आदिवासी बहुल गांवों में नहीं बनी पक्की सड़क, कच्ची व जर्जर पगडंडी ही सहारा
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 14 Jun 2024 11:19 PM
विज्ञापन
बेंगाबाद के विभिन्न आदिवासी गांव में आज भी पक्की सड़क का अभाव है. पक्की सड़क के अभाव में ग्रामीणों के लिए पगडंडी व कच्ची सड़क ही आवागमन का सहारा है.
विज्ञापन
समस्या. दुर्घटना की आशंका से सहमे रहते हैं ग्रामीण, बरसात में आवाजाही में होती है अधिक परेशानी
अशोक शर्मा/बेंगाबाद
बेंगाबाद के विभिन्न आदिवासी गांव में आज भी पक्की सड़क का अभाव है. पक्की सड़क के अभाव में ग्रामीणों के लिए पगडंडी व कच्ची सड़क ही आवागमन का सहारा है. वहीं, कई गांव में पक्की सड़क के अलावा नदी नालों पर पुल का भी अभाव है. पुल के अभाव में बरसात के मौसम में गांव टापू में बदल जाते हैं. वर्षों से क्षेत्र के आदिवासी समाज को वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल तो किया, लेकिन नेता मूलभूत सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में कोई पहल नहीं की. जनप्रतिनिधि प्रत्येक साल सड़क निर्माण व सुदृढ़ीकरण के लिए विभाग को अपनी अनुशंसा जरूर भेजते हैं, लेकिन आदिवासी बहुल गांव की सड़क ऐसे जनप्रतिनिधियों ने कभी भी अपनी प्राथमिकता सूची में नहीं रखी. कच्ची सड़क की स्थिति इस कदर जर्जर है कि थोड़ी सी असावधानी से बड़ी दुर्घटना की आशंका बनी रहती है. वहीं, रात में इन सड़कों पर चलना खतरों से खाली नहीं है.ताराजोरी पंचायत के आधा दर्जन गांवो में नहीं है पक्की सड़क
ताराजोरी पंचायत के शत प्रतिशत गांव में आदिवासी समाज के लोग निवास करते हैं. पंचायत के आधा दर्जन से अधिक गांव में आज भी पक्की सड़क नहीं पहुंच पायी है. इसमें चंदियो, समुडीह, ताराजोरी, मोहनडीह पथ, धावाटांड मोड़ से भलपहरी, गगनपुर , ख़ुदनीटांड, गुजरीडीह पथ शामिल हैं. ग्रामीण घरों से कच्ची सड़क से आवाजाही कर पंचायत सचिवालय, प्रखंड और अंचल कार्यालय, अस्पताल के अन्य जगहों पर जाते हैं. सड़क की जर्जर अवस्था के कारण चार पहिया वाहनों का गांव पहुंचना मुश्किल होता है. ग्रामीणों को आवाजाही में भारी फजीहत होती है. वहीं नुनियाटांड़ और गुजरूडीह गांव के नाला पर पुल नहीं बना है. इसके कारण बरसात में गांव टापू में बदल जाता है.कल्पना सोरेन के विधायक बनने से बढ़ी उम्मीद
बताया जाता है कि अब तक गांडेय विधानसभा क्षेत्र से भाजपा, झामुमो और कांग्रेस पार्टी के विधायक बने हैं. लंबे समय तक तीनों दलों के विधायकों ने यहां का प्रतिनिधित्व किया. हर बार आदिवासी समाज के वोटरों को वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल किया, लेकिन इस समाज को मूलभूत सुविधा उपलब्ध कराने में असफल रहे. विधायक सालखन सोरेन के मद से चंदियो-सामुडीह पथ पर नदी में पुल जरूर बनाया गया, लेकिन सड़क के अभाव में ग्रामीणों को इससे ज्यादा लाभ नहीं मिला. पंसस निर्मल टूडू, ग्रामीण मो. सलीम भुटारी, विनोद मुर्मू, सुखू मरांडी, देवान हेंब्रम, हेमलाल हांसदा, रघु हेंब्रम महेंद्र हांसदा, बड़की देवी आदि ने किा कि चुने गये जनप्रतिनिधियों के एजेंडे में आदिवासी बहुल गांव के लिए मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना नहीं था. इस कारण लंबे समय से उपेक्षित किया गया. इस बार कल्पना सोरेन गांडेय विधानसभा क्षेत्र की से विधायक बनीं हैं. उनसे हमें काफी उम्मी है. उम्मीद है कि उनकी पहल से कच्ची सड़क की जगह पक्की सड़क की सुविधा उन्हें मिलेगी. वहीं, झमुमो के प्रखंड अध्यक्ष नुनूराम किस्कू का कहना है कि आदिवासी बहुल गांव के अलावा प्रखंड क्षेत्र के सभी कच्ची व जर्जर पथों की सूरत बदलने वाली है. कुछ का टेंडर निकल चुका है और कुछ का प्रस्ताव विभाग को भेजा गया है.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
विज्ञापन
लेखक के बारे में
By Prabhat Khabar News Desk
यह प्रभात खबर का न्यूज डेस्क है। इसमें बिहार-झारखंड-ओडिशा-दिल्ली समेत प्रभात खबर के विशाल ग्राउंड नेटवर्क के रिपोर्ट्स के जरिए भेजी खबरों का प्रकाशन होता है।
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए
विज्ञापन










