East Singhbhum News : भारतीय समाज व प्रकृति के जीवंत दस्तावेज हैं विभूति बाबू के साहित्य

Author Akash
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East Singhbhum News : भारतीय समाज व प्रकृति के जीवंत दस्तावेज हैं विभूति बाबू के साहित्य

घाटशिला. दो दिवसीय बंग साहित्य एवं संस्कृति उत्सव का समापन

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घाटशिला

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निखिल भारत बंग साहित्य सम्मेलन की आंचलिक समिति ने घाटशिला के जेसी हाई स्कूल स्थित आशा ऑडिटोरियम में दो दिवसीय बंग साहित्य एवं संस्कृति उत्सव का आयोजन किया. रविवार को समापन हुआ. विभूति भूषण बंद्योपाध्याय व रबींद्र नाथ ठाकुर की तस्वीर पर श्रद्धांजलि दी गयी. सम्मलेन में विभूति भूषण की दृष्टि में अपू विषय पर चर्चा हुई. जमशेदपुर शाखा की बुलबुल घोष ने संगीत की प्रस्तुति दी. कोलकाता के रबींद्र भारती विश्वविद्यालय के शिक्षाविद सह भाषाविद डॉ पवित्र सरकार ने अध्यक्षता की. अधिवेशन में प्रथम वक्ता डॉ काजल सेन ने पाथेर पांचाली, रांची यूनिवर्सिटी की डॉ रत्ना राय ने अपराजिता उपन्यास, घाटशिला कॉलेज के बांग्ला विभाग के अध्यक्ष डॉ संदीप चंद्रा ने विभूति भूषण की दृष्टि में अपू के विषय पर विचार रखे. पूर्णिमा राय ने संगीत प्रस्तुत किया. मंच का संचालन सूक्ष्मिता विश्वास ने किया.

सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने उत्सव में उत्साह भरा

शाम में कविता पाठ और विविध सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने उत्सव में उत्साह भर दिया. सानवी चटर्जी के नृत्य ने सबका मन मोह किया. राष्ट्रगान के साथ समापन किया गया. समिति के अध्यक्ष तापस चटर्जी और घाटशिला शाखा अध्यक्ष कंचन कर ने कहा कि सम्मेलन से भाषा और संस्कृति के प्रति जागरुकता व एकजुटता और मजबूत हुई है. यह सम्मेलन बांग्ला भाषा और साहित्य को नयी ऊर्जा देने वाला साबित होगा. मौके पर डॉ संदीप चंद्रा, शिल्पी सरकार समेत झारखंड, बिहार और ओडिशा के लगभग 300 प्रतिनिधि उपस्थित थे.

पाथेर पांचाली और अपराजिता उपन्यास पर रखे विचार

डॉ पवित्र सरकार ने कहा कि विभूति भूषण का साहित्य भारतीय समाज और प्रकृति के जीवंत दस्तावेज है. करीम सिटी कॉलेज के अध्यापक डॉ बैद्यनाथ त्रिपाठी ने झारखंड में बांग्ला भाषा संरक्षण के लिए प्रशासनिक समर्थन और सामाजिक पहल को जरूरी बताया. बेबी साव और मनोज सेन ने मातृभाषा शिक्षा को मजबूत करने की आवश्यकता पर अपने सुझाव रखे. अंतिम सत्र में बनोपाध्याय की साहित्य भावना सत्र में सभापति के रूप में मेदनीपुर के विद्यासागर विश्वविद्यालय के प्रो डॉ लायक अली खान की अध्यक्षता में झरना कर, इंद्रजीत गुप्ता और निसार अमीन ने तारा शंकर, माणिक और विभूति भूषण बंद्योपाध्याय के साहित्य पर विचार रखे.

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