चीन दौरे से पहले मुश्किल में डोनाल्ड ट्रंप, ईरान से युद्ध होगा या समझौता? जानें क्या है नया प्लान

Published by :Govind Jee
Published at :01 May 2026 12:19 PM (IST)
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Trump china visit iran strategy deal or conflict

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप . इमेज- एक्स/@WhiteHouse.

Trump China Visit: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप 14 और 15 मई को चीन की यात्रा पर जाने वाले हैं. एनबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने बताया कि ट्रंप इस समय ईरान के साथ चल रहे तनाव और चीन दौरे, दोनों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहे हैं. असल में, युद्ध शुरू होने की वजह से यह यात्रा पहले भी टाली जा चुकी है, लेकिन अब अमेरिकी प्रशासन इसे और ज्यादा लेट नहीं करना चाहता क्योंकि चीन के साथ यह मुलाकात उनके लिए बहुत जरूरी है.

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Trump China Visit: द न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, समुद्र में लगी पाबंदियों ने ट्रंप की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और ईरान के कई बंदरगाहों पर सुरक्षा और लॉजिस्टिक की दिक्कतों की वजह से चीन दौरे की तैयारियों में अड़चनें आ रही हैं. चीन इस युद्ध को खत्म कराने में मदद तो करना चाहता है, लेकिन अमेरिका ने उसकी कई शिपिंग कंपनियों और तेल रिफाइनरियों पर पाबंदियां लगा रखी हैं. अमेरिका का आरोप है कि ये कंपनियां नियमों के खिलाफ जाकर ईरान से तेल का व्यापार कर रही हैं.

तेल की सप्लाई और बंद पड़ा समुद्री रास्ता

पूरे इलाके की एनर्जी सिक्योरिटी दांव पर लगी है. चीन और उसके पड़ोसी देश अपनी तेल की जरूरतों के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज वाले रास्ते पर निर्भर हैं. मार्च की शुरुआत से ही यह महत्वपूर्ण समुद्री रास्ता बंद है, जिससे पूरी दुनिया में सामान और तेल की सप्लाई पर बुरा असर पड़ा है. यह मुद्दा अब अमेरिका और चीन की बातचीत में सबसे बड़ा रहने वाला है.

ईरान के साथ पर्दे के पीछे बातचीत चल रही है: ट्रंप

ओवल ऑफिस में मीडिया से बात करते हुए ट्रंप ने दावा किया कि ईरान के साथ पर्दे के पीछे बातचीत चल रही है. ट्रंप ने कहा कि इस डील के बारे में सिर्फ उन्हें और उनके कुछ करीबियों को पता है. ट्रंप के मुताबिक, अमेरिकी पाबंदियों और समुद्री घेराबंदी की वजह से ईरान की अर्थव्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है और वह समझौता करने के लिए बेताब है. हालांकि, ट्रंप ने यह भी कहा कि ईरान में लीडरशिप को लेकर थोड़ी उलझन है कि आखिर वहां असली फैसले कौन ले रहा है.

पेंटागन की नई प्लानिंग  

सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, पेंटागन के अधिकारी ट्रंप को ईरान के खिलाफ नए मिलिट्री ऑप्शंस देने वाले हैं. हालांकि, ट्रंप फिलहाल बड़े हमले या बमबारी के मूड में नहीं दिख रहे हैं. घर के अंदर यानी अमेरिकी कांग्रेस में भी ट्रंप का विरोध हो रहा है. सांसद उनकी सैन्य शक्तियों (War Powers) को सीमित करना चाहते हैं. ट्रंप ने इस पर नाराजगी जताते हुए कहा कि जब वह डील की कोशिश कर रहे हैं, तब हर हफ्ते नेता युद्ध रोकने के नए प्रस्ताव ला रहे हैं.

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60 दिन की कानूनी डेडलाइन  

अमेरिका में 1973 के ‘वॉर पावर्स रेजोल्यूशन’ के तहत राष्ट्रपति को सैन्य कार्रवाई की जानकारी देने के 60 दिनों के भीतर संसद से मंजूरी लेनी होती है, जिसकी डेडलाइन इस हफ्ते खत्म हो रही है. सीएनएन के अनुसार, अमेरिका के युद्ध सचिव (Secretary of War) पीट हेगसेथ ने सीनेट की कमेटी को बताया कि अभी युद्धविराम (सीजफायर) चल रहा है, इसलिए यह 60 दिन की समयसीमा अभी रुकी हुई मानी जाएगी. हालांकि, वर्जीनिया के डेमोक्रेटिक सांसद टिम केन ने इस दलील को गलत बताते हुए कहा है कि कानून के हिसाब से यह प्रशासन के लिए बड़ी कानूनी चुनौती बनने वाला है.

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Govind Jee

लेखक के बारे में

By Govind Jee

गोविन्द जी ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय भोपाल से की है. वे वर्तमान में प्रभात खबर में कंटेंट राइटर (डिजिटल) के पद पर कार्यरत हैं. वे पिछले आठ महीनों से इस संस्थान से जुड़े हुए हैं. गोविंद जी को साहित्य पढ़ने और लिखने में भी रुचि है.

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