3 साल बाद भी गिरिडीह पुलिस नहीं सुलझा पायी धनवार के दोहरे हत्याकांड की गुत्थी, केवल आश्वासन ही मिला अब तक

Updated at : 29 Jan 2025 9:10 PM (IST)
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Jharkhand Police

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Giridih Crime News: गिरिडीह के धनवार में तीन साल पहले हुए डबल मर्डर की गुत्थी की अब तक नहीं सुलझ सकी है. मृतक के परिजन पुलिस मुख्यालय का चक्कर काटते ही रह गये, लेकिन उन्हें सिर्फ आश्वासन ही मिला.

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गिरिडीह : गिरिडीह के धनवार थाना क्षेत्र के चर्चित दोहरे हत्याकांड की गुत्थी सुलझाने में तीन साल के बाद भी पुलिस असफल है. अंत में अनसुलझे मामलों को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है. इस दौरान मृतक के परिजन न्याय की आस में स्थानीय थाना से लेकर अनुमंडल तथा पुलिस मुख्यालय तक का चक्कर ही काटते रह गये. हत्या की वजह तक पुलिस नहीं पता लगा सकी है. घटना के बाद परिजनों को केवल आश्वासन पर आश्वासन ही मिल पाया.

तीन साल से अधिक हो चुका है घटना हुए

बता दें कि घोड़थंभा ओपी क्षेत्र के नवादा की 14 वर्षीय नाजिया और उसकी 40 वर्षीय चाची जगीरा की हत्या हुए तीन साल से ज्यादा बीत चुके हैं. 26 जनवरी, 2022 को पंचायत महेशमरवा अंतर्गत नवादा के हरदिया जंगल में हत्यारों ने निर्मम घटना को अंजाम दिया गया था. लेकिन इसे विडंबना कहें या गिरिडीह पुलिस की नाकामी कि हत्यारे को किसी भी कीमत पर नहीं बक्शने का दावा करने वाला सिस्टम द्वारा अब तक मामले की तफ्तीश तक नहीं कर पायी है. आवाज बुलंद करने वाले राजनीतिक दल के लोगों ने भी अब चुप्पी साध ली है.

जब पूरा देश गणतंत्र का उत्सव मना रहा था, उसी समय मिली थीं खून से लथपथ लाशें

गौरतलब है कि 2022 में जब पूरा देश गणतंत्र दिवस मना रहा था ठीक उसी समय खून से लथपथ चाची-भतीजी का शव घोड़थंभा ओपी क्षेत्र के झलकडीहा और महेशमरवा गांव के बीच पहाड़ी व झाड़ियों से घिरे हरदिया नदी में पाया गया था. जबकि घटना स्थल से एक धारदार टांगी, किशोरी के पानी में भीगा मोबाइल भी पुलिस को मिला था. मौके से पुलिस ने जमीन पर गिरे खून को भी इकट्ठा किया था. कार्रवाई के लिए अज्ञात के खिलाफ पीड़ित परिवार ने घोड़थंभा ओपी में आवेदन भी दिया था, इसके बाद संदेह के आधार पर पुलिस ने करीब आधा दर्जन से अधिक लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की थी. इन सबके बावजूद दोहरी हत्याकांड का यह मामला अबतक अबूझ पहेली बनी हुई है. आश्चर्य है कि हत्यारों तक पहुंचने के लिए पुलिस के पास कई संसाधन हैं. बावजूद मामले का उद्भेदन नहीं हो पाना समझ से परे है.

इंतजार में बीत गये तीन साल, एसडीपीओ बोल रहे – कार्रवाई की जायेगी

खोरीमहुआ एसडीपीओ राजेंद्र प्रसाद ने बताया कि मामला संज्ञान में आते ही स्टडी कर लिया गया है और उनके स्तर से जिला पुलिस को रिपोर्ट भेज दिया गया है. कहा कि अग्रेत्तर आदेश के आलोक में कार्रवाई की जायेगी.

आरोपियों तक पहुंच चुकी है पुलिस, राजनीतिक दबाव में दबा रही मामला : भाजपा नेता

धनवार बाजार के भाजपा नेता सह समाजसेवी अरविंद साव समेत बड़ी संख्या में लोगों ने सिस्टम पर आरोप लगाते हुए दावा किया है कि मामले में पुलिस के हाथ हत्यारों के गिरेबान तक पहुंच चुके हैं लेकिन जानबूझकर मामले का उद्भेदन नहीं किया जा रहा है. लोगों का कहना है कि राजनितिक दबाव के चलते पुलिस मामले को दबा रही है.

