चेमो-सनेया गांव को डूबने से बचाने के लिये होगा संवैधानिक आंदोलन : ग्रामीण

1857 के स्वतंत्रता सेनानी शहीद नीलांबर-पीतांबर के गांव बड़गड़ प्रखंड के चेमो-सनेया में स्थापित उनकी प्रतिमा के समक्ष ग्रामीणों ने गणतंत्र दिवस के मौके पर बैठक की.
1857 के स्वतंत्रता सेनानी नीलांबर-पीतांबर के गांव चेमो-सनेया में झंडोत्तोलन के बाद ग्रामीणों की हुई बैठक मंडल डैम के डुब क्षेत्र में आने का किया गया विरोध गढ़वा. 1857 के स्वतंत्रता सेनानी शहीद नीलांबर-पीतांबर के गांव बड़गड़ प्रखंड के चेमो-सनेया में स्थापित उनकी प्रतिमा के समक्ष ग्रामीणों ने गणतंत्र दिवस के मौके पर बैठक की. बैठक में मंडल डैम के निर्माण के दौरान इस ऐतिहासिक गांव को डूबने से बचाने के लिये आंदोलन का संकल्प लिया गया. बैठक में गांव के आदिम जनजाति एवं वनवासियों ने कहा कि मंडल डैम को बनाकर उनके गांव को डुबाना एक साजिश है. झारखंड में हमेशा किसी न किसी बहाने से आदिवासियों को विस्थापित करने एवं उनके अस्तित्व को समाप्त करने की साजिश रची जाती रही है. बैठक में कहा गया कि सरकार को स्वतंत्रता सेनानी के इस गांव को विकसित करना चाहिये था, लेकिन उल्टे गांव को डूब क्षेत्र बनाकर हमेशा के लिये समाप्त करने की योजना बनायी गयी है. उन्होंने कहा कि वे इसका संवैधानिक तरीके से विरोध करेंगेे. बैठक के पूर्व नीलांबर-पीतांबर की प्रतिमा के समक्ष झंडोत्तोलन भी किया गया. इस मौके पर नीलांबर-पीतांबर के वंशज अरुण सिंह, चरकू सिंह, हरिहर सिंह सहित ग्राम स्वशाषण फेडरेशन के संयोजि तियोफिल लकड़ा, औरंगा बांध विरोध संगठन के जितेंद्र सिंह चेरो, खरवार आदिवासी एकता संघ के जिला उपाध्यक्ष विनय सिंह खरवार, कुटकू डुब क्षेत्र शही नीलांबर-पीतांबर संघर्ष मोरचा के अध्यक्ष भिखायल केरकेट्टा, काशीनाथ सिंह, अनिल, राधे किसान, विठल किसान, सुंदर किसान, शीतल किसान, वीरेंद्र किसान, पुष्पा कुजूर, अलविश मिंज, भोला सिंह खरवार, विनेश्वर सिंह खरवार, कोदू भुईंया, जितन सिंह, बरही बईगा, ओझवा बईगा, विश्वास मुंडा, संजय सिंह खरवार, महेंद्र सिंह खरवार आदि मौजूद थे.
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