East Singhbhum News : कैसे होगा वर्षा जल संचय, तालाब भरकर बना दिया स्लैग का टीला

Published by : AVINASH JHA Updated At : 25 Mar 2025 12:22 AM

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सालबनी के पास हाइवे से सटे क्षेत्र से तालाब गायब, जल संरक्षण की दिशा में हो रही पहल में कुछ लोग लगा रहे पलीता

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गालूडीह . बदलते जलवायु, पर्यावरण संकट पर लोग चिंता जताते हैं. जंगल बचाने, तालाब, डोभा, कुआं को बचाने पर जोर देते हैं. हालांकि, कई जगहों पर आज भी लोग जागरूक नहीं है. इसी का परिणाम है कि जल संकट लगातार बढ़ रहे हैं. कई जगहों पर देखा जा रहा है कि कभी तालाब था, अब कुछ ओर है. स्वरूप बदल गया है. तालाब गायब हो गये हैं. ऐसा ही नजारा घाटशिला प्रखंड के सालबनी के पास हाइवे से सटे इलाके में देखने को मिल रहा है. वहां कभी तालाब हुआ करता था. आज स्लैग का टीला है. लोग कहते हैं कि ऐसे में कैसे वर्षा जल संचय होगा? अंचल विभाग कहता है कि नियम है कि अगर किसी रैयत का तालाब है, तो वह भी उसे भर नहीं सकता है. यह अपराध है. सरकारी तालाब का स्वरूप बदला ही नहीं जा सकता है. धीरे-धीरे बढ़ती आबादी, भूमि माफियाओं की धमक के कारण परती जमीन की लूट हो रही है. अब तालाब का भी स्वरूप बदल कर खरीद-बिक्री होने लगी है. एक-दो साल पहले जहां तालाब, डोभा, नाला था. आज वहां समतल जमीन दिख रही है. कई जगह घर-मकान बने दिये गये हैं. इसपर रोक जरूरी है, अन्यथा एक समय ऐसा आयेगा जब तालाबों का अस्तित्व ही मिट जायेगा.

मऊभंडार में अंग्रेजी शासन काल में बनी पुलनुमा घेराबंदी टूटने से नहीं जमा हो रहा पानी, आसपास के क्षेत्र में लगातार गिर रहा भूगर्भ का जलस्तर

घाटशिला प्रखंड के मऊभंडार में सुवर्णरेखा नदी पर अंग्रेजी शासन काल में पुलनुमा घेराबंदी की गयी थी, जो जर्जर हो गयी है. पहले यहां नदी का पानी जमा होता था. अब बह जाता है. इससे आसपास के क्षेत्र में भूगर्भ जलस्तर नीचे गिर रहा है. यह पुल कभी लगभग 500 मछुआरा परिवारों के रोजगार का मुख्य साधन था. वर्तमान में उनकी रोजी-रोटी पर संकट है. अविभाजित बिहार के समय गालूडीह से मऊभंडार तक लिफ्ट एरिगेशन योजना के तहत किसान सिंचाई करते थे. अब पुलिया के कमजोर होने और जल संचय की व्यवस्था ठप पड़ने से खेती प्रभावित हो रही है. स्थानीय ग्रामीणों ने पुल के मरम्मत और पुनर्निर्माण के लिए कई बार सरकार और प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया. मुख्यमंत्री से लेकर स्थानीय जनप्रतिनिधियों तक लिखित अनुरोध किया गया. अबतक ठोस पहल नहीं हुई. ग्रामीणों का कहना है कि जल्द पुल का जीर्णोद्धार नहीं किया गया, तो मछुआरों और किसानों की समस्या और गहरा सकती है.

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