ट्रंप सरकार का ईरान पर बयान: ‘हम जंग नहीं लड़ रहे’, वॉर पावर्स एक्ट की डेडलाइन पर US में छिड़ा कानूनी विवाद

Author Govind jee
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप . इमेज- एक्स/@WhiteHouse.

US-Iran Conflict: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने साफ कर दिया है कि अमेरिका और ईरान के बीच कोई युद्ध नहीं चल रहा है. यह बयान ऐसे समय आया है जब ‘वॉर पावर्स रेजोल्यूशन’ के तहत सेना के इस्तेमाल की कानूनी समय सीमा (डेडलाइन) खत्म होने वाली है. इस मुद्दे पर अब व्हाइट हाउस और अमेरिकी संसद (कांग्रेस) के बीच टकराव की स्थिति बन गई है.

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US-Iran Conflict: एनबीसी न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, हाउस स्पीकर माइक जॉनसन ने गुरुवार को कहा कि फिलहाल संसद से किसी विशेष मंजूरी की जरूरत नहीं है. उनका तर्क है कि अमेरिका अभी किसी सक्रिय युद्ध या सैन्य कार्रवाई में शामिल नहीं है. जॉनसन ने कैपिटल हिल में मीडिया से कहा कि अभी कोई एक्टिव फायरिंग या बमबारी नहीं हो रही है, बल्कि अमेरिका शांति स्थापित करने की कोशिश कर रहा है. जब उनसे शुक्रवार को खत्म हो रही 60 दिनों की कानूनी समय सीमा पर सवाल किया गया, तो उन्होंने स्पष्ट कहा है कि हम युद्ध में नहीं हैं.

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क्या है 1973 का ‘वॉर पावर्स रेजोल्यूशन’ और 1 मई की डेडलाइन?

1973 के इस कानून के अनुसार, राष्ट्रपति को बिना संसद की मंजूरी के सैन्य कार्रवाई शुरू करने के 60 दिनों के भीतर अपनी सेना वापस बुलानी पड़ती है. राष्ट्रपति ट्रंप ने 2 मार्च को आधिकारिक तौर पर संसद को सैन्य अभियान की जानकारी दी थी, जिसके हिसाब से 1 मई यानी आज यह डेडलाइन खत्म हो रही है. अब तक संसद से कोई आधिकारिक मंजूरी नहीं मिली है, जिससे संवैधानिक संकट पैदा हो सकता है. हालांकि कानून में 30 दिन की मोहलत बढ़ाने का विकल्प है, लेकिन राष्ट्रपति इसका इस्तेमाल करेंगे या नहीं, यह अभी साफ नहीं है.

सेक्रेटरी ऑफ वॉर पीट हेगसेथ की दलील

व्हाइट हाउस का कानूनी पक्ष यह है कि अभी चल रहे युद्धविराम (सीजफायर) की वजह से वॉर पावर्स एक्ट की समय सीमा रुक गई है. सेक्रेटरी ऑफ वॉर पीट हेगसेथ ने सीनेट की सुनवाई के दौरान कहा कि सक्रिय युद्ध रुकने से कानूनी जरूरतें बदल गई हैं. उन्होंने बताया कि उनकी समझ के मुताबिक, सीजफायर होने पर 60 दिनों की ‘क्लॉक’ रुक जाती है. हालांकि, विपक्षी डेमोक्रेट्स इस दलील को गलत बता रहे हैं. सीनेटर टिम केन का कहना है कि कानून में समय सीमा रोकने का ऐसा कोई प्रावधान नहीं है और शुक्रवार को यह मियाद खत्म हो जाएगी.

ट्रंप के बदलते बयान: कभी ‘छोटा दौरा’ तो कभी कहा ‘जंग लड़नी पड़ी’

इस पूरे सैन्य अभियान को लेकर ट्रंप के बयानों में काफी बदलाव देखा गया है. 28 फरवरी को जब हमले शुरू हुए, तब उन्होंने इसे ‘युद्ध’ बताया था और हताहतों की चेतावनी दी थी. 9 मार्च तक उन्होंने कहा कि जंग लगभग पूरी हो चुकी है और इसे एक ‘छोटा दौरा’ बताया. मार्च के अंत में उन्होंने युद्ध शब्द के इस्तेमाल से परहेज किया क्योंकि इसके लिए संसद की मंजूरी जरूरी होती है. लेकिन अप्रैल के मध्य में उन्होंने फिर कहा कि मुझे युद्ध में जाना पड़ा. गुरुवार को न्यूजमैक्स को दिए इंटरव्यू में उन्होंने इसे ‘युद्ध या सैन्य अभियान’ जो भी कहना चाहें, वह कह कर संबोधित किया.

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28 फरवरी से शुरू हुआ था विवाद 

इस सैन्य संघर्ष की शुरुआत 28 फरवरी को हुई थी, जब अमेरिका और इजरायल ने मिलकर तेहरान (ईरान) और अन्य ठिकानों पर हमले किए थे. जवाब में ईरान ने अमेरिकी बेस और इजरायली ठिकानों को निशाना बनाया और समुद्र में जहाजों का रास्ता रोका, जिससे ग्लोबल मार्केट में तेल की कीमतें काफी बढ़ गईं. सीनेटर एडम शिफ के अनुसार, इस दो महीने के संघर्ष में अब तक 13 अमेरिकी सैनिकों की जान जा चुकी है और अरबों डॉलर खर्च हो चुके हैं. विपक्ष अब इस सैन्य अभियान को बंद करने की मांग कर रहा है, लेकिन रिपब्लिकन कंट्रोल वाली संसद में इसे रोकना मुश्किल चुनौती है.

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