Jharkhand News : फाईलों में ही दबकर रह गयी मिट्टी शिल्पकारों के उत्थान की योजना

Updated at : 06 Dec 2020 11:28 PM (IST)
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Jharkhand News : फाईलों में ही दबकर रह गयी मिट्टी शिल्पकारों के उत्थान की योजना

गढ़वा में मिट्टी शिल्पकारों के उत्थान की योजना फाईलों में ही दबकर दम तोड़ रही

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jharkhand news, Garhwa news, गढ़वा न्यूज़ इन हिंदी, गढ़वा न्यूज़ टुडे गढ़वा : एक तरफ जहां केंद्र से लेकर राज्य सरकार तक लोगों को स्वरोजगार से जोड़ने के लिये कौशल विकास को बढ़ावा दे रही है, तो वहीं पुश्त दर पुश्त परंपरागत काम से जुड़े मिट्टी शिल्पकारों के उत्थान की योजना फाईलों में ही दबकर दम तोड़ रही है. प्रशासनिक लापरवाही की वजह से उनकी दयनीय स्थिति में सुधार की योजना पूरा नहीं किया जा सका है़.

झारखंड राज्य में माटी कला बोर्ड के गठन के बाद से यहां मिट्ठी से परंपरागत बर्तन आदि बनाने का काम कर रहे कुम्हारों का सर्वेक्षण करने का निर्देश दिया गया था़. मिट्टी शिल्पकारों की गणना, वितीय उन्नयन, प्रशिक्षण व उत्पादित बाजार उपलब्ध कराने को लेकर बोर्ड की ओर से जिला प्रशासन को पिछले साल अगस्त महीने में पत्र प्रेषित किया गया था़. लेकिन करीब डेढ़ साल बाद भी मिट्टी शल्पकारों की गणना का कार्य भी पूरा नहीं किया जा सका है़.

जिला सांख्यिकी कार्यालय की ओर से सभी प्रखंड विकास पदाधिकारियों को पत्र भेजकर इससे संबंधित प्रतिवेदन मांगी गयी थी़. लेकिन जिले के 20 प्रखंडों में से मात्र 15 प्रखंडों की ओर से ही मिट्टी शिल्पकार परिवार के सदस्यों की संख्या जुटाकर भेजी गयी है़ लेकिन शेष पांच प्रखंडों की ओर से सांख्यिकी विभाग को अभी तक रिपोर्ट प्राप्त नहीं हो सकी है़.

जबकि इसके अलावे आगे किया जानेवाला कार्य वितीय उन्नयन, प्रशिक्षण व उत्पादित बाजार उपलब्ध कराने आदि की दिशा में कोई कदम नहीं उठाया जा सका है़

15 प्रखंडों में मिट्टी शिल्पकारों की संख्या सिर्फ 1181

गढ़वा जिले के 15 प्रखंडों की ओर से मिट्टी शिल्पकारों की जो गिनती की गयी है, उस हिसाब से बड़े पैमाने पर लोग (कुम्हार, प्रजापति) इस परंपरागत व्यवसाय को छोड़ रहे हैं. गणना के अनुसार 15 प्रखंडों में सिर्फ 1181 लोग ही इस काम से जुड़े हुए हैं. सर्वेक्षण के अनुसार मिट्टी शिल्पकार मुख्य रूप से त्योहारों, शादी-विवाह व गर्मी के मौसम में ही सक्रिय रहते है़ं, तब वे मिट्टी के घड़े, खपड़ा, कड़ाही, टहरी, दीपक, ढक्कन, सुराही, कलश आदि बनाते हैं.

सर्वेक्षण के अनुसार भंडरिया में 52, बरडीहा में 87, चिनियां में 51, मेराल में 203, विशुनपुरा में 46, रमना में 134, सगमा में 79, केतार में 89, मझिआंव में 177, धुरकी में पांच, रंका मं 121, भवनाथपुर में 52, श्रीबंशीधर नगर में 59, बड़गड़ में 13 व डंडा प्रखंड में 13 लोग इस परंपरागत धंधे से जुड़े हुए हैं

इससे संबंधित फाईल का अध्ययन करेंगे :

इस संबंध में जिला कोषागार पदाधिकारी सह सांख्यिकी पदाधिकारी अर्जुन प्रसाद ने बताया कि वे इसके प्रभार में मार्च महीने से है़ं उन्हें इस सर्वेक्षण के बारे में जानकारी अभी नहीं है़. लेकिन वे इस मामले से संबंधित फाईल को देखकर इसे पूरा कराने का काम करेंगे़.

जिला सांख्यिकी पदाधिकारी

posted by : sameer oraon

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