East Singhbhum News : जल, जंगल और जमीन की रक्षा के साथ संवैधानिक अधिकारों का प्रचार जरूरी : बैजू मुर्मू

Published by : AVINASH JHA Updated At : 20 Apr 2025 11:24 PM

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घाटशिला के पावड़ा में माझी परगना महाल का सम्मेलन संपन्न, 55 गांवों के माझी बाबा समेत सैकड़ों लोग हुए शामिल

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घाटशिला. घाटशिला प्रखंड के माझी परगना महाल बाखूल पावड़ा में रविवार को महाल के कोयें नाखा का एक दिवसीय सामाजिक सम्मेलन संपन्न हुआ. इसकी अध्यक्षता देश परगना बैजू मुर्मू ने की. सम्मेलन में संताल समाज के 55 गांवों के माझी बाबा, पारानिक, गोड़ेत, जोग माझी समेत बड़ी संख्या में महिला-पुरुष पारंपरिक परिधान में शामिल हुए. देश परगना बाबा बैजू मुर्मू ने कहा कि आज का आदिवासी समाज अपनी पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था के माध्यम से शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और सामाजिक न्याय की दिशा में कार्य कर रहा है. उन्होंने कहा कि जल, जंगल और जमीन की रक्षा के साथ संवैधानिक अधिकारों का प्रचार-प्रसार भी समाज की प्राथमिकता है. प्रत्येक माझी बाबा अपने गांव की समस्याओं को सुलझाने को स्वतंत्र हैं, लेकिन जटिल विवादों को सामाजिक नियमावली के तहत विचार कर उच्च स्तर पर अग्रसारित करें, जिससे न्याय सुनिश्चित हो सके.

भाषा, लिपि और संस्कार हमें आदिवासी बनाये रखते हैं

ओलचिकी लिपि की अनिवार्यता पर जोर देते हुए देश परगना बाबा ने गांव-घर के हर व्यक्ति से ओलचिकी लिपि सीखने की अपील की. उन्होंने कहा हमारी भाषा, हमारी लिपि और हमारे संस्कार ही हमें आदिवासी बनाये रखते हैं. हमारी पहचान को सुरक्षित रखने के लिए ओलचिकी का सीखना आवश्यक है.

संताली की पढ़ाई ओलचिकी में कराने की मांग

उन्होंने बताया कि माझी परगना महाल के प्रतिनिधियों ने बार-बार सरकार को पेसा कानून और वन अधिकार कानून के तहत आदिवासियों को अधिकार देने के लिए ज्ञापन सौंपा है. शीघ्र ही प्रदेश के मुख्यमंत्री से मिलकर संताली भाषा को ओलचिकी लिपि में पढ़ाई-लिखाई की मांग की जायेगी.

समाज की प्रगति के लिए बनेगी नयी कमेटी

सम्मेलन में सामाजिक विकास से जुड़े कई प्रस्ताव पारित किये गये. उनके क्रियान्वयन के लिए कार्य समिति बनायी गयी. आगामी समीक्षा बैठक में और विस्तार दिया जायेगा. समाज के सर्वांगीण विकास के लिए ठोस रणनीति बनाकर तेजी से कार्य किया जायेगा. मौके पर तोरोप पारगना बाबा हरिपदो मुर्मू, दसमत हांसदा, चंद्राय हांसदा, देश पारानिक बाबा दुर्गा चरण मुर्मू, मर्शाल मुर्मू, संखो मुर्मू, बिरेन टुडू, जगदीश बास्के, मातु मार्डी, भादो मुर्मू, हरी बेसरा, लिटा हेम्ब्रोम, तुलसी हांसदा, पिताम्बर सोरेन, राम किस्कू, दुर्गा टुडू, लोपसा सोरेन, श्याम मुर्मू, सुनिल मुर्मू समेत समाज के सैकड़ों लोग उपस्थित थे.

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