पापी पेट नहीं जानता 41 या 42 डिग्री पारा

Updated at :07 May 2017 9:22 AM
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पापी पेट नहीं जानता 41 या 42 डिग्री पारा

’सोते हैं फुटपाथ पे अखबार बिछा के, मजदूर कभी नींद की गोली नहीं खाते’ बुनियादी जरूरतों के लिए पिसते मजदूर की एकमात्र लड़ाई जीवन बचाने की होती है. आंखों में सुख-सुविधा के सपने नहीं होते. पारा जब 41-42 डिग्री को छूने लगा है तो लोग घर के बाहर झांकना तक नहीं चाहते तो दिहाड़ी मजदूर […]

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’सोते हैं फुटपाथ पे अखबार बिछा के, मजदूर कभी नींद की गोली नहीं खाते’ बुनियादी जरूरतों के लिए पिसते मजदूर की एकमात्र लड़ाई जीवन बचाने की होती है. आंखों में सुख-सुविधा के सपने नहीं होते. पारा जब 41-42 डिग्री को छूने लगा है तो लोग घर के बाहर झांकना तक नहीं चाहते तो दिहाड़ी मजदूर और रोज की पूंजी से सब्जी बेचने वालों के पास झुलसने के अलावा कोई चारा नहीं होता.
गिरिडीह : अपने परिवार के भरण-पोषण के लिए कुछ महिला-पुरुष कड़ी धूप में सड़कों के किनारे बैठ कर सब्जी बेचने को विवश हैं, क्योंकि अगर ये सड़क पर बैठ कर अपनी दुकानदारी नहीं करेंगे तो घर का चूल्हा नहीं जलेगा. ऐसे में भीषण गरमी में सड़कों पर बैठ कर सब्जी बेचने की मजबूरी समझी जा सकती है. अगर सरकार या जिला प्रशासन ऐसे लोगों की मदद करे तो उनकी परेशानी खत्म हो सकती है.
शहर के बाजार से जलेगा गांव का चूल्हा : शहर के मुख्य बाजार जेपी चौक, कालीबाड़ी चौक, बड़ा चौक, मकतपुर, पचंबा, बक्सीडीह रोड आदि पर प्रत्येक दिन दर्जनों की संख्या में सब्जी, फल, जूस, सत्तू विक्रेता नजर आते हैं. इन जगहों पर शहरी क्षेत्र के लोग ही नहीं, बल्कि कई किलोमीटर दूर गांवों से ऑटो का भाड़ा देकर सब्जी बेचने के लिए महिलाएं भी गिरिडीह शहर आती हैं. इन्हें उम्मीद रहती है कि शहर के बाजार से ही उनके घर का चूल्हा जलेगा. ऐसे ही कुछ लोगों से प्रभात खबर ने बातचीत की और उनकी वास्तविक स्थिति को जाना.
सत्तू पर कोल ड्रिंक्स भारी : भीषण गरमी के कारण सड़कों पर सन्नाटा है. सड़क के किनारे सत्तू और गन्ना बेचने वालों ने अपनी दुकान लगा रखी हैं. दूसरों की प्यास बुझाने के लिए दुकान लगानेवाले भूखे-प्यासे रहते हैं.
वैसे तो गरमी के मौसम में सबसे ज्यादा बिक्री सत्तू, गन्ने का जूस, लस्सी आदि की होती है, लेकिन इन ठेले वालों का दुखड़ा कोई नहीं जानता. बड़ा चौक पर सत्तू का ठेला लगाने वाले पंकज ने बताया कि गरमी के दिनों में सत्तू की बिक्री तो ज्यादा होती थी, लेकिन पिछले कुछ वर्षों से लोगों का रुझान कोल ड्रिंक्स की ओर बढ़ गया है. फलत: अब सत्तू की बिक्री कम हो गयी है. अभी भी कुछ ग्राहक आते हैं जो सत्तू पीना ही पसंद करते हैं. बताया कि अभी बाजार में 10 रु गिलास सत्तू बेचा जा रहा है.
गांडेय थाना क्षेत्र के परमाडीह निवासी विनोद ने बताया कि वह बड़ा चौक पोस्ट ऑफिस के सामने पिछले कई दिनों से प्याज, लहसून, आदी और मिर्चा बेच रहे हैं. बताया कि उनके घर में कुल चार सदस्य हैं.
इनकी देखभाल उन्हीं के जिम्मे है. यही कारण है कि उन्हें कड़ी धूप में सड़क पर अपनी दुकान लगानी पड़ती है. दिन भर की दुकानदारी से उन्हें 50,100 या फिर 150 रु बच जाते हैं, जिससे उनका घर चलता है. जिस दिन ग्राहक का टोटा होता है, वह दिन भारी पड़ता है. बड़ा चौक पर ही ठेला लगाकर सब्जी बेचने वाले बुलाकी रोड निवासी मो. मोइन ने बताया कि उनके घर में कुल छह लोग हैं. सब्जी की दुकानदारी से उन्हें 100 से 150 रु तक की कमाई हो जाती है.
किसी दिन सब्जी नहीं बिकी तो घर भर के लोगों को बासी भात खाकर ही सोना पड़ता है. धरियाडीह निवासी संजय साव, मो. सबरान, मो, फिरोज, आशा देवी, फुलमति देवी, पूनम देवी, सूरज कुमार आदि ने बताया कि चाहे कितनी भी गरमी हो, पापी पेट के लिए आराम करना पाप से कम नहीं. अगर वे अपने घर में आराम करेंगे तो उनके बच्चे क्या खायेंगे. पापी पेट नहीं जानता 41 या 42 डिग्री पारा.
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