जो जिस निमित्त, उससे संबंधित कार्य करना ही धर्म : सुरेश शास्त्री

Updated at : 09 Jul 2024 8:37 PM (IST)
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जो जिस निमित्त, उससे संबंधित कार्य करना ही धर्म : सुरेश शास्त्री

जो जिस निमित्त, उससे संबंधित कार्य करना ही धर्म : सुरेश शास्त्री

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जिले के चिनिया प्रखंड के सिगसिगा कला गांव में रुद्र महायज्ञ सह हनुमत प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम चल रहा है. इसके तहत हो रही कथा के दूसरे दिन पंडित सुरेश शास्त्री ने कहा कि दुनिया धर्म पर टिकी हुई है. जड़ और चेतन दोनों का अपना-अपना धर्म होता है. धर्म हमारे जीवन को मर्यादित बनाता है. मानव अपने धर्म से विमुख हो जाये, तो संसार का संचालन रुक जायेगा. धर्म की व्याख्या की चर्चा करते हुए शास्त्रीजी ने कहा कि धर्म मानव जीवन की सीढ़ी है. धर्म से अभिप्राय सिर्फ पूजा-वंदना नहीं, जो जिस निमित्त है उसके द्वारा संबंधित कार्य का संपादन ही धर्म है. संसार का संचालन धर्म के आधार पर ही हो रहा है. धर्म या स्वभाव के कारण ही वस्तुओं एवं प्राणियों का वजूद है. उन्होंने कहा कि केवल भोजन, शयन और संतान उत्पत्ति करना मानव धर्म नहीं है. सभी योनियों में मानव जीवन ही धर्म एवं संस्कृति के लिए है. आहार, निद्रा, भय और मैथुन, ये चार बातें मनुष्य और अन्य जीवों में सामान्य रूप से विद्यमान होते हैं. लेकिन मनुष्य में एक गुण ऐसा है, जो मानव से अलग जीवन में नहीं पाया जाता, वह है धर्म.

धर्म के कारण मानव पशु से अलग : धर्म मानव का विशेष गुण है, जिसके कारण वह पशु से भिन्न है. शेष जीव भोग भोगने के लिए संसार में आते हैं. धर्म हमारे जीवन की वह पद्धति है, जिसके अनुपालन से पतन रुक जाता है और मनुष्य पावन हो जाता है. दांपत्य जीवन में पति-पत्नी को सात फेरों के समय गांठ बांधकर (ग्रंथि बंधन) करके ही एक-दूसरे के साथ जीवन बिताने के की शपथ दिलायी जाती है. इस तरह से विवाह एक बंधन और एक संस्कार है. लेकिन कलियुग में विवाह एक बंधन और संस्कार नहीं, व्यापार हो गया है. धर्म केवल दिखावा के लिए नहीं, बल्कि व्यवहार और आचरण में भी दिखना चाहिये.

लोगों का ध्यान भौतिक सुख-सुविधाओं पर ज्यादा : रामानुजाचार्य

यज्ञ के दौरान अन्य कई विद्वानों का प्रवचन हुआ. इस अवसर पर श्रीमद्जगद्गुरु रामानुजाचार्य सर्वेश्वराचार्य स्वामी जी महाराज ने कहा कि वर्तमान समय में लोग अध्यात्म छोड़कर भौतिक सुख-सुविधाओं पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं. यह सभ्य समाज के लिए अशुभ संकेत है. अर्चना उपाध्याय ने कहा कि इस शरीर का निर्माण पांच चीजों से मिलकर हुआ है, जो नश्वर है. कल्याणी जी महाराज ने कहा कि धर्म है, तो मनुष्य का विकास होता है. नहीं तो नाश होता है.

उपस्थित लोग : मौके पर यज्ञ कमेटी के अध्यक्ष अंबिका यादव, अजय यादव, बैजनाथ यादव, विश्वनाथ यादव, विकास यादव, रामानंद यादव, संजय कुमार यादव, जितेंद्र कुमार यादव, अरुण यादव, नारायण यादव, विजय यादव, बदन यादव, रामबचन राम, हरिहर राम, भारत यादव, पचु यादव, उपेंद्र यादव, जीवन यादव व मनोज यादव सहित अन्य समिति के सदस्य एवं श्रद्धालु उपस्थित थे.

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