East Singhbhum news : झारखंड की जीवंत सांस्कृतिक धरोहर है टुसू पर्व : रामदास सोरेन

Updated at : 17 Jan 2025 12:20 AM (IST)
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East Singhbhum news : झारखंड की जीवंत सांस्कृतिक धरोहर है टुसू पर्व : रामदास सोरेन

गालूडीह के सीताडांगा के टुसू मेला में दिखी झारखंडी संस्कृति की झलक, काड़ाडुबा की टुसू प्रतिमा को मिला प्रथम पुरस्कार

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गालूडीह. जोड़सा पंचायत के सीताडांगा गांव में गुरुवार को एसएससी क्लब के तत्वावधान में भव्य टुसू मेला का आयोजन किया गया. गालूडीह क्षेत्र का सबसे बड़ा मेला सीताडांगा में ही लगता है. गुरुवार को सीताडांगा फुटबॉल मैदान लोगों से खचाखच भरा था. मेले में मुख्य अतिथि के रूप में शिक्षा मंत्री रामदास सोरेन शामिल हुए. इस मेला में झारखंडी संस्कृति की झलक देखने को मिली. लोक कलाकार मांदर-धमसे की थाप पर थिरकते नजर आये. टुसू गीतों से मैदान गुंजायमान रहा. मेला में मंत्री रामदास सोरेन ने कहा कि झारखंड की जीवंत सांस्कृतिक धरोहर टुसू पर्व है. आस्था का यह महापर्व भाईचारा बढ़ाता है. दूर रहने वालों को घर बुलाता है. झारखंडी अपनी परंपरा, संस्कृति, भाषा और गीत को बचाये रखें.

दो दर्जन टुसू प्रतिमा लेकर पहुंचे थे लोग

मेले में टुसू प्रतिमा की प्रतियोगिता हुई. इसमें दो दर्जन लोग टुसू प्रतिमा लेकर पहुंचे थे. टुसू प्रतिमाओं का मंत्री ने मुआयना किया. पूरा मैदान टुसू के रंग में रंगा था. ग्रामीणों ने टुसू गीतों पर खूब नृत्य किया. टुसू प्रतियोगिता में काड़ाडुबा से लायी गयी टुसू को प्रथम पुरस्कार के रूप में 15 हजार नगद देकर सम्मानित किया गया. वहीं घोटीडुबा से लायी गयी टुसू को द्वितीय पुरस्कार 11 हजार, पोटका से लायी गयी टुसू को तृतीय पुरस्कार 7 हजार नगद देकर सम्मानित किया गया. बाकी सभी टुसू को सांत्वना पुरस्कार दिया गया. मौके पर जिप सदस्य सुभाष सिंह, मुखिया लालमोहन सिंह, आशा रानी सिंह, झामुमो नेता कालीपद गोराई, जगदीश भकत, वकील हेंब्रम, रतन महतो, सृष्टिधर महतो, दुर्गाचरण मुर्मू, अबनी महतो, दुलाराम हांसदा, रंजीत कोयरी, देवलाल महतो, मिथुन महतो समेत मेला कमेटी के सदस्य उपस्थित थे.

मुर्गा लड़ाई को लेकर ग्रामीणों में दिखा उत्साह

सीताडांगा टुसू मेला में झारखंडी संस्कृति और परंपरा का निर्वहन करते हुए ग्रामीणों ने मुर्गा पाड़ा का आयोजन किया. मुर्गा लड़ाई को लेकर ग्रामीणों में उत्साह देखा गया. मेला कमेटी ने कहा कि झारखंडी संस्कृति, परंपरा को हम कैसे भुला सकते हैं. मुर्गा पाड़ा में ग्रामीणों की भीड़ जुटी. लोग मुर्गा लड़ाई का आनंद उठाते रहे. देर शाम तक सीताडांगा जाने वाली सड़क लोगों की भीड़ से जाम रही.

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