जांच रिपोर्ट में प्रशासन का दावा भूख से नहीं हुई सावित्री की मौत

Updated at :06 Jun 2018 5:51 AM
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जांच रिपोर्ट में प्रशासन का दावा भूख से नहीं हुई सावित्री की मौत

गिरिडीह : गिरिडीह के अपर समाहर्ता अशोक शाहा ने डुमरी प्रखंड के मंगरगढ़ी निवासी सावित्री देवी की मौत की जांच रिपोर्ट डीसी मनोज कुमार को सौंप दी है. रिपोर्ट में मौत के पीछे का कारण भूख नहीं होने की बात कही है. रिपोर्ट(पत्रांक 903 दिनांक 04.06.18 ) में अपर समाहर्ता ने कहा है कि सोमवार […]

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गिरिडीह : गिरिडीह के अपर समाहर्ता अशोक शाहा ने डुमरी प्रखंड के मंगरगढ़ी निवासी सावित्री देवी की मौत की जांच रिपोर्ट डीसी मनोज कुमार को सौंप दी है. रिपोर्ट में मौत के पीछे का कारण भूख नहीं होने की बात कही है. रिपोर्ट(पत्रांक 903 दिनांक 04.06.18 ) में अपर समाहर्ता ने कहा है कि सोमवार को की गयी जांच में डुमरी प्रखंड के मंगरगढ़ी के ग्रामीणों से पूछताछ की गयी है.
सावित्री के घर के सामने इनके देवर भोला राम महतो का मकान है और दोनों का आंगन एक है. भोला राम महतो वैसे ओड़िशा में ट्रांसमिशन लाइन में काम करते हैं, लेकिन पिछले 15 दिनों से वे मंगरगढी गांव में ही हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि भोला राम ने बताया है कि वे 10 दिनों से सावित्री की देखभाल कर रहे थे और वे स्वयं उसे भोजन भी कराते थे.
8-10 दिनों से मृत्यु शय्या पर थी सावित्री : रिपोर्ट में इस बात का भी उल्लेख है कि सावित्री बीमारी से ग्रस्त थी एवं उसका इलाज राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान रांची(रिम्स) में हुआ था. जहां फाइंडिंग के रूप में महिला की बीमारी पारेनसाइमल हेमाटोमा उल्लेखित है. कहा गया है कि जांच में जब गांव की महिलाओं से पूछताछ की गयी तो बताया गया कि सावित्री पिछले 8-10 दिनों से मृत्यु शय्या पर थी.
गांव की शांति देवी (पति वकील महतो)का कहना था कि उसने सावित्री को भोजन भी कराया था. कहा गया है कि गांव में यह परिपाटी है कि मृत्यु शय्या के दौरान मिलने वाले लोग उनकी इच्छा के अनुसार भोजन कराते हैं. रिपोर्ट में डुमरी रेफरल अस्पताल के डाॅ डीपी वर्णवाल का भी जिक्र किया गया है. कहा गया है कि डॉ वर्णवाल ने जांच पदाधिकारी को बताया कि पारेनसाइमल हेमाटोमा को हेड इंज्यूरी भी कहा जा सकता है एवं इससे ब्लड क्लोटिंग की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता. डाॅ वर्णवाल के अनुसार हेमाटोमा से श्वसन प्रणाली भी बाधित हो सकती है और यह मौत का कारण भी बन सकता है.
पुत्रों को प्रतिमाह मिलता था मानदेय
सावित्री की मौत के बाद मृतक के बड़े पुत्र हीरालाल के संदर्भ में बताया गया था कि वे नागपुर के जिस ट्रांसमिशन लाइन में काम करते हैं वहां पर उन्हें 6 माह से मानदेय नहीं मिला है. वहीं जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि हीरालाल को प्रत्येक माह सात हजार तथा छोटे पुत्र हुलास कुमार (यूपी के रायपुर में बतौर ट्रेनर कार्यरत) को तीन हजार मिलता था.
भुखमरी रहती तो बैंक से निकाला जाता पैसा
रिपोर्ट में मृतका के बैंक खाते का जिक्र है. कहा गया है कि इलाहाबाद बैंक, चैनपुर में सावित्री देवी का खाता है, जिसमें चार अप्रैल 2018 को पेंशन के एवज में 1800 रुपया हस्तांतरित किया गया है. कहा गया है कि भुखमरी की स्थिति रहती तो निश्चित रूप से बैंक खाते से राशि की निकासी की जाती. कहा गया है कि सावित्री की मौत शनिवार की सुबह आठ बजे हुई है और उस समय इन्हें पानी भी मुहैया कराया गया था. एसी ने अपने रिपोर्ट में कहा है कि सावित्री की मौत का अंदेशा लोगों को था इसलिए इनकी मृत्यु शय्या के पास हमेशा मिलनेवालों की भीड़ लगी रहती थी.
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