श्रमीमद्भागवत गीता मनुष्य को भगवान की शरण में ले जाने का प्रशस्त मार्ग

प्राचीन काली मंदिर में गूंजा नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की
प्राचीन काली मंदिर में गूंजा नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की प्रतिनिधि, गढ़वा शहर के प्राचीन काली मंदिर प्रांगण में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन शनिवार को भगवान श्री कृष्ण का जन्मोत्सव श्रद्धा व उल्लास के साथ मनाया गया. जैसे ही भगवान का जन्म हुआ, पूरा पंडाल ””नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की”” के जयघोष से गूंज उठा. श्रद्धालु भक्ति में सराबोर होकर झूम उठे. वृंदावन से पधारे कथावाचक पंडित कुंज बिहारी शुक्ला जी महाराज ने कथा का अमृतपान कराते हुए कहा कि श्रीमद्भागवत साक्षात भगवान श्री कृष्ण का वांग्मय स्वरूप है. उन्होंने कहा कि लोगों को समय निकालकर भागवत कथा का श्रवण अवश्य करना चाहिए. यह एकमात्र ऐसा ग्रंथ है जो मनुष्य को भगवान की शरण में ले जाने का मार्ग प्रशस्त करता है. कथा के चौथे दिन शहर के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों से भी भारी संख्या में भक्त पहुंचे. लगभग 500 से अधिक श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने माहौल को पूरी तरह भक्तिमय बना दिया. जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में विशेष झांकी सजायी गयी और माखन-मिश्री का प्रसाद वितरित किया गया. इस धार्मिक अनुष्ठान में मुख्य अतिथि के रूप में अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीएम) संजय कुमार पांडेय मौजूद थे. उनके साथ ही आयोजन को सफल बनाने में आचार्य पंकज मिश्रा पुजारी कमल पाठक, सुधा पाठक, मीरा यादव, विनोद पाठक, सियाराम पांडेय, जितेंद्र मिश्र, पार्वती सिंह, शोभा तिवारी, शंकर शरण तिवारी आदि सक्रिय थेे.
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