East Singhbhum News : राजस्व वसूली में आगे, सुविधा देने में पीछे<bha>;</bha> कीचड़ में सब्जी बेच रहे किसान
Updated at : 02 Apr 2026 12:32 AM (IST)
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2017 में बना शौचालय आज तक नहीं खुला, महिलाओं को झेलनी पड़ रही भारी परेशानी
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मुसाबनी.
मुसाबनी टाउनशिप और आस-पास के दर्जनों गांवों की लाइफलाइन माना जाने वाला मुसाबनी बाजार आज अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है. एचसीएल की खदानें बंद होने और 2005 में झारखंड सरकार की ओर से टाउनशिप के अधिग्रहण के बाद से यहां की व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गयी है. विडंबना यह है कि विभाग यहां से वर्षों तक राजस्व की वसूली तो करता रहा, लेकिन बदले में दुकानदारों और खरीदारों को गंदगी और असुविधा के सिवाय कुछ नहीं मिला.विधायक निधि से बना शौचालय बना ””””शोपीस””””
बाजार की सबसे बड़ी समस्या स्वच्छता और शौचालय की है. 2017 में तत्कालीन विधायक लक्ष्मण टुडू द्वारा विधायक निधि से यहां एक सार्वजनिक शौचालय और डीप बोरिंग का निर्माण कराया गया था. लेकिन ताज्जुब की बात यह है कि निर्माण के 9 साल बाद भी यह शौचालय जनता के लिए नहीं खुला है.ताले में बंद व्यवस्था:
शौचालय के मुख्य द्वार पर ताला लटका है और अब लोग इसके प्रवेश द्वार को ही कूड़ेदान के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं.ध्वस्त हुआ सुलभ शौचालय:
कंपनी के समय बना सुलभ शौचालय पहले ही ध्वस्त हो चुका है. शौचालय न होने के कारण पुरुष तो इधर-उधर निवृत्त हो जाते हैं, लेकिन महिला दुकानदारों और महिला ग्राहकों को भारी शर्मिंदगी और परेशानी का सामना करना पड़ता है.कूड़े के ढेर और कीचड़ के बीच ””””सब्जी मंडी””””
बाजार में नियमित साफ-सफाई की कोई व्यवस्था नहीं है, जिसके कारण जगह-जगह कूड़े के ढेर जमा हैं.वर्षा होने पर पूरा बाजार परिसर कीचड़ में तब्दील हो जाता है. इसी कीचड़ और गंदगी के बीच बैठकर स्थानीय किसान और व्यापारी अपनी सब्जियां बेचने को विवश हैं. पीने के पानी के नाम पर बाजार में केवल एक चापाकल है, जिससे हजारों की भीड़ अपनी प्यास बुझाती है. बैठने के लिए शेड न होने के कारण चिलचिलाती धूप और बारिश में व्यापारियों का बुरा हाल रहता है.प्रशासनिक उदासीनता की मार
स्थानीय सब्जी विक्रेताओं का कहना है कि वे लंबे समय से शौचालय, पेयजल और साफ-सफाई की मांग कर रहे हैं, लेकिन सरकारी पदाधिकारियों की उदासीनता के कारण उनकी सुनने वाला कोई नहीं है. बाजार में टाउनशिप के साथ-साथ सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों के लोग भी खरीदारी करने आते हैं, लेकिन बुनियादी सुविधाओं के नाम पर यहां शून्य व्यवस्था है. स्थानीय सब्जी विक्रेता ने कहा कि हम यहां से सरकार को राजस्व देते हैं, लेकिन हमें कीचड़ और बदबू के बीच काम करना पड़ता है. सबसे ज्यादा दिक्कत हमारी माताओं-बहनों को होती है क्योंकि यहां एक भी चलता हुआ शौचालय नहीं है.प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
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