गांव के मुकेश प्रजापति, संजीत प्रजापति, संजय कुमार, मंटू कुमार समेत अन्य ग्रामीणों का कहना है कि यहां लंबे समय पेयजल की समस्या व्याप्त है. गांव में एक भी चापाकल नहीं है. एक-दो कुएं से लोग अपनी प्यास बुझाते हैं.
गर्मी चुआं बनता है सहारा
गर्मी में कुआं सूख जाता है. लोग बगल की नदी में चुआं खोदकर पीने के लिए पानी लाते हैं. ग्रामीणों ने कहा कि समस्या को देखते हुए यहां दो वर्ष पूर्व नल जल योजना के तहत एक जलमीनार तो बना दिया गया है, लेकिन घरों तक पाइप भी नहीं बिछायी गयी. ऐसे में पानी कहां से मिलेगा. गांववालों ने संवेदक और विभाग पर कई आरोप लगाये हैं. तिसरी प्रखंड में पेयजापूर्ति के लिए पिछले दो वर्षों से नल जल योजना चलायी जा रही है, लेकिन लोगों को लाभ नहीं मिल रहा है. खास कर तिसरी प्रखंड मुख्यालय स्थित कई ऐसे ड्राई जोन हैं, संवेदक ने खानापूर्ति के लिए पाइपलाइन बिछा दी है. जिस बोरिंग में पानी नहीं निकला, वहां पर टंकी का स्ट्रक्चर बना दिया है. केवटटांड़ तिसरी मुख्यालय में है. इसके बाद भी पानी टंकी लिक कर गयी है. केवटाटांड़ के अलावा चिलगिली, जमुनियाटांड़, जीनाडीह में जलस्तर काफी नीचे चला गया है. इससे इन क्षेत्रों में हमेशा पेयजल की किल्लत रहती है.
क्या कहते हैं विभाग के जेई
पेयजल व स्वच्छता विभाग के कनीय अभियंता मणिकांत ने कहा कि तिसरी प्रखंड के कई जगहों पर नल जल योजना का काम पूरा नहीं हुआ है. वहां संवेदक से कार्य करवाया जाएगा. वर्तमान में फंड नहीं रहने के कारण कार्य रुका हुआ है.
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