जोबरैया से पिपरा कला के बीच की गयी नदी की सफाई

Published by : Akarsh Aniket Updated At : 08 Jun 2026 9:02 PM

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जोबरैया से पिपरा कला के बीच की गयी नदी की सफाई

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प्रतिनिधि, गढ़वा जनसहभागिता व प्रशासनिक सहयोग से संचालित आपन सरस्वतिया अभियान के तहत सोमवार को लगातार 15वें दिन भी सरस्वतिया नदी की सफाई व डी-सिल्टिंग का कार्य जारी रहा. सोमवार को अभियान गढ़वा प्रखंड कार्यालय के सामने स्थित जोबरैया व पिपरा कला के बीच चलाया गया. अभियान के दौरान नदी के बीचो-बीच गिरे पुराने सूखे हुए वृक्षों, बड़ी-बड़ी डालियों व जल प्रवाह में बाधा उत्पन्न कर रहे स्थायी व अस्थायी अवरोधों को हटाया गया. साथ ही कई स्थानों पर नदी का चौड़ीकरण भी किया गया, जिससे जलधारा के प्राकृतिक प्रवाह को सुचारू बनाने में सहायता मिल सके. स्थानीय लोगों के अनुसार वर्षों से नदी के भीतर पड़े इन अवरोधों के कारण बरसात के दिनों में जल निकासी प्रभावित होती थी तथा कई स्थानों पर गाद का जमाव बढ़ जाता था. अभियान के तहत इन बाधाओं को हटाकर नदी के मूल स्वरूप को पुनर्स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया. अविनाश देव के सहयोग से चला अभियान नदी की सफाई व डी-सिल्टिंग का कार्य सोमवार को मेदिनीनगर के संत मरियम आवासीय विद्यालय के चेयरमैन अविनाश देव के सौजन्य से संचालित किया गया. उनके सहयोग से मशीनों की व्यवस्था कर नदी क्षेत्र में व्यापक स्तर पर कार्य कराया गया. अनुमंडल पदाधिकारी संजय कुमार ने अविनाश देव के सहयोग की सराहना करते हुए कहा कि समाज के विभिन्न वर्गों की भागीदारी ही इस अभियान की सबसे बड़ी ताकत है. उन्होंने कहा कि जब गढ़वा की भौगोलिक सीमा से बाहर के नागरिक भी किसी सार्वजनिक उद्देश्य को अपना अभियान मानकर आगे आते हैं, तब सकारात्मक परिणाम आने स्वाभाविक हैं. नदी के संरक्षण के लिए सक्रिय सहयोग प्रदान करें नगरवासी अनुमंडल पदाधिकारी ने कहा कि आपन सरस्वतिया अभियान अब एक व्यापक जनआंदोलन का स्वरूप ग्रहण कर चुका है. पिछले 15 दिनों से समाज के विभिन्न वर्गों, शिक्षाविदों, व्यवसायियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं आम नागरिकों का निरंतर सहयोग मिल रहा है. उन्होंने लोगों से अपील की कि नदी क्षेत्र में कचरा न फेंकें व इसकी स्वच्छता व संरक्षण के लिए आगे भी सक्रिय सहयोग प्रदान करें. उन्होंने कहा कि सरस्वतिया नदी केवल एक जलधारा नहीं, बल्कि क्षेत्र की प्राकृतिक धरोहर है, जिसके संरक्षण और पुनर्जीवन के लिए प्रशासन एवं समाज का यह संयुक्त प्रयास आगे भी निरंतर जारी रहेगा.

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