भवनाथपुर-मेराल रेल लाइन का अस्तित्व खतरे में
स्थानीय ग्रामीण और राजनीतिक दल पिछले 30 वर्षों से भवनाथपुर से बरवाडीह तक सेल की इस लाइन पर पैसेंजर ट्रेन चलाने की मांग कर रहे है. क्षेत्र के विकास के लिए यह एक बड़ा मुद्दा था, लेकिन पटरियों और पत्थर की चोरी होने के बाद अब पैसेंजर ट्रेन चलाने की उम्मीदें पूरी तरह धराशायी होती दिख रही हैं. बताया गया कि चार वर्ष पूर्व गढ़वा एसपी ने स्वयं भवनाथपुर पहुंचकर रेल लाइन का निरीक्षण किया था. उस वक्त उन्होंने स्पष्ट कहा था कि पुलिस अपनी कार्रवाई कर रही है, लेकिन रेल संपत्ति की सुरक्षा की प्राथमिक जिम्मेदारी सेल प्रबंधन की है. इसके बावजूद सेल अधिकारियों की निष्क्रियता के कारण चोरों के हौसले बुलंद हैं. अधिकारियों की इसी चुप्पी के कारण करोड़ों की सरकारी संपत्ति माफियाओं की भेंट चढ़ रही है. लोगों का कहना हैं कि सेल प्रबंधन की निष्क्रियता के कारण लोहा और पत्थर माफिया का मनोबल बढ़ा हुआ है. अगर जल्द ही ठोस कदम नहीं उठाये गये, तो यह 34 किलोमीटर लंबी रेल लाइन पूरी तरह नक्शे से गायब हो जायेगी.
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