तत्कानीन विधायक विनोद सिंह ने विधानसभा में उठाया था मामला, राजनीतिक दबाव में पुलिस दबा रही केस : कयूम

माले धनवार प्रखंड कमिटी सचिव कयूम अंसारी ने बताया कि चाची-भतीजी की निर्मम हत्याकांड के खुलासे, अपराधियों की गिरफ्तारी समेत हत्याकांड के खुलासे को लेकर माले कार्यकर्ताओं ने धरना-प्रदर्शन देकर कार्रवाई की मांग की. तत्कालीन माले विधायक विनोद सिंह ने विधानसभा में भी इस मामले को प्रमुखता से उठाया. लेकिन राजनैतिक कारणों के चलते पुलिस-प्रशासन इस अतिगंभीर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दी. माले इस मामले में आंदोलन का मूड बना रही है. इस हत्याकांड को लेकर पार्टी स्तर से आंदोलन किया जायेगा.

न्याय व्यवस्था से उठ रहा है भरोसा : मृतका के परिजन

अब न्याय व्यवस्था और पुलिस-प्रशासन से हमारा भरोसा उठने लगा है. राज्य के सभी बड़े प्रशासनिक और जनप्रतिनिधियों के दरवाजे पर हम न्याय की भीख मांग चुके हैं. लेकिन ना ही न्याय मिला और ना ही अबतक कोई कारवाई होती दिख रही है. तीन साल के बाद मामले को हमेशा के लिए दबाया जा रहा है.

मृतका, नाजिया के पिता आबिद अंसारी

जिसने हमारे परिवार की हत्या की परिवार को जिसने हत्या की वो खुलेआम घूम रहा है. हम दरवाजे दरवाजे न्याय की भीख मांगते फिर रहे हैं. न्याय व्यवस्था और हमारे लिए इससे बड़ा दुर्भाग्य क्या हो सकता है. पुलिस-प्रशासन और न्याय व्यवस्था से अब बहुत उम्मीद रखना अब हास्यप्रद महसूस होने लगा है.

मृतका जागीरा खातून के पति युनुस अंसारी

यह मामला क्षेत्र में सबसे दर्दनाक मामला था. घटना के बाद क्षेत्र में दहशत का माहौल बन गया था. लेकिन खुलासा नहीं होने से पुलिसिया कार्यप्रणाली पर संदेह हो रहा है. इससे पुलिस प्रशासन की नाकामी और लापरवाही का अंदाजा लगाया जा सकता है. सिस्टम और न्याय व्यवस्था से लोगों की उम्मीदें टूट रही हैं.

विवेक विकास, भाजपा नेता

दोहरी निर्मम हत्याकांड से हम सभी सिहर गए थे. लेकिन राजनैतिक साजिश के तहत मामले को ठंडे बस्ते में डाल देना और पुलिस का चुप हो जाना अत्यंत गंभीर मामला है. पुलिस-प्रशासन का यह रवैया घोर अलोकतांत्रिक है. इसके साथ ही पुलिस-प्रशासन की इस तरह की नाकामी अपराधियों का मनोबल बठा रही है.

मिन्हाज अंसारी, पूर्व मुखिया

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Sameer Oraon

लेखक के बारे में

By Sameer Oraon

इंटरनेशनल स्कूल ऑफ बिजनेस एंड मीडिया से बीबीए मीडिया में ग्रेजुएट होने के बाद साल 2019 में भारतीय जनसंचार संस्थान दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. 5 साल से अधिक समय से प्रभात खबर में डिजिटल पत्रकार के रूप में कार्यरत हूं. इससे पहले डेली हंट में बतौर प्रूफ रीडर एसोसिएट के रूप में काम किया. झारखंड के सभी समसामयिक मुद्दे खासकर राजनीति, लाइफ स्टाइल, हेल्थ से जुड़े विषयों पर लिखने और पढ़ने में गहरी रुचि है. तीन साल से अधिक समय से झारखंड डेस्क पर काम कर रहा हूं. फिर लंबे समय तक लाइफ स्टाइल के क्षेत्र में भी काम किया हूं. इसके अलावा स्पोर्ट्स में भी गहरी रुचि है.

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