मंईयां सम्मान योजना और अबुआ आवास योजना पर मंडराया संकट! खनिज संशोधन विधेयक के खिलाफ सड़कों पर उतरेगी JMM

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बैठक में शामिल झामुमो नेता | Prabhat Khabar Network

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झारखंड मुक्ति मोर्चा ने खनिज संशोधन विधेयक 2026 का विरोध तेज किया। मिथिलेश ठाकुर ने कहा कि राज्य के अधिकारों और खनिज संपदा से कोई समझौता नहीं होगा।

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गढ़वा: गढ़वा में खान एवं खनिज क्षेत्र से जुड़े खनिज संशोधन विधेयक 2026 के विरोध में झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने अपनी रणनीति तेज कर दी है. रविवार को कल्याणपुर स्थित पूर्व मंत्री एवं झामुमो के केंद्रीय महासचिव मिथिलेश कुमार ठाकुर के आवास पर पार्टी के प्रमुख नेताओं की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई. इस बैठक में विधेयक के विभिन्न प्रावधानों, झारखंड के हितों पर पड़ने वाले इसके असर और आगामी आंदोलन की रूपरेखा पर गहन विचार-विमर्श किया गया. बैठक में पूर्व मंत्री मिथिलेश कुमार ठाकुर, विधायक छोटे राजा, झामुमो जिलाध्यक्ष शंभू राम, जिला परिषद अध्यक्ष शांति देवी, केंद्रीय सदस्य जवाहर पासवान तथा वरिष्ठ नेता ताहिर अंसारी समेत कई प्रमुख नेता मौजूद रहे.

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राज्य की आर्थिक स्वायत्तता और जनकल्याणकारी योजनाओं पर असर

बैठक के बाद मिथिलेश कुमार ठाकुर ने कहा कि देश के खनिज संसाधनों में झारखंड का महत्वपूर्ण योगदान रहा है. इसलिए राज्य के खनिज राजस्व और वैधानिक अधिकारों को कमजोर करने के किसी भी प्रयास को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. उन्होंने जोर देकर कहा कि यह मुद्दा केवल खनिज राजस्व तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर झारखंड की आर्थिक स्वायत्तता, विकास और यहां की जनता के अधिकारों से जुड़ा हुआ है. यदि राज्य के बकाए और खनिज राजस्व में कटौती होती है, तो इसका सीधा प्रभाव राज्य की वित्तीय स्थिति पर पड़ेगा. इससे झारखंड सरकार द्वारा चलाई जा रही विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं जैसे कि मुफ्त बिजली, मंईयां सम्मान योजना, अबुआ आवास योजना, सामाजिक सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य और पेंशन योजनाओं के संचालन के लिए संसाधनों की कमी हो सकती है.

केंद्र सरकार से पुनर्विचार की मांग और एकजुटता की अपील

पूर्व मंत्री ने आगे कहा कि झारखंड जल, जंगल, जमीन और खनिज संपदा से जुड़े अधिकारों की भूमि है और इन संसाधनों पर स्थानीय जनता के हितों की रक्षा करना झामुमो की मूल विचारधारा रही है. पार्टी इस विषय पर लोकतांत्रिक और संवैधानिक दायरे में रहकर अपना संघर्ष जारी रखेगी. उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि खनिज संशोधन विधेयक पर पुनर्विचार किया जाए और खनिज उत्पादक राज्यों के संवैधानिक व आर्थिक हितों का पूरा ध्यान रखा जाए. झामुमो नेताओं ने कहा कि झारखंड की खनिज संपदा देश के औद्योगिक और ऊर्जा विकास की रीढ़ है, इसलिए राज्य के हितों से समझौता नहीं होना चाहिए. पार्टी ने इस मुद्दे पर राज्य की जनता से भी एकजुट होकर अपनी आवाज बुलंद करने की अपील की है.


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