भवनाथपुर की छह सदाबहार नदियां पूरी तरह सूखीं
Published by : Akarsh Aniket Updated At : 18 May 2026 9:33 PM
भवनाथपुर की छह सदाबहार नदियां पूरी तरह सूखीं
विजय सिंह, भवनाथपुर भीषण गर्मी और बढ़ते तापमान के कारण भवनाथपुर प्रखंड में जलसंकट और गंभीर हो गया है. कभी ””””सदाबहार”””” कहे जाने वाले इलाके की करीब आधा दर्जन नदियां पूरी तरह सूख गयी हैं और रेगिस्तान में बदल गयी हैं. नदियों के सूखने से तटीय गांवों में पेयजल की समस्या खड़ी हो गयी है. वहीं जंगलों में पानी खत्म होने से पशु-पक्षियों और जंगली जानवरों का जीवन संकट में है. अब वन्य जीव पानी की तलाश में भटककर आबादी वाले ग्रामीण इलाकों में आ रहे हैं. राहत की बात यह है कि ग्रामीण इंसानियत का फर्ज निभाते हुए इन प्यासे जानवरों को पानी पिला रहे हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि वन विभाग ने जंगलों में वन्य प्राणियों के लिए कोई वैकल्पिक पानी की व्यवस्था नहीं की, जिससे यह स्थिति उत्पन्न हुई है. प्रखंड की नौ पंचायतों से गुजरने वाली नदियों में से केवल कैलान और पंडरिया पंचायत के बीच बहने वाली बनरझूला और झरिअवा नाला में ही थोड़ा पानी बचा है, जो सेल डैम से आता है. इसके अलावा अन्य सभी छोटी-बड़ी नदियां पूरी तरह सूख चुकी हैं. प्रमुख नदियों की स्थिति रजदहवा नदी: मकरी व अरसली दक्षिणी पंचायत के बीच कडीया डैम से निकलने वाली यह नदी बुका, भवनाथपुर और सीघीताली होते हुए खरौंधी की ढंढरा नदी में मिलती है. अब यह पूरी तरह सूखी है. बगहि नदी: मकरी के बड़का खाड़ी से निकलकर सीघीताली होते हुए ढंढरा नदी में मिलने वाली यह नदी भी सूखकर मैदान बन चुकी है. झोंक व पिआह नाला: कैलान पंचायत के जंगलों से गुजरने वाली झोंक नदी और पिआह नाला का पानी पूरी तरह गायब है. वैषनाराज नदी: अरसली उत्तरी के जमूतियां जंगल से निकलने वाली यह नदी झुमरी और टाउनशिप रेलवे साइडिंग होते हुए सेल डैम में मिलती है. इस नदी पर बड़े पैमाने पर अवैध अतिक्रमण हुआ है, जिससे यह पूरी तरह सूख चुकी है.
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