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East Singhbhum News : कीताडीह, कालापाथर और भोमाराडीह में वर्षों से जलमीनार खराब, पानी को भटक रहे ग्रामीण

Updated at : 26 May 2025 11:36 PM (IST)
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East Singhbhum News : कीताडीह, कालापाथर और भोमाराडीह में वर्षों से जलमीनार खराब, पानी को भटक रहे ग्रामीण

घाटशिला प्रखंड के सैकड़ों जलमीनार व चापाकल बंद, मरम्मत का प्रशासनिक निर्देश बेअसर

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घाटशिला. घाटशिला प्रखंड के कई क्षेत्रों में जल संकट दिन पर दिन गंभीर हो रहा है. उपायुक्त और एसडीओ मार्च 2025 से लगातार विभागीय अधिकारियों और जल स्वच्छता विभाग को खराब पड़े चापाकलों और जलमीनारों की मरम्मत के निर्देश दे रहे हैं. जमीनी स्तर पर कोई सुधार नहीं हुआ है. घाटशिला की बीडीओ ने पंचायत प्रतिनिधियों और जल स्वच्छता विभाग के साथ कई बैठक की, पर हालात जस के तस हैं. प्रखंड की 22 पंचायतों में लगभग 2300 चापाकल हैं. विभाग के पास जानकारी नहीं है कि कितने चालू और कितने खराब हैं. इसी तरह 350 से 400 जलमीनार विभिन्न योजनाओं से लगी हैं. उनकी स्थिति की सूची तैयार नहीं है. नीर निर्मल योजना, मुख्यमंत्री जल नल योजना, 14वें और 15वें वित्त आयोग व विधायक निधि से बनी जलमीनारों की हालत खराब है. कई जलमीनार वर्षों से बेकार हैं.

कीताडीह गांव में 2017-18 में नीर निर्मल योजना से 35 लाख रुपये की लागत से लगी 25 हजार लीटर क्षमता की जलमीनार एक साल से बंद है. इसी तरह भादुआ पंचायत के कालापाथर में लगभग 40 लाख रुपये की लागत से बनी जलमीनार ढाई साल से बेकार है. झाटीझरना पंचायत के भोमाराडीह की जलमीनार दो साल से खराब है. इन जलमीनारों से पहले 60 से 70 घरों में जल आपूर्ति होती थी. अब ग्रामीणों को पुनः पुराने चापाकल या अन्य स्रोतों पर निर्भर रहना पड़ रहा है.

क्या कहते हैं ग्रामीण

गांव की जलमीनार सालों से खराब है. गर्मी में महिलाओं और बच्चों को परेशानी होती है. दूर-दराज से पानी लाना पड़ता है. सरकारी योजनाएं सिर्फ कागजों पर चल रही हैं. बार-बार शिकायत के बाद भी सुनवाई नहीं होती है.

– रंजना मुर्मू, कीताडीह

————————————–पानी की किल्लत से पूरा गांव परेशान है. जलमीनार सिर्फ शोभा की चीज़ बनकर रह गयी है. कई बार पंचायत से विभागीय अधिकारियों के पास शिकायत की गयी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई. अब हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं.

-संगुलता पातर, कीताडीह

————————————–

जलमीनार एक साल से खराब है. विभागीय अधिकारियों के पास देखने तक का समय नहीं है. इससे पहले जलमीनार खराब हुई थी, तब ग्रामीणों ने चंदा कर मरम्मत करायी थी. आखिर कब तक हम अपने दम पर सब कुछ करते रहेंगे.

सुना हांसदा, कीताडीह

–कोट–

मेरी तबीयत खराब है. गांव में जल समस्या को लेकर चिंतित हूं. 30 लाख रुपये की जलमीनार सालों से खराब है. विभागीय अधिकारी लापरवाह हैं. यह गांव अनुमंडल कार्यालय से महज एक किमी दूर है. एसडीओ साहब का आवास भी इसी गांव में है. गर्मी में हालात ज्यादा खराब हो गये हैं.

– पीतो हांसदा, ग्राम प्रधान, कीताडीह

————————————–जिला स्तर से लगातार बैठक हो रही है. निर्देश दिये जा रहे हैं, लेकिन प्रखंड स्तर पर पालन नहीं हो रहा है. यदि जलमीनार खराब है, तो उसकी सूची जल स्वच्छता विभाग के माध्यम से जिला कार्यालय को भेजनी चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा.

– देवयानी मुर्मू, जिप सदस्य, घाटशिला————————————–

उपायुक्त लगातार निर्देश दे रहे हैं, लेकिन प्रखंड कार्यालय सूची देने में असमर्थ रहता है. विभाग और पंचायत स्तर पर मिलीभगत के कारण पारदर्शिता नहीं है. हमने कई बार खराब चापाकल और जलमीनारों की सूची मांगी, लेकिन नहीं मिली. कई गांवों में हमने अपनी पहल पर जलमीनार की मरम्मत करायी. एक-दो दिन में उपायुक्त और डीडीसी से मिलकर जानकारी साझा करेंगे.

– कर्ण सिंह, जिप सदस्य, घाटशिला

————————————–इस विषय में संबंधित विभागीय पदाधिकारियों से बात कर रहे हैं. खराब पड़े जलस्रोतों की सूची के साथ जानकारी मांगी गयी है कि अब तक कितनों की मरम्मत की गयी है. इसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जायेगी.

सुनील चंद्र, एसडीओ, घाटशिला

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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AVINASH JHA

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By AVINASH JHA

AVINASH JHA is a contributor at Prabhat Khabar.

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