भवन होने के बाद भी सेविका के मायके में चलता है केंद्र

कागज पर चल रहा आंगनबाड़ी केंद्र, डेढ़ साल से बच्चे गायब
कागज पर चल रहा आंगनबाड़ी केंद्र, डेढ़ साल से बच्चे गायब नंद कुमार, रंका. रंका अनुमंडल मुख्यालय के बर मुहल्ला स्थित आंगनबाड़ी केंद्र संख्या-2 पिछले डेढ़ साल से सिर्फ कागजों पर सिमट कर रह गया है. विभागीय उदासीनता और मिलीभगत का आलम यह है कि केंद्र का अपना सरकारी भवन होने के बावजूद सेविका इसे अपने मायके के एक निजी कमरे में संचालित कर रही है, जहाँ एक भी बच्चा पढ़ने नहीं आता.स्थानीय ग्रामीण सुधीर सोनी ने बताया कि करीब डेढ़ साल से सेविका जिन्नत तारा केंद्र को अपने मायके में चला रही हैं. इस केंद्र में बच्चों की उपस्थिति शून्य है. मोहल्ले के सभी बच्चे या तो निजी स्कूलों में जा रहे हैं या सरकारी स्कूलों में, क्योंकि आंगनबाड़ी केंद्र सुचारू रूप से खुलता ही नहीं है. ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि बच्चों को मिलने वाले सरकारी पोषाहार का कोई अता-पता नहीं रहता और विभाग की मिलीभगत से यह खेल चल रहा है. आसपास की महिलाओं ने शिकायत की कि बच्चों को मिलने वाले सरकारी स्वेटर तक का वितरण नहीं किया गया है.ग्रामीणों की शिकायत की सच्चाई जानने के लिए जब ””””प्रभात खबर”””” की टीम पूर्वाह्न 12 बजे केंद्र पर पहुंची, तो वहां ताला लटका मिला. न तो वहां कोई बच्चा मौजूद था और न ही सेविका. भवन जर्जर हो चुका है जब इस संबंध में सेविका जिन्नत तारा से पूछताछ की गयी, तो उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि आंगनबाड़ी केंद्र का सरकारी भवन नदी के किनारे स्थित है, जो अब काफी जर्जर हो चुका है. सुरक्षा के लिहाज से वह अपने मायके के घर में केंद्र का संचालन कर रही हैं. हालांकि, बंद केंद्र और बच्चों की अनुपस्थिति पर उनके पास कोई ठोस जवाब नहीं था. गंभीर विषय हैं, जांच होगी बाल विकास परियोजना पदाधिकारी अल्पना कुमारी ने कहा कि मामला मेरे संज्ञान में आया है. आंगनबाड़ी केंद्र का निजी आवास में चलना और बच्चों की अनुपस्थिति गंभीर विषय है. इसकी पूरी जांच करायी जायेगी और दोषी पाये जाने पर संबंधित सेविका के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जायेगी.
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