हत्या के प्रयास मामले में तीन लोगों को पांच वर्ष की सजा

Updated at : 28 Jul 2018 5:01 AM (IST)
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हत्या के प्रयास मामले में तीन लोगों को पांच वर्ष की सजा

गिरिडीह : विशेष न्यायाधीश सह जिला व अपर सत्र न्यायाधीश (प्रथम) रामबाबू गुप्ता की अदालत ने शुक्रवार को हत्या के प्रयास मामले में नारायण मंडल, यशोदा देवी व बुधनी देवी को दोषी पाते हुए धारा 307 भादवि के तहत पांच वर्ष की सजा सुनायी. साथ ही अदालत ने तीनों को पांच-पांच हजार का जुर्माना भी […]

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गिरिडीह : विशेष न्यायाधीश सह जिला व अपर सत्र न्यायाधीश (प्रथम) रामबाबू गुप्ता की अदालत ने शुक्रवार को हत्या के प्रयास मामले में नारायण मंडल, यशोदा देवी व बुधनी देवी को दोषी पाते हुए धारा 307 भादवि के तहत पांच वर्ष की सजा सुनायी. साथ ही अदालत ने तीनों को पांच-पांच हजार का जुर्माना भी किया है. जुर्माना की रकम जमा नहीं करने पर चार माह की अतिरिक्त सजा काटनी होगी. धारा 323 में अदालत ने तीनों को एक वर्ष की सजा, एक हजार का जुर्माना व जुर्माना नहीं देने पर एक माह की अतिरिक्त सजा सुनायी है.
मामला जमुआ थाना कांड संख्या 30/11 से जुड़ा हुआ है. 12.02.2011 को जमुआ थाना क्षेत्र के कोड़ाडीह निवासी सूचक रामेश्वर मंडल पिता स्व. युगल मंडल के बयान पर मामला दर्ज किया गया था. मामले में सूचक ने कहा कि 12 फरवरी की शाम करीब चार बजे वह अपने गांव स्थित गुमटी से घरेलू सामान खरीदकर घर लौट रहा था. जैसे ही वह नारायण मंडल के घर के सामने पहुंचा तो पूर्व से घात लगाये बैठे नारायण मंडल पिता रेवत मंडल, नारायण मंडल की मां बुधनी देवी, पत्नी यशोदा व बहन चिना देवी पति रामप्रसाद मंडल ने जमीन विवाद को लेकर उसके साथ गाली-गलौज करते हुए मारपीट शुरू कर दी.
हो-हल्ला सुनकर उसका पुत्र मेघलाल मंडल मौके पर पहुंचा. सभी ने मेघलाल मंडल को पकड़ लिया और जान मारने की नीयत से मेघलाल पर छूरा चला दिया. छूरा उसके ललाट पर लगा. इसके बाद दोनों पिता-पुत्र भागने लगे. इसके बाद भी नारायण मंडल ने मेघलाल को पकड़ कर उसके पेट में छूरा घोंप दिया. जिससे वह बेहोश होकर गिर पड़ा. बेहोशी की हालत में उसे इलाज के लिए जमुआ पीएचसी में भर्ती कराया गया. जहां चिकित्सक ने उसके नाजुक स्थिति को देख गिरिडीह और बाद में पीएमसीएच धनबाद रेफर कर दिया.
मामले में चिना देवी इस केस में ट्रायल फेस नहीं कर रही थी. तब अदालत ने तीनों लोगों को दोषी पाते हुए यह सजा सुनायी. मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से सहायक लोक अभियोजक पारसनाथ सिंह ने अनुसंधान पदाधिकारी, चिकित्सक समेत दस गवाहों के बयान का परीक्षण अदालत में कराया और बहस की. जबकि बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता जयकुमार सिंह ने बहस की.
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