं सर्जरी के सामानों को प्लास्टिक के बोरे में पैक कर गाड़ी में लोड किया गया. जिसे जांच के लिए अनुमंडल अस्पताल महुआ ले जाया गया. जहां जांच की जाएगी की इस बैच नंबर की दवा किस जिले की थी. किसके द्वारा फेंकी गई क्यों फेंकी गई.
2027 तक वैध थीं सरकारी दवाइयां, फिर किसने फेंकी?
ज्ञात हो ग्रामीणों ने जब गड्ढे में बड़ी संख्या में दवा के पैकेट, इंजेक्शन तथा चिकित्सीय सामग्री देखी तो इसकी सूचना स्थानीय प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग को दी थी .सूचना मिलते ही राजापाकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की टीम तथा जिला स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे और मामले की जांच शुरू की थी. स्वास्थ्य विभाग की टीम ने दवाइयों और उपकरणों का निरीक्षण कर बैच नंबर एवं एक्सपायरी तिथि की जांच किया था. अधिकांश दवाइयों पर जनवरी 2027 तक की एक्सपायरी अंकित पाई गई थी. फेंकी गई दवाओं में मेटफॉर्मिन, लैक्टोलोस, पीडियाड्रिप, सिल्वर सल्फाडायजिन, बी-कॉम्प्लेक्स सिरप, परमैथ्रिन क्रीम, माइकोनाजोल क्रीम तथा ओआरएस के पैकेट शामिल था. वहीं सर्जिकल सामान में भारी मात्रा में बिल्कुल नई सिरिंज, यूरिन बैग और सर्जिकल ग्लव्स बरामद किए गए थे.
किसने और क्यों फेंकी सरकारी दवाइयां?
चौर में स्थित गढे नुमा पानी में से सभी दवा ,सर्जिकल के समान स्टोर कीपर दीपक कुमार एवं अन्य स्वास्थ्य कर्मी एवं कुछ ग्रामीणों के सहयोग से पॉलिथीन के बैग में भरकर उसे स्वास्थ्य विभाग की गाड़ी में डाल रहे थे. वही मंगलवार को ग्रामीण दवाइयां को सिविल सर्जन के आने के बाद ही ले जाने की बात कर रहे थे. लेकिन आज गुरुवार को महुआ एवं राजापाकर के पदाधिकारी की उपस्थिति एवं स्थानीय मुखिया प्रतिनिधि पंकज कुमार की उपस्थिति में लोगों को समझा बूझकर गाड़ी में फेंके गए दवा को लोड किया जा रहा था. कोई भी स्वास्थ्य कर्मी, पदाधिकारी बताने को तैयार नहीं है कि यह दवा कहां से फेंकी गई किसने लाकर फेंकी जो जांच का विषय है. यह किसी साजिश का हिस्सा है.
सरकारी दवा कांड की चर्चा चौक-चौराहों तक, जांच रिपोर्ट का इंतजार
जांच के बाद ही पता चलेगा कि किसके द्वारा यह कारनामा किया गया. इस तरह खुले में फेंकी गई सरकारी अस्पताल की दवाइयां की चर्चा क्षेत्र के विभिन्न चौक चौराहों पर हो रही है. लोग चर्चा कर रहे हैं कि अस्पताल में जाने पर सर्जिकल सामान का काम आने पर रोगी को बाहर से लाने के लिए लिखा जाता है. रोगी के परिजन महान की कीमत देकर सर्जिकल के समान लाते हैं. लेकिन ऐसी क्या मुसीबत आ गई कि इतनी महंगी दवाइयां एवं सर्जिकल की सामानों को खुले आसमान के नीचे गंदे पानी में कर में फेंका गया. जिसका मूल्य लाखों रुपए बताया गया है.
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