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राज्य को अकालग्रस्त घोषित करे सरकार : हेमंत सोरेन- कृषि मंत्री का बयान समझ से परे- मसानजोर डैम की हालत अभी से ही खराब – जनवरी तक पेयजल की भी होगी किल्लत संवाददाता, दुमकापूर्व मुख्यमंत्री सह नेता प्रतिपक्ष हेमंत सोरेन ने कहा है कि राज्य में 80 प्रतिशत फसल बरबाद हो चुकी है. सरकार को […]
राज्य को अकालग्रस्त घोषित करे सरकार : हेमंत सोरेन- कृषि मंत्री का बयान समझ से परे- मसानजोर डैम की हालत अभी से ही खराब – जनवरी तक पेयजल की भी होगी किल्लत संवाददाता, दुमकापूर्व मुख्यमंत्री सह नेता प्रतिपक्ष हेमंत सोरेन ने कहा है कि राज्य में 80 प्रतिशत फसल बरबाद हो चुकी है. सरकार को चाहिए कि वह राज्य को अकालग्रस्त क्षेत्र घोषित करे और किसानों को एक-एक लाख रुपये की तत्काल आर्थिक सहायता प्रदान करे. दुमका स्थित अपने आवास में पत्रकारों से बातचीत में हेमंत सोरेन ने कहा कि इस गंभीर मसले पर कृषि मंत्री का बयान समझ से परे है. उन्होंने कहा कि मसानजोर डैम की हालत अभी से ही खराब हो चुकी है. जनवरी आते-आते पानी भी पीने लायक उपलब्ध नहीं होगा. सिंचाई तब दूर की बात होगी. मवेशियों का भी बुरा हाल होगा. चारा-दाना की व्यवस्था अभी से ही सरकार को करनी चाहिए. अगर ऐसा नहीं किया गया, तो उनकी पार्टी झामुमो सदन में मुखर होकर आवाज उठायेगी. उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में किसानों के लिए राहत प्रदान करना जरुरी है. नहीं तो उन्हें जीवन यापन के लिए महाजनों से कर्ज लेना पड़ेगा और फिर उनकी जमीन महाजनों के दखल में होगी. श्री सोरेन ने कहा कि सरकार पंचायत स्तर पर रोजगार का सृजन करे. रबी पर भी आफत होगीहेमंत सोरेन ने कहा कि जो स्थिति लग रही है, उसके मुताबिक रबी फसल पर भी आफत रहेगी. उन्होंने कृषि मंत्री रणधीर सिंह पर हमला बोलते हुए कहा कि मंत्री अपने गृह जिले को लेकर ही मेहरबान हैं, जबकि लगभग राज्य के सभी जिलों में स्थिति भयावह है. एक मंत्री होने के नाते उन्हें समग्र राज्य को लेकर सोंच रखनी चाहिए.बिहार का परिणाम दिल्ली पार्ट-टू होगाएक सवाल के जवाब में झामुमो नेता हेमंत सोरेन ने कहा कि बिहार का चुनाव परिणाम भाजपा के हित में नहीं रहेगा. वहां का परिणाम दिल्ली पार्ट 2 साबित होगा. हालांकि बिहार में अपनी पार्टी झामुमो की स्थिति पर उन्होंने किसी तरह की भविष्यवाणी करने से इनकार कि या. उन्होंने कहा कि झामुमो उद्योगों के खिलाफ नही है, लेकिन स्पष्ट नीति जरुरी है. इसीएल-पैनम के लिए जिन्होंने जमीन दी, आज उनकी जमीन गयी. जलावन भी नहीं रहा. कोयला लेने पर उन्हें उग्रवादी करार दिया जा रहा है. जिंदल के लिए जो जमीन अधिग्रहित हुई, उसे अदानी को ट्रांसफर किया जा रहा है. यह अधिकार किसी को नही है. रैयतों की जमीन रैयतों को वापस मिलनी चाहिए.
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