कुड़मी को एसटी में शामिल कराने की मांग जारी रहेगी, 11 जनवरी को रांची में होगा राज्यस्तरीय सम्मेलन

कुड़मी अधिकार महारैली सह बांदना पर्व में शामिल हुए विधायक सरयू राय व अन्य. फोटो : प्रभात खबर
Kurmi Adhikar Maha Rally: कुड़मी को अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा दिलाने के लिए रविवार को जमशेदपुर के गोपाल मैदान में कुड़मी अधिकार महारैली सह बांदना पर्व का आयोजन किया गया. महारैली में वक्ताओं ने कहा कि कुड़मी को एसटी में शामिल कराने का आंदोलन जारी रहेगा. 11 जनवरी को रांची में राज्यस्तरीय सम्मेलन का भी ऐलान किया गया.
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Kurmi Adhikar Maha Rally: कुड़मी को अनुसूचित जनजाति (एसटी) की सूची में शामिल करने और कुड़माली भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग जारी रहेगी. इसके लिए आंदोलन जारी रहेगा. जब तक सरकार हमारी मांगें पूरी नहीं करती है, झारखंड ही नहीं ओडिशा, पश्चिम बंगाल समेत अन्य राज्यों में मुखर होकर आवाज उठाते रहेंगे. बिष्टुपुर के गोपाल मैदान में रविवार को कुड़मी समाज के वक्ताओं ने ये बातें कहीं. वक्ताओं ने अपने हक व अधिकार के लिए एकजुट होकर आवाज उठाने और संघर्ष करने का कुड़मी समाज से आह्वान किया.
जमशेदपुर में कुड़मी अधिकार महारैली सह बांदना पर्व
कुड़मी सेना सह वृहद झारखंड कुड़मी समन्वय समिति की ओर से कुड़मी अधिकार महारैली सह बांदना पर्व का आयोजन किया गया. इसमें कोल्हान के विभिन्न क्षेत्रों के अलावा ओडिशा व पश्चिम बंगाल से आये कुड़मी समाज के लोग शामिल हुए. वक्ताओं ने कहा कि दिसंबर से लोकसभा और झारखंड विधानसभा का सत्र शुरू हो रहा है. इसलिए कुड़माली भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल कराने सहित कुड़मी को एसटी सूची में शामिल करने की दिशा में समाज के सांसदों व विधायकों को सरकार पर दबाव बनाना चाहिए. सम्मेलन में 11 जनवरी 2026 को रांची के मोरहाबादी मैदान में राज्यस्तरीय सम्मेलन के आयोजन करने का निर्णय भी लिया गया.
कुड़मी समाज की मांग संवैधानिक : सरयू राय
सम्मेलन के मुख्य अतिथि जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय ने कहा कि कुड़मी समाज की मांग संवैधानिक है. सरकारी कागजातों में इसके रिकॉर्ड हैं. इसका निराकरण भी सरकार के स्तर पर होना है, इसलिए राज्य व केंद्र सरकार को चाहिए कि समाज के प्रतिनिधिमंडल के साथ ‘टेबल टॉक’ करे. उनके जो हक-अधिकार हैं, उस पर उचित विचार करे.

Kurmi Adhikar Maha Rally: सामाजिक लड़ाई को अवरुद्ध करना उचित नहीं
वृहद झारखंड कुड़मी समन्वय समिति के संयोजक सह झारखंड आंदोलनकारी हरमोहन महतो ने कहा कि कुड़मी समाज लंबे समय से खुद को एसटी की सूची में शामिल करने के लिए आंदोलन कर रहा है. बीते दिनों ‘रेल टेका-डहर छेका’ में भारी संख्या में लोग जुटे थे. अब कुछ लोग समाज के लोगों को दिग्भ्रमित कर रहे हैं. यह समाज के आगे बढ़ने की राह में बाधक है. सामाजिक लड़ाई को अवरुद्ध करना उचित नहीं है.
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सामाजिक मुद्दे पर एकजुट होने की जरूरत : शैलेंद्र महतो
वृहद झारखंड कुड़मी समन्वय समिति के सह संयोजक सह कुड़मी सेना के अध्यक्ष शैलेंद्र महतो ने कहा कि सामाजिक मुद्दे पर समाज को राजनीतिक भावना से ऊपर उठकर समर्थन करना होगा. समाज को सामाजिक, सांस्कृतिक, आर्थिक, राजनैतिक व शैक्षणिक रूप से समृद्ध व विकसित बनाना किसी एक व्यक्ति या समूह से संभव नहीं है. इसके लिए समाज के सभी लोगों को एक मंच पर आना होगा. अपनी मांगों को लेकर लगातार विभिन्न मंच व मोर्चों के बैनर तले आंदोलन करना होगा. आज नहीं, तो कल समाज की जीत तय है.
बांदना पर्व में सामाजिक व सांस्कृतिक एकता का प्रदर्शन
गोपाल मैदान में बांदना पर्व के आयोजन में सामाजिक व सांस्कृतिक एकता को प्रदर्शित किया गया. पारंपरिक वाद्य यंत्रों की धुन पर मवेशियों का उत्साहवर्धन किया गया. कलाकारों ने गीत-संगीत से समाज के लोगों को झुमाया. कुड़मी समाज के लोग परंपरागत वेशभूषा, वाद्य यंत्र और औजार के साथ बांदना पर्व में शामिल हुए. मौके पर प्रदेश अध्यक्ष विशाल महतो, महिला प्रदेश अध्यक्ष पिंकी महतो, अरविंद महतो, सूरज महतो, कार्तिक महतो, पिंकी महतो, उज्ज्वल महतो समेत अन्य मौजूद थे.
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By Mithilesh Jha
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